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Career Advice : जीवन में तरक्की के लिए क्या करें और क्या न करें, जानें यहां

दसवीं-बारहवीं के रिजल्ट निकल चुके हैं। अधिकांश कॉलेज और यूनिवर्सिटीज में एडमिशन शुरू हो चुके हैं। यह समय हर स्टूडेंट के लिए बहुत इंपॉर्टेंट है क्योंकि आपके द्वारा लिया गया डिसीजन आपके करियर की दिशा को डिसाइड कर देगा। ऐसे में आपको बहुत सोच-समझकर अपने करियर की दिशा तय करनी चाहिए। इस दौरान किन बातों का ध्यान रखना चाहिए, आपके लिए बहुत उपयोगी सलाह।

Career Advice : जीवन में तरक्की के लिए क्या करें और क्या न करें, जानें यहां

दसवीं-बारहवीं के रिजल्ट निकल चुके हैं। अधिकांश कॉलेज और यूनिवर्सिटीज में एडमिशन शुरू हो चुके हैं। यह समय हर स्टूडेंट के लिए बहुत इंपॉर्टेंट है क्योंकि आपके द्वारा लिया गया डिसीजन आपके करियर की दिशा को डिसाइड कर देगा। ऐसे में आपको बहुत सोच-समझकर अपने करियर की दिशा तय करनी चाहिए। इस दौरान किन बातों का ध्यान रखना चाहिए, आपके लिए बहुत उपयोगी सलाह।

सबसे पहले हाल की एक सच्ची कहानी। अब्दुल्ला खान ने 12वीं तक की पढ़ाई सऊदी अरब में की और फिर मुंबई आ गए, पर जेईई में पर्याप्त अंक न आने से आईआईटी में प्रवेश नहीं मिला। बाद में मुंबई के एक प्राइवेट इंजीनियरिंग कॉलेज में कंप्यूटर साइंस से बीई में प्रवेश ले लिया। अब्दुल्ला में कंप्यूटर कोडिंग को लेकर दीवानगी है। वह कॉलेज टाइम से ही कोडिंग कॉम्पिटिशन में मुकाबले के लिए पहुंच जाते थे। इस तरह उन्होंने तकरीबन डेढ़ सौ से अधिक मुकाबलों में हिस्सा लिया। यहां कहानी में ट्विस्ट अब आता है। कोडिंग के इस दीवाने को पिछले साल नवंबर में एक दिन अचानक गूगल की ओर से एक मेल मिली। इसके अनुसार, कुछ प्रोग्रामिंग साइट पर उनकी प्रोफाइल देखते हुए उन्हें गूगल में इंटरव्यू के लिए बुलाया गया था। कुछ चरणों के साक्षात्कार के बाद उन्हें गूगल के लंदन ऑफिस में फाइनल इंटरव्यू के लिए बुलाया गया। हाल ही में उन्हें अप्वाइंटमेंट लैटर भी मिल गया। उनकी सैलरी भारतीय मुद्रा में करीब 1.2 करोड़ रुपए सालाना होगी।


भरपूर हैं विकल्प

ऊपर दी गई सच्ची कहानी सिर्फ यह बताने के लिए है कि कुछ भी पढ़ लेने से कामयाबी नहीं मिल जाती। ऐसे एक नहीं, ढेरों उदाहरण हैं। आप खुद भी ऐसे लोगों के बारे में पढ़ते-देखते होंगे। सच्ची खुशी और कामयाबी तब मिलती है, जब आप अपनी पसंद को जुनून बनाकर उसी क्षेत्र में लगातार अपना जौहर दिखाते हैं। हमारे देश में, खासकर हिंदी भाषी क्षेत्रों में आज भी ज्यादातर छात्र-छात्राएं वही विषय पढ़ने लगते हैं, जिसमें आसानी से दाखिला मिल जाता है, जबकि वे अच्छी तरह जानते हैं कि उसमें उनका मन नहीं लग रहा। मन न रमने की स्थिति में वे न तो उसमें अच्छा प्रदर्शन कर पाते हैं और न ही उसके आधार पर उन्हें कोई बेहतर करियर ही मिल पाता है। यहां एक बात गांठ बांध लें, यह कभी न सोचें कि आज के समय में कामयाबी के मायने सिर्फ डॉक्टर, इंजीनियर बनना ही है। आज सैकड़ों ऐसे करियर फील्ड हैं, जिनमें पहचान और भरपूर पैसा है। बस आप यह देखें कि कौन-से क्षेत्र में आपको सबसे ज्यादा खुशी मिलती है? फिर यह देखें-तलाशें कि उस क्षेत्र से जुड़े कौन-से ऐसे एडवांस कोर्स हैं, जो आप कर सकते हैं? इसके बाद अपने माता-पिता, परिजनों को विश्वास में लेकर उस दिशा में कदम बढ़ाएं।

