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छत्तीसगढ़ चुनाव के बीच फंसी बोर्ड परीक्षा, अभी तक सिलेबस है अधूरा, जानें वजह

टीम डिजिटल/हरिभूमि, दिल्ली | UPDATED Nov 9 2018 10:57AM IST
छत्तीसगढ़ चुनाव के बीच फंसी बोर्ड परीक्षा, अभी तक सिलेबस है अधूरा, जानें वजह

छत्तीसगढ़ माध्यमिक शिक्षा मंडल (माशिमं) की दसवीं-बारहवीं की बोर्ड परीक्षाएं विधानसभा और लोकसभा चुनावों के बीच फंस गई हैं। इससे बोर्ड के परीक्षार्थियों की पढ़ाई लगातार प्रभावित हो रही है।

आलम यह है अभी भी शिक्षकों की ड्यूटी विधानसभा चुनावी कार्य में लग जाने के कारण ज्यादातर स्कूलों में बोर्ड परीक्षार्थियों का सिलेबस पिछड़ा हुआ है।

वहीं माध्यमिक शिक्षा मंडल 2019 में तय समय से एक महीने पहले फरवरी में ही बोर्ड की परीक्षाएं कराने की तैयारी कर रहा है ऐसे में बोर्ड परीक्षार्थियों की मुसीबत बढ़ गई है, क्योंकि सिलेबस अभी अधूरा ही है।

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छत्तीसगढ़ माध्यमिक शिक्षा मंडल (सीजी बोर्ड) की 10वीं-12वीं की परीक्षा इस सत्र में भी फरवरी में लेने की घोषणा कर चुका है। इसके साथ ही मार्च के अंत या अप्रैल की शुरूआत में परिणाम भी घोषित किए जाने की तैयारी चल रही है।

अधिकारियों के अनुसार यह सारी कोशिश लोकसभा चुनाव के मद्देनजर हो रही है अैार इसीलिए जल्दी परीक्षा कराई जा रही है। दूसरी अोर इस साल प्रदेश में शिक्षा सत्र 16 जून 2018 से शुरू हुआ है इसलिए कोर्स भी अधूरा ही है।

इसके साथ ही शिक्षकों की ड्यूटी चुनावी कार्य में लगा दिए जाने के कारण पढ़ाई प्रभावित हो रही है। ऐसे में बोर्ड परीक्षा के परिणामों पर असर पड़ने की आशंका है। विद्यार्थी भी इससे परेशान हैं।

सीबीएसई बोर्ड परीक्षा भी फरवरी में

माशिमं के साथ ही सीबीएसई भी इस साल फरवरी के अंतिम सप्ताह में परीक्षा कराने की तैयारी कर रहा है। यहां खास बात है कि सीबीएसई का शिक्षा सत्र तो एक अप्रैल से शुरू हुआ है। इसलिए यहां के परीक्षार्थी एक महीने अधिक पढ़कर बोर्ड परीक्षा देंगे, तो राज्य के सरकारी स्कूलों में 16 जून से सत्र शुरू हुआ था, ऐसे में इन परीक्षार्थियों की पढ़ाई पूरी नहीं होने से उनका परिणाम प्रभावित होगा।

मामले में माशिमं के संभागीय अधिकारी बीके चौधरी का कहना है कि अभी प्रशासनिक स्वीकृति लेना बाकी है। बोर्ड की परीक्षाएं ऐसे ही ली जाएंगी, ताकि परीक्षार्थियों का नुकसान न हो।

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आधे-अधूरे सिलेबस से होगी परीक्षा

माशिमं यदि एक महीने पहले मार्च में पहले सप्ताह या फरवरी के अंत में भी परीक्षा लेता है, तो सिलेबस पूरा नहीं हो पाएगा। ऐसे में परीक्षार्थियों को या तो अतिरिक्त कक्षाएं देनी होगी या फिर अति आवश्यक सेवा लागू करके बोर्ड की परीक्षा के लिए अलग से प्रावधान करना पड़ेगा।

गौरतलब है कि राज्य में विधानसभा चुनाव की प्रक्रिया चल रही है। नई सरकार दिसम्बर में गठित होगी। जनवरी के बाद फरवरी के अंतिम सप्ताह से लोकसभा चुनाव के लिए भी प्रक्रिया शुरू हो जाएगी। ऐसे में एक बार फिर शिक्षक चुनावी ड्यूटी में प्रभावित हो जाएंगे और पढ़ाई पर असर पड़ना स्वाभाविक है।

साढ़े सात लाख पार हो सकती है विद्यार्थियों की संख्य

गौैरतलब है कि 2017-18 में बोर्ड की परीक्षा 5 मार्च से 2 अप्रैल तक हुई थी और नतीजे 9 मई को जारी किए गए थे। पिछली बार परीक्षा में करीब 7.22 लाख परीक्षार्थी थे तो इस बार विद्यार्थियों की संख्या 7.50 लाख पार हो सकती हैं।

दूसरी अोर सीबीएसई ने तो दसवीं-बारहवीं के परीक्षार्थियों का पंजीयन भी पूरा कर लिया है। इसके लिए 01 से 22 अक्टूबर तक का समय छात्रों को दिया गया था। सीबीएसई के शेडयूल के मुताबिक बोर्ड की स्किल और एजुकेशन यानी वोकेशनल परीक्षा से संबंधित सारी परीक्षाएं फरवरी 2019 में पूरी हो जाएंगी।

की जा रही है तैयारी

बोर्ड की 10वीं-12वीं की परीक्षाएं इस सत्र में फरवरी में हो सकती है। इसके साथ ही मार्च के अंत या अप्रैल की शुरूआत में परिणाम भी घोषित किए जाने की तैयारी चल रही है। अगले साल लोकसभा चुनाव के मद्देनजर यह तैयारी की जा रही है।


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