Hari bhoomi hindi news chhattisgarh
Breaking

Career Advice : जॉब के लिए अप्लाई करने से पहले गांठ बांध लें ये 5 बातें

नौकरी हासिल करने के लिए योग्यता को बढ़ाकर पेश करना, फर्जी डिग्री का सहारा लेना, आपराधिक गतिविधि मानी जाती है। सरकारी या निजी संस्थान की ओर से कराए जाने वाले वैरिफिकेशन में इन बातों का पता चल जाता है। ऐसे में किसी भी तरह की गलत जानकारी देने से बचना चाहिए।

Career Advice : जॉब के लिए अप्लाई करने से पहले गांठ बांध लें ये 5 बातें

आज के दौर में नौकरियां कम हैं और बेरोजगारी ज्यादा। ऐसे में कुछ नासमझ युवा नियोक्ता को प्रभावित करने या अपनी नौकरी सुनिश्चित करने के लिए आवेदन पत्र और रेज्यूमे में फर्जी डिग्रियां या फेक इंफॉर्मेशन दे देते हैं। भले ही नियुक्ति के वक्त आपका झूठ न पकड़ा जाए लेकिन देर सबेर जब कंपनी वैरिफिकेशन करवाएगी तो आपका झूठ पकड़ा जाएगा। इसलिए ऐसा कभी ना करें।

फर्जी डॉक्यूमेंट्स

फर्जी सर्टिफिकेट, ग्रेड शीट्स, एप्वॉइंटमेंट लेटर या सैलरी स्लिप कानूनी रूप से आपको परेशानी में डाल सकती है। ऐसा करने पर आप जेल भी जा सकते हैं। सीवी में योग्यताओं को बढ़ा-चढ़ाकर बताने, पुरानी सैलरी ज्यादा बताने, पद, अनुभव और प्रोफाइल को बढ़ाकर बताने से भी बैड इफेक्ट पड़ता है। ऐसे में एंप्लॉयर आपको नौकरी से निकाल सकता है या हमेशा के लिए नेगेटिव रिकॉर्ड में डाल सकता है।


ज्यादा सैलरी-एक्सपीरियंस

कई लोग नई कंपनी में ज्यादा सैलरी पाने के लिए पिछली सैलरी ज्यादा बता देते हैं। यह सरासर गलत है। एक मामूली झूठ भी आपको नौकरी से वंचित कर सकता है। इसलिए सबसे अच्छा तरीका तो यही है कि आप किसी भी तरह की गलतबयानी न करें। आपका एक मामूली झूठ आपको नौकरी से दूर कर सकता है। अगर आपने कहीं बामुश्किल महीने बीस दिन काम करके छोड़ दिया है, तो उसे एक्सपीरियंस के कॉलम में जोड़ना ना सिर्फ धोखा ही कहलाएगा बल्कि आपके प्रति नकारात्मक भाव ही जगाएगा। इससे संदेश जाएगा कि या तो आपको निकाल दिया गया या फिर आपका स्वभाव चंचल है और आप टिक कर काम करने में दिलचस्पी नहीं लेते।

सीवी में दें सही जानकारी

अगर दो जॉब्स के बीच में गैप है तो इसे छुपाने के लिए रेज्यूमे में एक झूठी नौकरी दर्शाकर कई लोग गलती करते हैं। वैरिफिकेशन में यह बात पकड़ में आ जाती है। सीवी में गलत जानकारी देने से आप फंस जाएंगे। ज्यादातर कंपनियां झूठ, जालसाजी और फर्जीवाड़े के प्रति जीरो टोलरेंस की नीति अपनाती हैं। वे खुद तो आपको निकालेंगे ही, साथ ही इससे आपकी मार्केट रेपुटेशन पर भी बुरा असर पड़ेगा। अगर आप चाहते हैं कि आपके खिलाफ किसी तरह की कानूनी कार्रवाई न हो और जॉब से न निकाला जाए तो सबसे श्रेष्ठ नीति है कि आप पारदर्शी बनें। अपनी शैक्षणिक योग्यताओं और स्किल्स के बारे में गलत जानकारी न दें। अगर पर्याप्त योग्यताएं नहीं हैं तो उन्हें अर्जित करने का प्रयास करें। वैसी ही जॉब के लिए अप्लाई करें, जो आपकी शैक्षणिक योग्यता और अनुभव के मुताबिक हो।


पकड़ में आ जाते हैं झूठ

आपके द्वारा दी गई झूठी जानकारी आसानी से पकड़ आ सकती है। इसके कई तरीके हैं। नया एंप्लॉयर पुराने संस्थान में फोन या ईमेल से आपके बारे में जानकारी जुटाई जाती है। इसमें कंपनी ज्वाइन करने और छोड़ने की तारीख, सैलरी और छोड़ने के कारणों के बारे में पूछताछ की जाती है। आपकी सैलरी स्लिप की कॉपी शेयर की जा सकती है। अगर आपने फेक स्लिप दी है तो तुरंत पकड़ में आ जाएंगे।

इसी तरह नियोक्ता की ओर से तय की गई वेरिफिकेशन एजेंसी, डिग्री चेक करती है। आपने जिस संस्थानों से डिग्री ली है, उनकी प्रामाणिकता जांचते हैं। मार्कशीट का आपके नाम के साथ मिलान किया जाता है। आपकी मार्कशीट्स को यूनिवर्सिटी के रिकॉर्ड से मिलान के लिए भी भेजा जा सकता है। आपके खिलाफ कोई चार्जशीट या एफआईआर है या नहीं, यह जांचने के लिए लोकल पुलिस स्टेशन की मदद ली जाती है। कोर्ट का डाटाबेस खंगाला जा सकता है।

इसके साथ ही आपको रेफर करने वाले से बात की जाती है औऱ जानकारी ली जाती है। यह भी देखा जाता है कि उनके साथ आपके क्या संबंध हैं। हो सकता है कि वह आपके कुलीग, बॉस, वेंडर या क्लाइंट रह चुके हों। रेफरेंस चेक में पता किया जाता है कि कैंडिडेट के बारे में रेफर करने वाले की राय क्या है। इस तरह आपने जो भी बातें रेज्यूमे या इंटरव्यू में बताई हैं, उन्हें क्रॉस चेक किया जा सकता है।

शिखर चंद जैन

Share it
Top