दुविधा से निकलें बाहर

अगर आप अभी अपनी रुचि/पसंद के बारे में ठीक-ठीक नहीं जान पाएं हैं या फिर आपको लगता है कि ऐसी कई सारी चीजें हैं, जो आपको पसंद तो हैं पर सब आपस में गड्ड-मड्ड हैं तो भी परेशान न हों। अगर आपको यह भी लगता है कि आपको अपनी पसंद पता तो है और उसी दिशा में आगे भी बढ़ना चाहते हैं, लेकिन आपके अभिभावक कुछ और ही सपना संजोए हुए हैं, जो आपको बिल्कुल भी पसंद नहीं है। अगर ऐसा है तो इसका भी उपाय है।

ऐसे जानें अपनी पसंद

सबसे पहले तो अपनी उस पसंद/रुचि को जानने का उपक्रम करें, जिसमें आपको आगे पढ़ाई करनी है और करियर बनाना है। आप इस बारे में अपने माता-पिता के साथ सहज होकर बात करें। उनसे पूछें कि उन्होंने बचपन से आपके भीतर क्या देखा है? उनके अनुसार, आपको बचपन से क्या पसंद और क्या नापसंद नजर आता रहा है? वे कुछ तो बताएंगे ही। हां, अगर इस बारे में वे साफ-साफ कुछ बता नहीं पाते, तो भी चिंता न करें। अपने दूसरे और कहीं अधिक कारगर उपाय पर अमल करें। आप एक सप्ताह तक हर दिन अपनी रुचियों को एक डायरी/नोटबुक में लिखते जाएं। उस दिन आपके मन में किस रुचि को लेकर ज्यादा उत्साह है (हो सकता है कि एक से ज्यादा क्षेत्र हों), उसे क्रम से लिख लें। फिर दूसरे दिन भी ऐसा करें। हो सकता है कि दूसरे दिन कुछ भिन्न तरह की रुचियां आपके दिमाग में आ रही हों। ऐसा करते हुए पिछले दिन के क्रम को न देखें। यह काम उत्साह के साथ लगातार सात दिन तक करें। सात दिन बाद आप सभी पर गौर करें और यह देखें कि उन सभी में क्या एक समान है, जो लगभग हर दिन या ज्यादातर दिनों में किसी न किसी पायदान पर आया है। अब इसमें से सबसे ज्यादा पसंद आने वाली तीन रुचियों को क्रमानुसार लिखें। इन तीनों पर अगले करीब एक सप्ताह तक मंथन करें। इन पर पैरेंट्स और परिवार के अन्य सदस्यों, दोस्तों, शुभचिंतकों, करीबी अध्यापकों से विचार-विमर्श करें। इन सबके बाद जो रुचि सामने आए, उसी से संबंधित कोर्स/करियर चुनने पर विचार करें।


