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CGBSE Result 2018: सिपाही की बेटी और मजदूर के बेटे की ऊंची उड़ान, मैरिट में बनाया स्थान

सीजी बोर्ड के 12 वीं के रिजल्ट बुधवार घोषित कर दिए गए। मैरिट लिस्ट के टाप टेन में 8 छात्रों ने जगह बनाते हुए जिले का नाम रौशन किया है।

CGBSE Result 2018: सिपाही की बेटी और मजदूर के बेटे की ऊंची उड़ान, मैरिट में बनाया स्थान

सीजी बोर्ड के 12 वीं के रिजल्ट बुधवार घोषित कर दिए गए। मैरिट लिस्ट के टाप टेन में 8 छात्रों ने जगह बनाते हुए जिले का नाम रौशन किया है। इसमें ड्राइवर कांस्टेबल की बेटी संध्या दूसरे स्थान पर है तो मजदूर का बेटा हेमंत कुमार साहू चौथे नंबर पर है।

रेजा-कुली का काम करने वाली मां की बेटी सुरूचि ने 10 वां स्थान हासिल करते हुए सपनों को साकार करने की दिशा में कदम बढ़ाया है तो वेल्डर के बेटे शुभम का मेरिट में 9 वां स्थान है।

किसान के लाड़ले सुपुत्र कपिल साव को मेरिट में पांचवा रैंक मिला तो धार्मिक नगरी रतनपुर के छात्र आयुष ठाकुर को सातवां स्थान मिला है। अभावों से जूझते हुए सपनों को साकार करने की अोर बढ़ चले इन स्टूडेंट को अभी तो अैार उड़ान उड़नी है। जरूरत बस इन कदमों को संभालने अैार संवारने की है।

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1. ड्राइवर की बेटी संध्या बनना चाहती डॉक्टर

12वीं बोर्ड में प्रदेश मे दूसरा स्थान हासिल करने वाली संध्या कौशिक उस समय भावुक हो गई जब उसकी सहेली ने सबसे पहले इस उपलब्धि की जानकारी दी। संध्या की आंखों में पानी भर आया और उसने अपनी सहेली को गले लिया।

स्थानीय तिलकनगर स्थित महंती कन्या विद्यालय में पढ़ने वाली संध्या को 12 वीं बोर्ड में 97.40 प्रतिशत अंक मिला है। संध्या मध्यम वर्गीय परिवार से है। उनके पिता उमाकांत कौशिक कांस्टेबल है अैार अफसरों की गाडि़यां चलाते हैं।

वे अपनी बेटी को अफसर बनाना चाहते हैं लेकिन बेटी का सपना डाक्टर बनने का है। मां पद्मनी कौशिक गृहणी हैं जिनका बेटी की इस सफलता में अहम योगदान रहा। संध्या कोशिक अपने मां-बाप की तीन संतानों में दूसरे नंबर की है।

बेटी की इस सफलता को देखकर माता-पिता व पूरे परिवार में खुशी का माहौल है। बायोलॉजी की छात्रा संध्या कौशिक डॉक्टर बनकर दूर-दराज में रहने वाले गरीबों का इलाज कर सेवा करना चाहती है।

10 वीं में कुछ अंकों से रह गई थी पीछे

छात्रा संध्या कौशिक ने बताया वो दसवीं की परीक्षा में टॉप टेन में जगह बनाने कुछ ही अंक से पीछे रह गई थी। इस बात का जीवन भर मलाल रहेगा, लेकिन इसी कमी को दूर करने के लिए इस बार जान लड़ा दी। मन में था कि समय है कुछ कर गुजरने का, इस बात को ध्यान में रखकर मैंने पूरे साल पढ़ाई की उसका परिणाम आज सामने है। कोचिंग, स्कुल के साथ रोजाना 6 से 8 घण्टे की पढाई हुई।

शिक्षकों के साथ परिजन का पूरा सहयोग मिला। संध्या के अनुसार जो काम करो पूरे मन से करो वह चाहे खेल हो या पढ़ाई। हालांकि संध्या को अन्य बच्चों की तरह खेलकूद में बहुत ज्यादा रुचि नहीं है।

