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CBSE 10th में अव्वल स्‍टूडेंट्स का सक्सेस मंत्र, ''अच्छे अंक लाने के लिए पूरे दिन पढ़ना जरूरी नहीं''

केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा मंडल ने मंगलवार को सीबीएसई 10वीं बोर्ड के परिणाम जारी कर दिए। 12वीं कक्षा में सिटी के छात्रों के शानदार प्रदर्शन के बाद 10वीं कक्षा में भी छात्रों का बेहतरीन प्रदर्शन रहा है।

CBSE 10th में अव्वल स्‍टूडेंट्स का सक्सेस मंत्र,

केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा मंडल ने मंगलवार को सीबीएसई 10वीं बोर्ड के परिणाम जारी कर दिए। 12वीं कक्षा में सिटी के छात्रों के शानदार प्रदर्शन के बाद 10वीं कक्षा में भी छात्रों का बेहतरीन प्रदर्शन रहा है। लगभग 200 छात्रों ने 90 प्रतिशत से अधिक अंक प्राप्त किए हैं।

रायपुर जिले की टॉपर प्रांजली सिंह ने 99 प्रतिशत हासिल किए हैं। टॉपर्स का कहना है कि अच्छे अंक लाने के लिए आवश्यक नहीं है कि पूरा दिन पढ़ाई में ही बिताया जाए।

होमवर्क, डेली रिवीजन, टेस्ट पेपर सॉल्व करने जैसे छोटे स्टेप्स अगर साल की शुरुआत से फॉलो किए जाएं, तो भी सफलता हासिल की जा सकती है। जानिए सिटी के टॉपर्स से उनके सक्सेस के मूल मंत्र।

100 प्रतिशत अटेंडेंस ने खोली सफलता की राह

10वीं सीबीएसई परीक्षा में अंशी ने 98.4 प्रतिशत प्राप्त किए हैं। अंशी ने इसकी तैयारी शुरु से ही करनी शुरु कर दी थी। टीचर्स से सलाह लेना, पूरे दिन स्कूल जाना, होमवर्क पर हमेशा काम करना जैसी छोटे स्टेप्स को वे अपनी सफलता का मूल मानती हैं।

अंशी कहती हैं, टेस्ट पेपर सॉल्व करने से बहुत मदद मिली है। पुराने, नए सभी प्रकार के पेपर सॉल्व किए हैं। अंशी डीपीएस की स्टूडेंट हैं। अंशी आगे पीसीएम लेकर इंजीनियरिंग में अपना कॅरियर बनाना चाहती है।

इस सफलता के लिए अंशी अपने टीचर्स व पैरेंट्स सभी को श्रेय देना चाहती है। अंशी के पिता आलोक पांडे एक कम्यूनिकेशन कंपनी में कार्यरत हैं व मां अनुप्रिया गृहणी हैं।

साक्षी गुप्ता- 97.4 प्रतिशत

साक्षी गुप्ता ने इस परीक्षा में 97.4 प्रतिशत हासिल किए हैं। साक्षी बताती हैं, इसके लिए तैयारी तो शुरु में सामान्य ही थी। साल के बीच से ही इसकी तैयारी में अधिक वक्त देने लगी। जिसमें टेस्ट पेपर सॉल्व करना, रिविजन करना मुख्य रहा है।

इन चीजों ने पेपर को आसान बना दिया। इसके लिए टीचर्स व पैरेंट्स ने हमेशा से सपोर्ट किया है। पढ़ाई हमेशा फ्री माइंड से की है। आगे की पढ़ाई पीसीएम लेकर करना है और इंजीनियरिंग में कॅरियर बनाना है। साक्षी के पिता विनय कुमार गुप्ता एक बैंकर है व मां अनुपमा गुप्ता हाउस वाइफ हैं।

खेल की मदद से पढ़ाई पर फोकस

धवल जैन ने 97 प्रतिशत प्राप्त किए हैं। धवल बताते हैं, हमेशा से प्रेक्टिस करता रहा हूं। टेस्ट को सीरियसली सॉल्व करता रहा हूं। टीचर्स की गाइडेंस के अनुसार पढ़ाई की। स्कूल से आकर कुछ घंटे पढ़ाई की फिर दो घंटे खेलने के बाद फिर पढ़ाई व रिवीजन करता रहा हूं।

खेल से मेरा फोकस पढ़ाई में और अच्छा होता था। मैं हमेशा खेलता रहा हूं पेपर के समय भी। पढ़ाई में पैरेंट्स व टीचर्स का हमेशा से बहुत सपोर्ट रहा। धवल के पिता राजेश जैन का कंस्ट्रक्शन का बिजनेस है।