पसंद को बनाएं जुनून

एक बार अपनी पसंद का क्षेत्र चुन लेने के बाद जब उससे संबंधित कोर्स करने की दिशा में कदम बढ़ाएं तो इसके साथ-साथ अन्य बातों पर भी जरूर गौर करें। उस विषय/क्षेत्र में सिर्फ कॉलेज/विश्वविद्यालय में संचालित कक्षाओं के भरोसे रहने की बजाय खुद से भी अपनी नॉलेज बढ़ाने का भरसक प्रयत्न करें। आज के समय में ऐसा करना इसलिए कहीं ज्यादा आसान है, क्योंकि अब आपके हाथ में इंटरनेट युक्त मोबाइल है। इसकी मदद से आप दुनियाभर की जानकारियां पल भर में ही एकत्रित कर सकते हैं। चूंकि यह क्षेत्र आपका मनपसंद है, इसलिए इसमें आप सोते-जागते डूबें यानी इसे अपना जुनून बनाएं। अगर आपका विषय तकनीक से जुड़ा है, तो उससे संबंधित प्रैक्टिकल पर अधिक से अधिक फोकस करें। लैब में ज्यादा से ज्यादा समय बिताएं। ऐसा करने से आप उस विषय में न सिर्फ पूरी तरह पारंगत होते जाएंगे, बल्कि इससे आपको उससे संबंधित इंडस्ट्री/जॉब मार्केट की बदलती जरूरतों के बारे में भी पता चलेगा और आप खुद को उसके अनुरूप तैयार कर सकेंगे। इस तरह आगे बढेंगे, तो आपको कोर्स के बाद नौकरी पाने की चिंता कभी नहीं सताएगी। खुद प्रयास करने से आप अपने साथ के स्टूडेंट्स से काफी आगे होंगे और स्किल्ड होने के कारण कंपनियों/संस्थानों से आपके सामने ऑफर की ढेर लगी होगी। फिर आपके सामने उसमें से सबसे बेहतर चुनने का विकल्प होगा। माता-पिता को भी इस बात पर ध्यान देने की जरूरत है कि वे अपने बच्चों पर किसी तरह का दबाव बिल्कुल भी न बनाएं। न ही उन पर अपनी पसंद थोपने का प्रयास करें।

बॉक्स एक्सपर्ट व्यू

डॉ. मनु तिवारी

ऐसे मिलेगी करियर से खुशी

अगर अपने करियर में तरक्की के साथ-साथ भरपूर खुशी चाहते हैं, तो आपको ऐसा कोर्स चुनना चाहिए, जिसे आप भरपूर एंज्वॉय कर सकें। इससे आप हर समय उत्साह से भरे रहेंगे। अगर पसंद/रुचि का कोर्स नहीं होगा और अगर फिर भी आपने उसमें आगे कदम बढ़ा दिया, तो शुरुआती कुछ सालों के बाद मन न लगने की स्थिति में आप उसमें कुढ़ने लगेंगे। लगातार असंतुष्ट रहने के कारण आपके भीतर अवसाद घर करता जाएगा। इसका असर आपके घर-परिवार और कार्यस्थल के प्रदर्शन पर भी पड़ेगा। इससे बचने के लिए जरूरी है कि शुरुआत से ही सतर्क रहें और अपनी पसंद का ही कोर्स/करियर चुनें, ताकि आजीवन उसका आनंद ले सकें।

क्या करें

-किसी के दबाव में आने की बजाय हमेशा अपने मन की सुनें।

-दुविधा होने की स्थिति में बाहर देखने की बजाय उस पर खुद अच्छी तरह विचार करें।

-पैरेंट्स द्वारा दबाव बनाने की स्थिति में डर कर या लिहाज करके उस दिशा में कदम बढ़ाने की बजाय उन्हें प्यार से समझाएं और आपको अपनी रुचि की राह पर आगे बढ़ने का एक मौका देने का अनुरोध करें।

-थ्योरी के साथ-साथ प्रैक्टिकल नॉलेज बढ़ाने पर ज्यादा ध्यान दें।

-इंटरनेट की मदद से अपनी नॉलेज बढ़ाएं और इंडस्ट्री की बदलती जरूरतों के अनुसार खुद को अपडेट करते रहें।

क्या न करें

- यह सोचकर करियर न चुनें कि उसमें खूब पैसा और ग्लैमर है।

-दोस्त या रिश्तेदार वह कोर्स कर रहा है, इसलिए आपको भी वही करना चाहिए, ऐसा न करें।

-बिना सोचे-समझे कोई भी कोर्स करने की दिशा में आगे न बढ़ें।

-संस्थान और कोर्स की प्रामाणिकता को जांचे बिना आंख मूंदकर आवेदन न करें।

कविता श्रीवास्तव

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