पिता उमाकांत कौशिक ने बताया कि वह जब आफिस जा रहे थे उसी समय फोन पर खबर मिली कि बेटी ने 12 वीं बोर्ड में प्रदेश में दूसरा स्थान हासिल किया है।

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स्वास्थ्य क्षेत्र में काम करने की बहुत गुंजाइश

बातचीत के दौरान संध्या ने बताया कि प्रदेश में मेडिकल क्षेत्र में काम करने की काफी गुंजाइश है। यहां डॉक्टरों की बड़ी कमी है। शासन भी डॉक्टरों पर बहुत खर्च करती है उसके बाद भी स्वास्थ्य क्षेत्र में सुधार नहीं हो पा रहा है। इसलिए डॉक्टर बन कर देश की सेवा करना चाहती हूं। संध्या ने आईएएस,आईपीएस अैार प्रशासनिक सेवा को अपना दूसरा विकल्प बताया है।

संध्या ने कहा कि बचपन से वह अपने आस-पास गरीबो को चिकित्सा उपचार के लिए तरसते हुए माहौल को देखा है एवं समाचारों चैनलों में नक्सल प्रभावित क्षेत्रों मे मरीज़ो को इलाज के लिए साधन नहीं मिलने से मरते हुए देखा है। जब वह डॉक्टर बनेंगी तो उनकी पहली पसंद ग्रामीण एवं नक्सली क्षेत्रो में रहकर सेवा देना होगा।

2. मजदूर के बेटे हेमंत का सपना इंजीनियर बनने का

छत्तीसगढ़ माध्यमिक शिक्षा मंडल द्वारा आयोजित 12 वीं बोर्ड परीक्षा में चौथा स्थान पाने वाले एचएसएम ग्लोबल हायर सेकेंडरी स्कूल दयालबंद का छात्र हेमंत कुमार साहू का सपना इंजी‍नियर बनना है।

हेमंत ने 96.80 अंकों के साथ टाप टेन में जगह बनाई है। एक पावर प्लांट में मजदूरी करने वाले निरंकार साहू के सुपुत्र हेमंत ने 10 वीं में पूरे प्रदेश में पहला स्थान पाया था। हेमंत की बहन स्वीति भी टॉप टेन में जगह बना चुकी है ,जो वर्तमान में पीएससी की तैयारी कर रही है।

अधिकारी बनाना है, लेकिन बेटे की चाह इंजीनियर की

हेमंत के पिता निरंकार साहू ने बताया उनके दोंनो बच्चे पढाई में काफी तेज़ हैं। पावर प्लांट में रोजी मजदूरी कर परिवार का भरण पोषण करने वाले निंरकार को हर महीने 7 हजार की छोटी सी पगार मिलता है।

जिससे मुश्किल से घर चलता है। बावजूद इसके वे अपने बच्चों को पढ़ा लिखाकर अधिकारी बनाना चाहते हैं। बेटे के 12 वीं में टॉपटेन में आने से गर्व महसूस कर रहे है निरंकार साहू के अनुसार अपने आप को बेचकर भी पढ़ाना पड़े तो सब करूंगा।

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12 वीं के साथ आईआईटी की भी तैयारी

10 वीं में टाप करने के बाद हेमंत साहू को एचएसएम ग्लोबल हायर सेकेंडरी स्कूल दयालबंद ने स्कालरशिप दी अैार वह अपने जांजगीर के गांव से बिलासपुर आ गया। ग्लोबल स्कूल में ही वह आईआईटी के साथ 12 वीं बोर्ड की तैयारी कर रहा था।

हेमंत का जेईईई मेंस क्लीयर होने के बाद वह आईआईटी की तैयारी कर रहा है। अपनी सफलता का श्रेय अपने माता पिता व गुरुजनों को देते हुए हेमंत ने कहा कि उसने सामान्य रूप से ही परीक्षा की तैयारी की।

स्कूल में जो पढ़ाया जाता था उसका घर आकर वे रिवीजन करते थे। परीक्षा के समय उन्होंने 8 घंटे पढ़ाई की और यह सफलता के लिए कारगर सिद्ध हुआ।