आगे धवल सिविल इंजीनियरिंग करके अपने पिता के बिजनेस को एक्सपांड करना चाहते हैं। इसकी तैयारी के लिए अभी से कोटा में कोचिंग कर रहे हैं।

पिता पार्षद, लेकिन राजनीति नहीं मेडिकल फिल्ड है प्राथमिकता

पानिया पनाग ने 97 प्रतिशत के साथ दसवीं कक्षा उत्तीर्ण की है। इसके लिए पानिया ने शुरू से ही तैयारी शुरु कर दी थी। पानिया बताती हैं, हर पेपर की तैयारी के लिए टाइम को ध्यान में रख कर पढ़ाई करती थी।

फिर उसके टेस्ट भी सॉल्व करती रही हूं। जिसने पेपर को आसान कर दिया। पढ़ाई के लिए सभी स्कूल टीचर्स व पैरेंट्स ने हमेशा सपोर्ट किया है। पानिया के पिता सतनाम सिंह पनाग रायपुर शहर के वार्ड क्रमांक-55 के पार्षद हैं। माता अमनदीप कौर गृहणी हैं। आगे मडिकल के फिल्ड में अपना कॅरियर बनाने के लिए पानिया अभी से कोटा में पढ़ाई कर रही हैं।

पेपर के वक्त भी देखा टीवी, नहीं लिया तनाव

शांभवी उपाध्याय ने इस परीक्षा में अच्छा प्रदर्शन करते हुए 96.8 प्रतिशत हासिल किए हैं। इस परीक्षा की तैयारी डेली रूटीन बनाकर उसे फॉलो करते हुए किया। शांभवी कहती हैं, मेरा डेली रूटीन कभी नहीं छूटा।

मैंने पेपर के समय भी टीवी देखा, गाना सुना मतलब जो भी पहले डेली रूटीन में होता वह परीक्षा के समय भी किया। इस परीक्षा के लिए टीचर्स की हर सलाह को ध्यान देते हुए तैयारी की है।

टेस्ट को फोकस करते हुए तैयारी रही है। इसके लिए सभी टीचर्स व पैरेंट्स ने सपोर्ट किया है। शांभवी के पिता मदन मोहन उपाध्याय व मां जागृति उपाध्याय दोनों सीए हैं।

टीचर्स की गाइडेंस रही फायदेमंद

अनुष्का चौधरी ने इस परीक्षा में अपनी मेहनत से 96.8 प्रतिशत हासिल किए हैं। अनुष्का बताती हैं, इस परीक्षा के लिए शुरुआत से ही तैयारी रही है। जिसमें टीचर्स की गाइडेंस में पढ़ाई करना, उनके होमवर्क को प्रॉपर करना शामिल है।

बहुत सारे टेस्ट पेपर साल की शुरूआत से ही हल किए हैं, जिसे टीचर्स चेक करके गलतियां बताते थे। जिसे मैं फिर से सेल्फ स्टडी के समय पढ़कर-समझकर दूर करने का प्रयास करती थी।

अनुष्का डीपीएस की स्टूडेंट हैं। अनुष्का आगे पीसीएम लेकर इंजीनियरिंग करना चाहती हैं। अनुष्का के पिता हर्षद चौधरी बिजनेसमेन हैं व माता शिल्पा चौधरी हाउस वाइफ हैं।

गलतियां पहचान कर उसे दूर किया

समृद्धि दुबे ने इस परीक्षा में शानदार प्रदर्शन करते हुए 96.8 प्रतिशत स्कोर किए हैं। समृद्धि बताती हैं, शुरु से ही इसकी तैयारी के लिए हर टेस्ट को अच्छे से दिलाया है। जिसमें कमजोर रहीं उस सब्जेक्ट में हमेशा इंप्रुव करते हुए तैयारी की है।

जिसके कारण इतने अंक स्कोर कर सकी। समृद्धि डीपीएस की स्टूडेंट हैं। आगे पीसीएम सब्जेक्ट लेकर इंजीनियर बनना चाहती हैं। सभी टीचर्स व पैरेंट्स को इसका श्रेय देती हैं, जिन्होंने हमेशा सपोर्ट किया है। समृद्धि के पिता सतीश कुमार दुबे पावर प्लांट में मैनेजर हैं व मां प्रीति दुबे हाउस वाइफ हैं।

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