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एक्सपर्ट की राय: बायोफिजिक्स में ऐसे बनाएं करियर, कमाएं लाखों

बायोफिजिक्स में साइंस से अलग लेकिन चैलेंजिंग क्षेत्र है, जिसके अंतर्गत मोलेक्यूलर बायोफिजिक्स, फिजियोलॉजिकल बायोफिजिक्स, मेडिकल फिजिक्स, न्यूक्लियर मेडिसिन, जीन प्रोटीन इंजीनियरिंग, बायो इंफॉर्मेटिक्स आदि का अध्ययन किया जाता है, जिनके विकास से मेडिसिन और मेडिकल तकनीक के विकास को दिशा मिलती है।

एक्सपर्ट की राय: बायोफिजिक्स में ऐसे बनाएं करियर, कमाएं लाखों

आज जिस तरह समाज में कैंसर जैसी बीमारियां गंभीर रूप ले रही हैं, उससे इस फील्ड में नए-नए रिसर्च की जरूरत पड़ रही है। जैविक स्तर पर कैंसर सहित विभिन्न बीमारियों के बढ़ने के संबंध में होने वाले अध्ययन के लिए बायोफिजिक्स सब्जेक्ट काफी मददगार है। यह फिजिक्स और बायोलॉजी के कॉम्बिनेशन का फील्ड है, जिसमें जैविक प्रक्रिया में भौतिकी सिद्धांतों के उपयोग का अध्ययन किया जाता है। इसमें कार्यरत प्रोफेशनल्स को बायोलॉजी और फिजिक्स दोनों फील्ड्स की जानकारी जरूरी है। हालांकि अभी इसकी पढ़ाई कुछ ही संस्थानों में कराई जाती है लेकिन आने वाले समय में इसमें अच्छे जॉब के ऑप्शंस सामने आएंगे। इस बारे में डिटेल में जानिए...

एरिया ऑफ स्टडी

यह मेडिकल साइंस से अलग लेकिन चैलेंजिंग क्षेत्र है, जिसके अंतर्गत मोलेक्यूलर बायोफिजिक्स, फिजियोलॉजिकल बायोफिजिक्स, मेडिकल फिजिक्स, न्यूक्लियर मेडिसिन, जीन प्रोटीन इंजीनियरिंग, बायो इंफॉर्मेटिक्स आदि का अध्ययन किया जाता है, जिनके विकास से मेडिसिन और मेडिकल तकनीक के विकास को दिशा मिलती है। मोलेक्यूलर बायोफिजिक्स में सैद्धांतिक और कंप्यूटेशनल तकनीक के प्रयोग से अणु के व्यवहार का प्रतिरूप तैयार किया जाता है।

इसका इस्तेमाल, बीमारियों के अध्ययन और उनके इलाज की विधि खोजने के काम आते हैं। बायोफिजिक्स की मदद से संक्रामक बीमारियों की पावरफुल वैक्सीन तैयार की जाती है। वैसे, इसका इस्तेमाल कई क्षेत्रें में होता है, जैसे- फॉरेंसिक साइंस से लेकर बायोरेमेडिएशन (जैवोपचारण), मेडिकल इमेजिंग टेक्नोलॉजीज और एमआरआई (मेगनेटिक रिसोनेंस इमेजिंग), सीएटी (कंप्यूटेड एक्सियल टोमोग्राफी) आदि।

नेचर ऑफ वर्क

इस फील्ड में जो प्रोफेशनल काम करते हैं, उसे ‘बायोफिजिसिस्ट’ कहते हैं। बायोफिजिसिस्ट यह स्टडी करते हैं कि कैसे ऑर्गनिज्म डेवलप होता है, कैसे देखता और सुनता है? कैसे सोचता और जीवित रहता है? वे इस बात को लेकर भी परीक्षण करते हैं कि मस्तिष्क कैसे काम करता है और सूचनाओं को कैसे स्टोर रखता है? हार्ट ब्लड को कैसे पंप करता है? प्लांट कैसे लाइट का इस्तेमाल फोटोसिंथेसिस के लिए करते हैं? इसके साथ-साथ कई सारे ऐसे सब्जेक्ट हैं, जिसकी खोज बायोफिजिसिस्ट करते हैं। आमतौर पर बायोफिजिसिस्ट मेडिकल और क्रिमिनोलॉजी फील्ड के प्रोफेशनल और साइंटिस्ट के साथ काम करते हैं।

