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पांचवे विषय के रूप में पेंटिंग लेने वाले CBSE छात्रों की संख्या 70 प्रतिशत बढ़ी, आगे होगी ये मुश्किल

केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) के 12वीं में पांचवें विषय के रूप में पेंटिंग को अब छात्र अधिक ले रहे हैं।

पांचवे विषय के रूप में पेंटिंग लेने वाले CBSE छात्रों की संख्या 70 प्रतिशत बढ़ी, आगे होगी ये मुश्किल

केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) के 12वीं में पांचवें विषय के रूप में पेंटिंग को अब छात्र अधिक ले रहे हैं। पिछले पांच सालों की बात करें, तो हर साल पेंटिंग में छात्रों की संख्या बढ़ रही है। सीबीएसई की मानें, तो इस बार 70 हजार से अधिक छात्रों ने 12वीं में पांचवें विषय के रूप में पेंटिंग लिया है।

इसके बाद फिजिकल एजूकेशन में छात्रों की संख्या रहती है। ऐसे विषय जिसमें रचनात्मकता होती है और प्रयोग की संभावना अधिक होती है, ऐसे विषयों में छात्रों को अधिक अंक मिलते हैं। यही कारण है कि छात्र पेंटिंग जैसे विषय का चुनाव कर रहे हैं।

पेंटिंग परीक्षा सौ अंकों की होती है। इसमें 70 अंकों की प्रायोगिक परीक्षा और 30 अंकों की सैद्धांतिक परीक्षा होती है। 70 अंकों की प्रायोगिक परीक्षा में अधिकतर छात्रों को 60 से ऊपर अंक मिलते हैं। थ्योरी में 30 में 20 अंक आते हैं।

इससे अधिकतर छात्रों को 80 से अधिक अंक मिलते हैं। इससे स्कूल के कुल रिजल्ट पर असर होता है। ज्यादातर स्कूलों के रिजल्ट बेहतर होते हैं। छात्रों के रुझान को देखते हुए स्कूल भी पांचवें विषय के रूप में पेंटिंग को प्रमुखता से जगह दे रहे हैं।

आगे नामांकन में परेशानी

स्कूल का रिजल्ट तो बेहतर हो जाता है, लेकिन छात्रों को आगे नामांकन लेने में परेशानी होती है। पेंटिंग में अच्छे अंक आने से बेस्ट तीन में पेंटिंग शामिल हो जाती है।

इससे कुछ अंक तो छात्रों को अधिक मिल जाते हैं, लेकिन स्नातक में नामांकन लेने में उनके अंक कम हो जाते हैं, क्योंकि कई विवि में नामांकन लेने में मुख्य तीन विषयों को लिया जाता है।

तीन से चार ही विषय

अधिकतर सीबीएसई स्कूलों में पांचवें विषय के रूप में तीन या चार विषय ही रखे जाते हैं। इसमें पेंटिंग, फिजिकल एजूकेशन, गणित और अर्थशास्त्र मुख्य रूप से हैं।

इसमें सबसे आसान और अंक बढ़ाने वाला विषय पेंटिंग है। इस कारण अधिकतर छात्र पेंटिंग ही लेते हैं। सीबीएसई द्वारा पांचवें विषय के रूप में सौ विषय रखे जाने का प्रावधान है, लेकिन अधिकतर स्कूल सारे विषयों का विकल्प नहीं देते।

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