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Career Advice: डिजास्टर मैनेजमेंट कोर्स में बनाएं अपना करियर, बेहतर होगा भविष्य

नेशनल डिजास्टर रिस्पॉन्स फोर्स (एनडीआरएफ) और स्टेट डिजास्टर रिस्पॉन्स फोर्स (एसडीआरएफ) के राहत कार्यकर्ता होते हैं, जो किसी भी तरह के प्राकृतिक आपदाओं से निपटने में सक्षम होते हैं।

Career Advice: डिजास्टर मैनेजमेंट कोर्स में बनाएं अपना करियर, बेहतर होगा भविष्य

इन दिनों गुजरात, बिहार, असम, महाराष्ट्र, उत्तराखंड के साथ देश के कई राज्यों से बाढ़ की खबरें आ रही हैं। हर वर्ष देश के अलग-अलग हिस्सों में इस तरह की नेचुरल डिजास्टर्स आती रहती हैं।

कभी बाढ़, भूकंप, भूस्खलन आदि। इन आपदाओं से निबटने में डिजास्टर मैनेजमेंट से जुड़े प्रोफेशनल्स की अहम भूमिका होती है। अगर आपमें भी लोगों के प्रति सेवा भाव है, तो फिर इस क्षेत्र में करियर बनाया जा सकता है। इस बारे में विस्तार से जानिए।

दुनिया भर में नेचुरल डिजास्टर्स से जुड़ी घटनाएं लगातार बढ़ती जा रही है। अपने देश में ही हर साल बाढ़, भूकंप, आगजनी के साथ दूसरी प्राकृतिक आपदाओं से करोड़ों-अरबों रुपए का नुकसान हो जाता है।

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भूकंप, समुद्री तूफान, बाढ़ जैसी नेचुरल डिजास्टर्स के चलते पिछले कुछ सालों में डिजास्टर मैनेजमेंट से जुड़े प्रोफेशनल की मांग बढ़ी है। एक रिपोर्ट के मुताबिक, इस क्षेत्र में 2020 तक औसतन 33 प्रतिशत सालाना की दर से जॉब्स के मौके बढ़ने की उम्मीद है।

यूनाइटेड नेशन के अनुसार, पिछले 20 वर्षों में करीब 30 लाख लोग नेचुरल डिजास्टर्स के चलते मौत का शिकार हुए हैं, जबकि 80 करोड़ लोग इनसे प्रभावित हुए। इसे देखते हुए कहा जा सकता है कि डिजास्टर मैनेजमेंट में आने वाले दिनों में भी करियर की भरपूर संभावनाएं बनी रहेंगी।

क्या है एनडीआरएफ

आजकल अगर कहीं भी देश में कोई आपदा की स्थिति पैदा होती है, तो सेना के जवानों और सामाजिक संस्थाओं के साथ लाल जैकेट पहने जवानों को भी राहत कार्य में योगदान देते देखा जा सकता है। ये जवान आपको बाढ़, भूकंप या अग्निकांड जैसी आपदाओं के दौरान अकसर दिखते हैं।

दरअसल, ये नेशनल डिजास्टर रिस्पॉन्स फोर्स (एनडीआरएफ) और स्टेट डिजास्टर रिस्पॉन्स फोर्स (एसडीआरएफ) के राहत कार्यकर्ता होते हैं, जो किसी भी तरह के प्राकृतिक आपदाओं से निपटने में सक्षम होते हैं। आमतौर पर इन्हीं राहत कार्यकर्ताओं के साथ मिलकर आर्मी और पुलिस राहत अभियान चलाते हैं।

यही वजह है कि देशसेवा का जज्बा रखने वाले युवा सेना के बाद आजकल एनडीआरएफ और एसडीआरएफ में भी काफी दिलचस्पी ले रहे हैं। इसमें रोजगार के काफी अवसर हैं।

एनडीआरएफ की स्थापना देश में वर्ष 2006 में हुई। तब से इस बल ने आपदाओं और लोगों को प्रशिक्षण मुहैया कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। इसमें आप कैडेट के तौर पर अपना करियर संवार सकते हैं या फिर राज्यों की एसडीआरएफ में भी अपने लिए नौकरी तलाश सकते हैं। रोजगार समाचार पत्रों में इसके लिए हर साल वैकेंसी की अधिसूचनाएं निकलती रहती हैं।

