logo
Breaking

इंजीनियरिंग कॉलेजों की फैकल्टी के लिए शरू होगा ई- कोर्स, AICTE देगा प्रशिक्षण

फैकल्टी के प्रशिक्षण के लिए जल्द ई-कोर्स लांच किए जाएंगे। नए पाठ्यक्रमों में वेद, योग, भारतीय पारंपरिक ज्ञान के पाठ्यक्रम भी शामिल होंगे।

इंजीनियरिंग कॉलेजों की फैकल्टी के लिए शरू होगा ई- कोर्स, AICTE देगा प्रशिक्षण

सभी इंजीनियरिंग कॉलेजों की फैकल्टी को विभिन्न पाठ्यक्रमों के लिए एआईसीटीई प्रशिक्षण देने की तैयारी की जा रही है। फैकल्टी के प्रशिक्षण के लिए जल्द ई-कोर्स लांच किए जाएंगे।

नए पाठ्यक्रमों में वेद, योग, भारतीय पारंपरिक ज्ञान के पाठ्यक्रम भी शामिल होंगे। शिक्षकों को जॉब मार्केट की जरूरतों से अवगत कराने के साथ उन्हें पढ़ाई की आधुनिक तकनीकों से परिचित कराया जाएगा।

वहीं शैक्षणिक संस्थानों में आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस की पढ़ाई पर जोर देने की भी तैयारी चल रही है। नई तकनीक जैसे एआई, रोबोटिक्स, मशीन लर्निंग (एमओ), इंटरनेट ऑफ थिंग्स (आईओटी) पर आधारित पाठ्यक्रमों के लिए ऑल इंडिया काउंसिल ऑफ टेक्निकल एजूकेशन (एआईसीटीई) ने पहली बार सिलेबस तैयार किया है

और इन पाठ्यक्रमों को 20 क्रेडिट प्वाइंट दिए गए हैं। इस नए करिकुलम का देशभर में मौजूद लगभग 3000 कॉलेजों में 80 फीसदी कॉलेजों में पालन किया जाएगा।

यह भी पढ़ेंः NEET Exam 2018: इन टॉपिक्स पर करें फोकस, टुकड़ों में बांटकर पढ़ें पूरा सिलेबस

नियोक्ता को होगा फायदा

नई तकनीकी पाठ्यक्रमों को क्रेडिट पाइंट दिए जाने से नियोक्ता को फायदा मिलेगा, क्योंकि अब उन्हें नई तकनीक आधारित रोजगारों में हायरिंग के लिए ज्यादा टैलेंट मिलेगा। इस नए सिलेबस में थ्योरी आधारित पाठ्यक्रमों से क्रेडिट प्वाइंट कम कर दिया गया है।

इस नए सिस्टम और सिलेबस के लागू होने से विद्यार्थी ज्यादा रोजगारपरक बनेंगे और इंडस्ट्री से जुड़ सकेंगे। दिल्ली टेक्निकल यूनिवर्सिटी, पंजाब टेक यूनिवर्सिटी और वाइएमसीए फरीदाबाद जैसे उच्च शैक्षणिक संस्थान नए सिलेबस को जारी करने की तैयारी कर रहे हैं।

यह भी पढ़ेंः राष्ट्रीय माध्यमिक शिक्षा अभियान: आज से 10वीं के 10 लाख स्टूडेंट्स का होगा इंटरेस्ट टेस्ट

छात्रों का बोझ होगा कम

आईआईटी पिछले कुछ सालों से इन पाठ्यक्रमों में अंडरग्रेजुएट डिग्री दे रही है। मौजूदा यूजी प्रोग्राम में 220 क्रेडिट सिस्टम का पालन किया जाता है। अब चार साल के यूजी प्रोग्राम में इस क्रेडिट को घटाकर 150-160 कर दिया गया है, जिससे छात्रों का बोझ कम होगा।

सरकार ने यह कदम एआई जैसी नई तकनीक में योग्य टैलेंट पूल के निर्माण करने के उद्देश्य से उठाया है। इससे नई तकनीक के क्षेत्र में मौजूद योग्य लोगों की कमी दूर होगी।

Share it
Top