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Career Tips: इस क्षेत्र में बढ़ रही है डिमांड, तय करें आपना करियर

पर्यावरणीय संकट के वर्तमान दौर में एन्वॉयर्नमेंटल इंजीनियर्स की मांग बहुत तेजी से बढ़ रही है। आज इस क्षेत्र के युवा प्रोफेशनल्स की मांग देश ही नहीं अपितु विदेशों में भी है।

Career Tips: इस क्षेत्र में बढ़ रही है डिमांड, तय करें आपना करियर

एन्वॉयर्नमेंट किसी एक व्यक्ति से नहीं बल्कि सभी इंसानों से जुड़ा सब्जेक्ट है। ऐसे में इससे रिलेटेड किसी भी फील्ड में करियर के जरिए आप इसकी सुरक्षा में योगदान देकर पूरी मानवता के लिए कार्य कर सकते हैं। इस फील्ड में भरपूर अवसर तो हैं ही आने वाले समय में इसमें और भी बढ़ोत्तरी होने की पूरी संभावना है। इस बारे में विस्तार से जानिए।

आज के दौर में पूरी दुनिया में पर्यावरण संकट से निपटने के लिए वृहद स्तर पर प्रयास किए जा रहे हैं। यह भी एक सच है कि पृथ्वी पर मौजूद मानव समाज द्वारा फैलाए जा रहे विविध प्रकार के प्रदूषण को देखते हुए ये उपाय अपर्याप्त हैं।

अभी इस दिशा में बहुत कुछ किया जाना बाकी है। प्रदूषण से संबंधित चिंताओं तथा चुनौतियों का मुकाबला करने के लिए एन्वॉयर्नमेंटल इंजीनियरिंग अर्थात पर्यावरण इंजीनियरिंग का विकास हुआ।

बढ़ रही है डिमांड

पर्यावरणीय संकट के वर्तमान दौर में एन्वॉयर्नमेंटल इंजीनियर्स की मांग बहुत तेजी से बढ़ रही है। आज इस क्षेत्र के युवा प्रोफेशनल्स की मांग देश ही नहीं अपितु विदेशों में भी है।

इंजीनियरिंग के अलावा पर्यावरण में रुचि रखने वाले युवाओं के लिए यह एक चमकीला करियर है। निस्संदेह पर्यावरण क्षेत्र के विशेषज्ञों ने हाल के वर्षों में प्रदूषण नियंत्रण के लिए प्रभावी तकनीकें तथा उपायों का विकास करने में जबरदस्त सफलता हासिल की है।

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एरिया ऑफ वर्क

एन्वॉयर्नमेंटल इंजीनियरिंग बुनियादी तौर पर विज्ञान के सिद्धांतों तथा इंजीनियरिंग की तकनीकों का मिश्रण है तथा इस मेल से उत्पन्न विभिन्न विधाओं का व्यावहारिक प्रयोग पर्यावरण को प्रदूषण से मुक्त करने में किया जाता है।

इसके अंतर्गत जहां एक ओर फिजिक्स, केमिस्ट्री और बायोलॉजी के अतिरिक्त इकोलॉजी, रेडियोलॉजिकल विज्ञान जैसी शाखाओं से मदद मिलती है, वहीं दूसरी ओर इंजीनियरिंग की मैकेनिकल, सिविल तथा अन्य ब्रांचों की उपयोगिता भी है।

आपको यह जानकर आश्चर्य होगा कि इंजीनियरिंग की 70 से अधिक शाखाएं होने के बावजूद केवल 10 प्रमुख इंजीनियरिंग शाखाओं में एडमिशन लेने के लिए होड़ रहती है।

ऐसे में भविष्य की संभावनाओं को देखते हुए परंपरागत इंजीनियरिंग शाखाओं का मोह त्यागते हुए एन्वॉयर्नमेंटल इंजीनियरिंग को अपनाना बहुत समझदारी का फैसला हो सकता है।

इंजीनियरिंग की इस शाखा में प्रवेश के लिए होड़ की स्थिति न होने के कारण प्रतिष्ठित और नामी संस्थानों में प्रवेश पाना अन्य इंजीनियरिंग शाखाओं की तुलना में कहीं अधिक आसान होगा।

देश में यह विधा नई है, इसलिए जॉब्स पाने की संभावनाएं भी कहीं ज्यादा होंगी। विभिन्न संस्थाओं द्वारा इस तरह के कोर्स शुरू किए जाने पर शिक्षक के तौर पर भी जॉब करने के प्रचुर अवसर मिल सकते हैं।

पर्सनल ट्रेट्स

एन्वॉयर्नमेंटल इंजीनियरिंग के क्षेत्र में ऐसे लोगों को जाना चाहिए, जिनमें पर्यावरण के प्रति लगाव हो। प्रदूषण मिटाने को जो लोग जरूरी कार्य समझते हों। ऑफिस वर्क से ज्यादा फील्ड में काम करने का जिनमें जज्बा हो।

दिन-प्रतिदिन सामने आने वाली चुनौतियों का डटकर मुकाबला करने तथा सफल होने का पूरा आत्मविश्वास हो तथा समूह में काम करने तथा करवाने की विशेषता भी हो। विज्ञान तथा इंजीनियरिंग में रुचि होना भी इस पेशे की एक अनिवार्य शर्त है।