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क्या करते हैं प्रोफेशनल्स

इस क्षेत्र से जुड़े पेशेवर का कार्य मुख्यतौर पर नेचुरल डिजास्टर से होने वाले नुकसान को कम करने के साथ, लोगों के जान-माल की हिफाजत करना होता है। साथ ही, वे आपदा के शिकार लोगों की न सिर्फ जान बचाते हैं, बल्कि राहत कार्यों में भी सक्रिय भूमिका निभाते हैं। उनका कार्य यह भी सुनिश्चित करना होता है कि सभी आवश्यक चीजें और सुविधाएं सही समय पर आपदाग्रस्त क्षेत्र में उपलब्ध हों।

वैसे, देखा जाए तो डिजास्टर मैनेजमेंट का कार्य देखने में जितना आसान लगता है, वह उतना होता नहीं है। यह कार्य बेहद जोखिम भरा होता है। कभी-कभी तो उन्हें अनजान खतरों का सामना भी करना पड़ता है, जिसमें उन्हें अपनी जान का जोखिम भी लेना पड़ता है। इतना ही नहीं, अकसर दूसरों की जान बचाने के चक्कर उनकी खुद की जान भी चली जाती है।

देश में गृह मंत्रालय एक ऐसी नोडल एजेंसी है, जो आपदाओं पर नजर रखती है और प्रभावित क्षेत्रों में सामान्य जीवन बहाल करने का प्रबंधन करती है। इसके साथ कृषि एवं रेल मंत्रालय समेत कई अन्य मंत्रालय अपने-अपने स्तर पर आपदा प्रबंधन में अहम भूमिका निभाते हैं, लेकिन इन सबके साथ डिजास्टर मैनेजमेंट में प्रशिक्षित लोग आपदा के वक्त सबसे बड़ी भूमिका निभाते हैं।

ऐसे मिलेगी एंट्री

देश के कुछ खास इंस्टीट्यूट्स में डिजास्टर मैनेजमेंट में सर्टिफिकेट कोर्स, पीजी डिप्लोमा,बीए, एमए, एमबीए, एमएससी, एमफिल, पीएचडी, रिसर्च एवं ट्रेनिंग आदि प्रोग्राम चलाए जाते हैं। इस सब्जेक्ट में सर्टिफिकेट और बैचलर कोर्स के लिए 12वीं पास होना जरूरी है। अगर पीजी डिप्लोमा या मास्टर डिग्री प्रोग्राम में एंट्री लेना चाहते हैं, तो फिर ग्रेजुएशन (बीए/बीएससी/बीकॉम) होना जरूरी है।

इस क्षेत्र से जुड़े कुछ अन्य कोर्स भी हैं, डिजास्टर मिटिगेशन में एमएससी, जिओ-हैजर्ड में एमएससी एवं पीजी डिप्लोमा, सर्टिफिकेट/ अवेयरनेस कोर्स, फायर इंजीनियरिंग एवं सेफ्टी में डिग्री/ डिप्लोमा कोर्स, अर्थक्वेक इंजीनियरिंग में एमटेक एवं पीएचडी आदि।

वैसे, डिजास्टर मैनेजमेंट में पीएचडी करने के लिए इससे संबंधित सब्जेक्ट में 55 प्रतिशत अंकों के साथ मास्टर डिग्री होना आवश्यक है। हालांकि यह अलग-अलग यूनिवर्सिटीज के हिसाब से भिन्न भी हो सकता है।

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पर्सनल स्किल्स

यह एक चुनौती भरी फील्ड है। इसलिए इस फील्ड का चुनाव करते समय यह भी ध्यान में रखना चाहिए कि आपको अलग-अलग तरह के चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है। इस फील्ड में एक बेहतर प्रोफेशनल बनने के लिए आपके मन में लोगों के प्रति सेवा का होना बहुत आवश्यक है।

साथ ही, आपको शारीरिक और मानसिक रूप से बेहद मजूबत भी होना चाहिए ताकि आप अत्यधिक दबाव और तनावपूर्ण स्थितियों में बिना आपा खोए अपना कार्य सही ढंग से कर सकें। आपका कार्य करने का उत्साह व दूसरों की मदद करने का जज्बा कभी भी फीका नहीं पड़ना चाहिए।

जॉब ऑप्शंस

डिजास्टर मैनेजमेंट का कोर्स करने वाले स्टूडेंट्स के लिए सरकारी एवं प्राइवेट दोनों क्षेत्रों में जॉब के भरपूर अवसर मौजूद हैं। डिजास्टर मैनेजमेंट के क्षेत्र में सरकारी विभागों, आपातकालीन सेवाओं, लॉ इन्फोर्समेंट, लोकल अथॉरिटीज, रिलीफ एजेंसीज, गैर सरकारी प्रतिष्ठानों और यूनाइटेड नेशन जैसी इंटरनेशनल एजेंसियों में नौकरी की अच्छी संभावनाएं हैं।

