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पेपर लीक से सीबीएसई अलर्ट, खामियां ढूंढने के लिए अपनाएगा लीक प्रूफ सिस्टम

पेपर लीक होने के बाद से सीबीएसई द्वारा संचालित एग्जाम की खामियां ढूंढने बनने कमेटी का गठन किया गया था। मानव संसाधन विकास मंत्रालय द्वारा इसका गठन किया गया था।

पेपर लीक से सीबीएसई अलर्ट, खामियां ढूंढने के लिए अपनाएगा   लीक प्रूफ   सिस्टम

पेपर लीक होने के बाद से सीबीएसई द्वारा संचालित एग्जाम की खामियां ढूंढने बनने कमेटी का गठन किया गया था। मानव संसाधन विकास मंत्रालय द्वारा इसका गठन किया गया था।

कमेटी अपनी रिपार्ट मई अंत तक सौंप देगी। नए सिस्टम का टेस्ट सीबीएसई जुलाई में ही कर लेगी। ताकि अगले साल होने वाले बोर्ड एग्जाम के वक्त तक अगर उसमें कुछ सुधार की गुंजाइश रहे तो उसे भी किया जा सके।

कमेटी जो सिफारिश करेगी उसे सीबीएसई जुलाई में ही लागू कर लेगी। बोर्ड के मेन एग्जाम के रिजल्ट जारी होने के बाद सीबीएसई सप्लीमेंट्री एग्जाम कराती है।

यह मेन एग्जाम में फेल हुए स्टूडेंट् या कम नंबर पाने वाले स्टूडेंट्स को नंबर सुधारने का एक और मौका देने के लिए होता है। इसके लिए सीबीएसई कंपार्टमेंट और इंप्रूवमेंट एग्जाम कराती है। यह एग्जाम जुलाई में होता है।

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पायलेट प्रोजेक्ट

पूरक परीक्षाओं में ही नई व्यवस्था लागू करने के पीछे सीबीएसई का तक है, इससे नए सिस्टम का एक्सपेरिमेंट भी हो जाएगा कि वह कितना सफल है और कितना स्मूदली काम कर रहा है।

यह एक तरह से पायलट प्रॉजेक्ट होगा ताकि जब अगले साल 10 वीं और 12 वीं के बोर्ड एग्जाम में इसे पूरी तरह लागू किया जाए तो चूक की कोई गुंजाइश ना रहे। साथ ही स्कूलों को भी और बोर्ड को भी इसका अनुभव हो जाएगा।

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डिजिटल होगा सिस्टम

नया सिस्टम पूरी तरह से अगले साल से लागू होगा। सूत्रों के मुताबिक सिस्टम को लीकप्रूव बनाने के लिए डिजिटलाइजेशन करने की तैयारी है। कमिटी ने इस पर भी विचार किया है कि एग्जाम सेंटर को क्वेश्चन पेपर की फिजिकल कॉपी भेजने की बजाय क्वेश्चन पेपर का लिंक भेजा जाए जो कि इंक्रिप्टेड हो और पासवर्ड से ही उसे खोला जा सकता है।

ऐसा सिस्टम हो सकता है कि इसे एग्जाम शुरू होने से कुछ वक्त पहले ही खोला जाए और फिर इसकी कॉपी लेकर स्टूडेंट्स को दी जाए।

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