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ग्लोबल स्टडीज कोर्स में बनाएं अपना कॅरियर, बेहतर होगा भविष्य और इतनी मिलेगी सैलरी

ट्रेडिशनल के बजाय कोई ऐसा कोर्स करना चाह रहे हैं जो रोचक होने के साथ ही आपको देश-विदेश में करियर बनाने का अवसर दे तो ग्लोबल स्टडीज आपके लिए उपयोगी हो सकता है।

ग्लोबल स्टडीज कोर्स में बनाएं अपना कॅरियर, बेहतर होगा भविष्य और इतनी मिलेगी सैलरी

अगर आप ट्रेडिशनल के बजाय कोई ऐसा कोर्स करना चाह रहे हैं जो रोचक होने के साथ ही आपको देश-विदेश में करियर बनाने का अवसर दे तो ग्लोबल स्टडीज आपके लिए उपयोगी हो सकता है। यह कोर्स कहां उपलब्ध है और इसमें करियर के क्या ऑप्शंस हैं, इस बारे में जानिए।

बदलते हुए परिवेश में परंपरागत विषयों का महत्व अब कुछ कम हो रहा है। उनकी जगह नए-नए विषय सामने आ रहे हैं। इन विषयों के जरिए छात्र आधुनिक समय और समाज को समझने के साथ करियर भी बना रहे हैं। ऐसा ही एक विषय है, ग्लोबल स्टडीज।

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यहां उपलब्ध है कोर्स

वैश्वीकरण के दौर में देश-दुनिया की भूगोल, अर्थव्यवस्था, संस्कृति, राजनीति और अन्य आयामों को समझने और उसमें काम करने के लिए यह कोर्स दिल्ली के अंबेडकर विश्वविद्यालय में हाल ही में शुरू किया गया है। फिलहाल अन्य विश्वविद्यालयों में यह कोर्स नहीं है। अंबेडकर विश्वविद्यालय का कोर्स स्नातक स्तर के छात्रों के लिए है।

कोर्स स्ट्रक्चर

यह कोर्स तीन साल का है। इसमें छात्रों को समाज, इतिहास, भूगोल, भाषा-संस्कृति और अर्थव्यवस्था के रूपों से परिचित कराया जाता है। वैश्विक क्या है ? वैश्विकता क्या है ? विभिन्न क्षेत्रों की पहचान मसलन भारत, दक्षिण पूर्वी एशिया, मध्य एशिया, अफ्रीका और लैटिन अमेरिका और उससे जुड़ी अवधारणा और इनके इतिहास में आए बदलाव से भी परिचित कराया जाता है।

कोर्स में मुख्य तौर पर तीन स्ट्रीम को छात्रों को चुनना होगा। पहला किसी विदेशी भाषा जैसे चीनी और फ्रेंच, दूसरा वैश्विक मानविकी और तीसरा वैश्विक राजनीति और अर्थव्यवस्था है। इन तीन स्ट्रीम के अतिरिक्त छात्रों को इलेक्टिव विषय के रूप में मानचित्र कला, स्थलाकृति विज्ञान, बुनियादी ढांचा और परिवहन, प्रणाली विज्ञान, विज्ञान और तकनीक, जलवायु और पर्यावरण और शारीरिक शिक्षा जैसे विषयों को पढ़ने का अवसर मिलेगा।

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एलिजिबिलिटीज

ग्रेजुएशन कोर्स में छात्रों के लिए कुल 50 सीटें हैं। इसमें बारहवीं के अंकों के आधार पर दाखिला मिलेगा। आवेदन करने के बाद दाखिले की कट ऑफ निकाली जाएगी। कट ऑफ में जो छात्र आएंगे, उन्हें दाखिला दिया जाएगा। पढ़ाई का माध्यम अंग्रेजी है। सीटों पर आरक्षित वर्ग के छात्रों को सरकार के दिशा-निर्देश के हिसाब से दाखिला मिलेगा।

ऑपर्च्युनिटी

इस कोर्स को करने के बाद छात्र उच्च शिक्षा के विभिन्न क्षेत्रों में जा सकते हैं। जैसे चाहें तो वे समाज विज्ञान के विभिन्न विषयों अर्थशास्त्र, भूगोल, समाजशास्त्र, राजनीतिशास्त्र और इतिहास जैसे विषय का अध्ययन कर सकते हैं। इसके अलावा रिसर्च के क्षेत्र में जा सकते हैं।

कोर्स से जुड़े विशेषज्ञों की मानें तो अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जैसे विशेषज्ञों की मांग हो रही है, उस हिसाब से यह कोर्स काफी उपयोगी है। छात्रों को इस कोर्स के बाद देश-विदेश के विभिन्न संस्थानों में अध्ययन करने का अवसर मिल सकता है। आगे चलकर वे चाहें तो अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं में नौकरी भी कर सकते हैं।

ऐसा कोर्स करने वाले छात्रों को प्लेसमेंट में आसानी होगी। भारत और विदेश में एक से बढ़कर एक अंतरराष्ट्रीय संस्थाएं हैं, जिनमें छात्र जॉब कर सकते हैं। विभिन्न विश्वविद्यालयों में छात्र अध्यापन के कार्य से भी जुड़ सकते हैं। स्वयंसेवी संगठन भी ऐसे छात्रों को अपने यहां काम करने का अवसर प्रदान करते हैं।

अध्ययन संस्थान

ग्लोबल स्टडीज की विशेषज्ञ डॉ. सुनालिनी कुमार के मुताबिक भारत में सरकारी संस्थान की बात करें तो, भीमराव अंबेडकर विश्वविद्यालय, दिल्ली पहला ऐसा संस्थान है, जहां यह कोर्स उपलब्ध है।

ग्लोबल बिजनेस ऑपरेशन नाम से दिल्ली के श्रीराम कॉलेज ऑफ कॉमर्स में भी पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा कोर्स उपलब्ध है। इसके अलावा विदेशों में विभिन्न विश्वविद्यालयों में स्नातकोत्तर स्तर पर ग्लोबल स्टडीज की पढ़ाई होती है। निजी विश्वविद्यालयों में भी इस तरह के कोर्स शुरू किए जा रहे हैं।

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