प्राइवेट सेक्टर में भी जॉब के कई विकल्प हैं, जैसे केमिकल, माइनिंग, पेट्रोलियम जैसी रिस्की इंडस्ट्रीज में भी करियर बनाया जा सकता है। इन सभी इंडस्ट्रीज में डिजास्टर मैनेजमेंट सेल होता है।

यहां ऑपरेशनल एनालिस्ट, डाटा बेस एनालिस्ट, नेटवर्क एडमिनिस्ट्रेटर, एडमिनिस्ट्रेटर, सिक्योरिटी एडमिनिस्ट्रेटर के रूप में करियर बना सकते हैं। इसी तरह तमाम एनजीओ में भी आपदा प्रबंधन के जानकारों को इन दिनों नौकरी में काफी प्राथमिकता मिल रही है।

इंटरनेशनल ऑर्गेनाइजेशन, जैसे-रेडक्रॉस, वर्ल्ड बैंक, एशियाई विकास बैंक (एडीबी), यूएनओ आदि में भी काफी संभावनाएं मौजूद हैं। आप चाहें, तो सामाजिक कार्यकर्ता बनकर या फिर टीचिंग, ट्रेनिंग और कंसल्टेंसी के जरिए भी इस फील्ड में अच्छी कमाई कर सकते हैं।

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सैलरी पैकेज

डिजास्टर मैनेजमेंट का कोर्स कंप्लीट करने के बाद आप शुरुआत में किसी भी संस्थान में 20 से 25 हजार रुपए की सैलरी आसानी से पा सकते हैं। आगे अनुभव और कार्य के आधार पर सैलरी बढ़ती चली जाती है। सीनियर लेवल पर 50 हजार से एक लाख रुपए तक भी मासिक वेतन मिल सकता है।

प्रमुख संस्थान

इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मुक्त विश्वविद्यालय, दिल्ली

वेबसाइट: www.ignou.ac.in

इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ रिमोट सेंसिंग, देहरादून

वेबसाइट: www.iirs.gov.in

गुरु गोविंद सिंह इंद्रप्रस्थ यूनिवर्सिटी, दिल्ली

वेबसाइट: www.ipu.ac.in

नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ डिजास्टर मैनेजमेंट, दिल्ली

वेबसाइट: www.nidm.gov.in

इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ इकोलॉजी एंड एनवॉयर्नमेंट, नई दिल्ली

वेबसाइट: www.ecology.edu

एमिटी इंस्टीट्यूट ऑफ डिजास्टर मैनेजमेंट, नोएडा

वेबसाइट: www.amity.edu

एक्सपर्ट व्यू

अनिल सेठी

करियर एक्सपर्ट

संभावनाओं के साथ चुनौती भी

डिजास्टर मैनेजमेंट प्रोफेशनल्स का काम आपदा के शिकार लोगों की जान बचाना और उन्हें नई जिंदगी देना है। आपात स्थिति के समय बिगड़ी हुई जिंदगी को पटरी पर लाने का काम इन्हीं के जिम्मे होता है। इन प्रोफेशनल्स को आपदा पीड़ितों को तुरंत बचाने, राहत पहुंचाने और उनकी जरूरतें पूरी करने की ट्रेनिंग भी दी जाती है।

साथ ही, इन्हें घायलों का प्राथमिक उपचार भी करना होता है। चूंकि यह चुनौती और खतरों से भरा हुआ काम है, इसलिए इसमें प्रेजेंस ऑफ माइंड और बुद्धिमत्ता की आवश्यकता होती है। इसके अलावा, आपका शारीरिक व मानसिक तौर पर स्ट्रॉन्ग होना भी जरूरी है।

ऐसे प्रोफेशनल्स को किसी भी समय अचानक किसी आपदा के दौरान काम करना पड़ता है, इसलिए आपके अंदर धैर्य के साथ हमेशा काम करने का जज्बा होना चाहिए। इसके अलावा कम समय में सही निर्णय लेना भी एक महत्वपूर्ण गुण है।

हालांकि इस क्षेत्र में स्टडी कर रहे युवाओं के लिए आजकल नौकरी की कोई कमी नहीं है। ऐसे प्रशिक्षित लोगों के लिए सरकारी संस्थानों के अलावा तमाम गैर सरकारी संस्थाओं में भी नौकरी के ढेरों मौके हैं।

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