3. किसान के बेटे कपिल की चाह आईएएस बनने की

एचएसएम ग्लोबल हायरसेकेंडरी स्कूल दयालबंद के छात्र कपिल साव को 96.40 प्रतिशत अंक के साथ 12 वीं बोर्ड की परीक्षा में पांचवा स्थान हासिल हुआ है। कपिल को गणित, हिंदी अैार अंग्रेजी में 96 अंक तो भौतिकी अैार रसायन में 97 अंक मिले हैं।

कपिल को 10 में भी मैरिट में स्थान मिला था। 10वीं बोर्ड में कपिल साव को 96.83 प्रतिशत के साथ 6 वां स्थान प्राप्त हुआ है। जिसमें गणित विषय में 100 में 100 अंक प्राप्त मिले थे। सफलता की खबर पर कपिल साव के पिता राजू साव माता कमला साव के साथ पूरे परिवार में हर्ष है।

पाकेट खर्च के पैसे से खरीदी पुस्तक-कापी

कपिल ने भविष्य में इंजीनियर बनने के साथ आईईएस बनने की इच्छा जाहिर की है। उसने बताया कि मां से पाकेट खर्च के लिए मिले पैसे को भी वह बगैर खर्च किए रखता था और उससे पुस्तक-कापी खरीदता था।

कपिल ने बताया कि मां कमला साव साक्षर भारत में प्रेरक है तो पिता राजू साव भूमिहीन कृषक हैं, जो ट्रैक्टर चलाकर परिवार का भरण पोषण करतें हैं।

कपिल, ने जेईईई मेंस क्लीयर कर चुके कपिल 20 मई को होने वाली जेईईई एडवांस की तैयारी में जुटे हैं। इंजीनियरिंग में स्नातक के बाद वह यूपीएससी की तैयारी करना चाहते हैं।

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4. मजदूर मां की बेटी ने कहा- सिविल सर्विसेस अगला टारगेट

रेजा-कुली का काम करने वाली श्रीमती शकुंतला साहू की आंखों में खुशी के आंसू छलक रहें है। अैार हो क्यों ना। उनकी लाड़ली बेटी ने 10 वीं के बाद अब 12 वीं बोर्ड की परीक्षा में भी मैरिट में स्थान बना लिया है।

बेटी सुरूचि साहू ने 12 वीं में प्रदेश में 95.20 अंक के साथ 10 वां स्थान पाया है। एचएसएम ग्लोबल हायरसेकेंडरी स्कूल दयालबंद के छात्रा सुरूचि के अनुसार इंजीनियरिंग में ग्रैजुएशन करने के बाद सिविल सर्विसेस अगला टारगेट है। मां के सपने को साकार करने के लिए कलेक्टर बनना ही है।

पिता की कमी महसूस नहीं होने दी मां ने

मूलत: जांजगीर जिले के बलौदा विकासखंड के ग्राम जर्वे निवासी श्रीमती शकुंतला साहू अपने पति की मौत के बाद अपने पिता के साथ रहती है वहीं मजदूरी कर वह अपने बच्चों को पढ़ा रही है।

राज्य में प्रावीण्य सूची में 10 वें नंबर पर आने वाली सुरूचि ने कहा कि मां ने मजदूरी करते हुए पढ़ाया है। सुरूचि ने बताया कि पिता के मौत के बाद पैसे के अभाव में कभी किसी से ट्यूशन नहीं लिया।

वहीं वह खुद ही अभावों के बीच में पढ़ाई की। 10 वी में टाप टेन में आने के बाद एचएसएम ग्लोबल हायर सेकेंडरी स्कूल दयालबंद ने स्कालरशिप दी अैार वह बिलासपुर आ गई।

ग्लोबल स्कूल में ही वह आईआईटी के साथ 12 वीं बोर्ड की तैयारी कर रहा थी। जेईईई मेंस क्लीयर होने के बाद वह आईआईटी की तैयारी में लगी है।

5. भ्रष्टाचार को मिटाने कलेक्टर बनूंगी- अदिति

छत्तीसगढ़ माध्यमिक शिक्षा मंडल द्वारा आयोजित 12 वीं बोर्ड परीक्षा में सांतवा स्थान पाने वाली अदिति पांडेय सिविल सर्विसेस की तैयारी करना चाहती हैं। अदिति समाज में फैले भ्रष्टाचार से काफी दुखी अदिती की पहली प्राथमिकता इस पर रोक की होगी।