कोर्सेस-एलिजिबिलिटीज

देश की कई यूनिवर्सिटीज में एन्वॉयर्नमेंटल इंजीनियरिंग पर आधारित कई तरह के कोर्सेस संचालित किए जा रहे हैं। ये बैचलर और मास्टर्स डिग्री के स्तर से लेकर पीएचडी तक हो सकते हैं।

सरकारी ही नहीं अपितु निजी क्षेत्र के संस्थान भी ऐसे कोर्सेस संचालित करते हैं। एन्वॉयर्नमेंटल इंजीनियरिंग के कोर्स में प्रवेश परीक्षा के आधार पर एडमिशन दिया जाता है।

बारहवीं में मैथ्स के साथ विज्ञान विषयों की पढ़ाई करने वाले विद्यार्थी ही इस प्रवेश परीक्षा में शामिल हो सकते हैं। चार साल की इंजीनियरिंग डिग्री के बाद इस क्षेत्र में एमटेक कर सकते हैं। मेरिट प्राप्त छात्रों के लिए विदेशी यूनिवर्सिटीज से स्कॉलरशिप पर पीएचडी करना भी बहुत ही आसान है।

नेचर ऑफ वर्क

एन्वॉयर्नमेंटल इंजीनियर्स के कार्यों में शामिल है-प्रदूषण नियंत्रण एवं पर्यावरण संरक्षण से संबंधित नियमों को तैयार करना तथा समय-समय पर उनमें आवश्यक बदलाव करना।

इस तरह के प्रोजेक्ट्स की गुणवत्ता को नियंत्रित करने के लिए सरकारी तथा गैर सरकारी पर्यावरण सुधार कार्यक्रमों की प्रगति पर नजर रखना। औद्योगिक संस्थानों एवं नगर निगम-नगर पालिकाओं के पर्यावरण नियमों के क्रियान्वयन पर आधारित कार्य-कलापों का ऑडिट करना।

प्रदूषित स्थलों में सुधार हेतु विभिन्न एजेंसियों के कंसल्टेंसी सर्विस देने जैसे कार्य करना। पर्यावरण सुरक्षा एवं प्रदूषण संबंधी कानूनी मामलों में सलाह देना।

पर्यावरण सुरक्षा/संरक्षण से जुड़े प्रोजेक्ट्स का डिजाइन तैयार करना और उन्हें एक समय-सीमा में कम से कम लागत पर पूरा करना, जिसमें जल संरक्षण, वायु प्रदूषण नियंत्रण प्रणाली तथा कचरे से ऊर्जा उत्पादन जैसी योजनाएं शामिल होती हैं।

जॉब्स के अवसर

भारत में पर्यावरण के संरक्षण के प्रति केंद्र सरकार की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि देश में काफी समय पहले बाकायदा एक स्वतंत्र मंत्रालय ही पर्यावरण के मामलों एवं चुनौतियों से निपटने के लिए बनाया जा चुका था।

इस मंत्रालय और इससे जुड़े विभाग देश भर में फैले हुए हैं। कमोबेश यही स्थिति राज्य स्तर पर भी देखी जा सकती है। इस विशाल नेटवर्क में कई तरह की जॉब्स के अवसर एन्वॉयर्नमेंटल इंजीनियरिंग में दक्ष लोगों के लिए हो सकते हैं।

पर्यावरण के प्रति बढ़ती जागरूकता तथा सरकारी स्तर पर बढ़ते खर्चों को देखते हुए प्राइवेट सेक्टर में भी इस क्षेत्र में काम करने वाली छोटी-बड़ी कंपनियां अब अस्तित्व में आ चुकी हैं। यही नहीं, रिसर्च इंस्टीट्यूट, एनजीओ आदि में भी इस तरह के एक्सपर्ट्स की मांग भविष्य में और तेजी से बढ़ने की संभावना है।

विदेशों में इस तरह के एक्सपर्ट्स के लिए रोजगार की चमकीली संभावनाएं हैं। इसके अलावा एन्वॉयर्नमेंट टीचिंग एक अन्य क्षेत्र है, जहां पर आने वाले दिनों में प्रशिक्षित लोगों की जरूरत बहुत तेजी से बढ़ेगी। इन सबके अलावा कंसल्टेंट के तौर पर भी काम के मौके मिल सकते हैं। सेंट्रल पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड, नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल आदि भी देश की ऐसी ही एजेंसीज हैं, जिनमें ऐसे एक्सपर्ट्स की सेवाएं ली जाती हैं।

प्रमुख संस्थान

कुरुक्षेत्र यूनिवर्सिटी, कुरुक्षेत्र

वेबसाइट:www.kuk.ac.in

-आरआईटी, रायपुर

वेबसाइट:www.rit.edu.in

आईआईटी, कानपुर

वेबसाइट:www.iitk.ac.in

राजीव गांधी प्रौद्योगिकी विवि, भोपाल

वेबसाइट: www.rgpv.ac.in

एमएएनआईटी, भोपाल

वेबसाइट:www.manit.ac.in

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