अदिति के अनुसार भारतीय समाज में आज भी महिला सुरक्षा पर किसी का ध्यान नहीं है। युवतियां घर से अकेले नहीं निकल सकती। बेहतर काम केरन के बाद भी रोकटोक जारी है। इस पर काम किया जाएगा।

96 प्रतिशत अंक पाने वाली अदिति का कहना है कि वह इंजीनियरिंग नहीं करते हुए सीधे बीएससी करेंगी। इसके बाद कोचिंग ज्वाइन करते हुए यूपीएससी की तैयारी करेंगी।

अदिति के पिता केके पांडेय एलआईसी एजेंट हैं तो माता मांडवी पांडे गृहिणी हैं। पिता केके पांडेय के अनुसार बेटी को पढ़ाई के अलावा किसी अैार बात में रुचि नहीं है।

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6. आईआईटीएन कहलाना चाहता है प्रकाश

छत्तीसगढ़ माध्यमिक शिक्षा मंडल द्वारा आयोजित 12 वीं बोर्ड परीक्षा में सातवां स्थान पाने वाले एचएसएम ग्लोबल हायरसेकेंडरी स्कूल दयालबंद के छात्र प्रकाश गबेल को आईआईटी क्लीयर करना है।

प्रकाश ने 95.80 अंकों के साथ टाप टेन में जगह बनाई है। प्राचार्य यशवंत गबेल के पुत्र प्रकाश के अनुसार वह शुरू से ही इंजीनियर बनना चाहता था। इसलिए 10 वीं के बाद उसने गणित ज्वाइन किया। भौतिकी अैार रसायन में इंट्रेस्ट था ही इसलिए पढ़ाई में आसानी हुई।

रसायन में मिले पूरे 100 तो गणित में 98

छात्र प्रकाश गबेल ने बताया उसे इस साल रसायन में पूरे 100 अंक मिले हैं तो गणित में 98 अंक है। साथ ही भौतिकी में भी 95 अंको के साथ मैरिट में स्थान मिला है।

एचएसएम ग्लोबल हायर सेकेंडरी स्कूल दयालबंद से प्रकाश को स्कालरशिप मिल रही है। प्रकाश का जेईईई मेंस क्लीयर हो गया है अैार वह अभी जेईईई एडवांस की तैयारी में लगा है। प्रकाश की बचपन की इच्छा है कि उसे लोग आईआईटीएन पुकारें।

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7. इंजीनियरिंग के फील्ड में नाम कमाएगा शुभम

सरस्वती शिशु मंदिर अशोकनगर के छात्र शुभम विश्वकर्मा इंजीनियरिंग फील्ड में नाम कमाना चाहता है। शुरू से ही वह इसे टारगेट बनाकर पढ़ाई कर रहा है। वेल्डिंग का काम करके परिवार चलाने वाले विनोद सिंह के पुत्र शुभम की पढ़ाई के प्रति ललक देखकर ही पूरा परिवार उसके सहयोग में है। पढ़ाई के समय उसे कोई काम नहीं दिया जाता था।

12 वीं बोर्ड की परीक्षा में 95.60 अंक के साथ 9 वां स्थान पाने वाला शुभम को मलाल है कि गणित में उसके 2 नंबर कम हो गए। गणित में शुभम को 100 में से 98 अंक मिले हैं।

लक्ष्य निर्धारित करो फिर लगन से जुट जाअो

छात्र शुभम विश्वकर्मा ने सफलता का श्रेय अपने परिजन के साथ शिक्षकों को दिया है। शुभम के अनुसार किसी भी काम से पहले लक्ष्य तय होना जरूरी है। उसी हिसाब से तैयारी करनी होती है।

तैयारी के दौरान लगन अैर निष्ठा जरूरी है। अपने काम के प्रति इमानदारी होगी तो सफलता मिलेगी ही। सफलता के लिए शार्टकट नहीं होती। मेहनत तो करनी ही होगी। मेहनत का जब परिणाम सकारात्मक मिलता है तो उसका अपना अलग मजा है।

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