एंट्री प्रोसेस

बायोफिजिक्स की फील्ड में एंट्री के लिए जरूरी है कि स्नातक स्तर पर फिजिक्स, केमिस्ट्री और बायोलॉजी विषय का अध्ययन किया हो। भारत में ऐसे कुछ ही विश्वविद्यालय हैं, जो बायोफिजिक्स के स्नातक स्तरीय कोर्स ऑफर करते हैं। वैसे बायोफिजिसिस्ट के तौर पर अपने करियर की शुरुआत करने के लिए बायोफिजिक्स की डिग्री जरूरी है। इसके बाद मास्टर्स और पीएचडी डिग्री भी कर सकते हैं। बायोफिजिक्स के अंतर्गत मोलेक्यूलर बायोफिजिक्स, मेंमब्रेंस बायोफिजिक्स, न्यूरोबायोफिजिक्स, बायोफिजिक्स तकनीक, बायोएनर्जेटिक्स, मेडिकल बायोफिजिक्स आदि सेगमेंट्स भी शामिल होते हैं।

स्किल्स

बायोफिजिसिस्ट के लिए क्रिएटिव सोच होना बहुत जरूरी है। भौतिक जगत के प्रति जिज्ञासा होने के साथ-साथ कंप्यूटर स्किल भी जरूरी है। फिजिक्स, बायोलॉजी और मैथमेटिक्स विषय पर अच्छी पकड़ होने के साथ-साथ साइंस फील्ड में हो रहे नए रिसर्च के प्रति इंट्रेस्ट रखना जरूरी है। साथ ही धैर्य, दृढ़ता और काम के प्रति लगन भी जरूरी है।

जॉब ऑप्शंस

जो छात्र फिजिक्स और बायोलॉजी में रुचि रखते हैं। वह बायोफिजिक्स के क्षेत्र में करियर बना सकते हैं। इस फील्ड में ग्रेजुएट और पोस्ट ग्रेजुएट की तुलना में पीएचडी करने वाले कैंडिडेट्स के लिए काफी संभावनाएं हैं। बायोफिजिसिस्ट, रिसर्चर या साइंटिस्ट के रूप में गवर्नमेंट ऑर्गनाइजेशन में जॉब की तलाश कर सकते हैं। साथ ही, बायोफिजिक्स से संबंधित कंपनियों में भी जॉब पा सकते हैं।

फॉर्मास्यूटिकल और हाईटेक बायोलॉजिकल कंपनियां भी इनको हायर करती हैं। मेडिकल कॉलेज में भी लेक्चरर के रूप में जॉब की तलाश की जा सकती है। इसके अलावा, फॉरेंसिक लैब, केमिकल कंपनीज, फूड प्रोसेसिंग प्लांट्स, ड्रग मैन्यूफेक्चरर्स, कॉस्मेटिक इंडस्ट्री, फर्टिलाइजर-पेस्टिसाइड कंपनियों में भी इनके लिए जॉब ऑप्शंस होते हैं।

सैलरी

इस फील्ड में सैलरी अनुभव और संस्था के प्रोफाइल पर निर्भर करती हैं। हालांकि एंट्री लेवल पर भी अच्छी सैलरी की उम्मीद की जा सकती है। शुरुआती दौर में प्रतिमाह 45-50 हजार रुपए सैलरी मिल जाती है। अगर आपका परफॉर्मेंस अच्छा रहता है, तो सैलरी और भी अच्छी हो सकती है, लेकिन जो रिसर्च सेक्टर में काम करते हैं, उनकी सैलरी अच्छी होने से साथ-साथ कई तरह के भत्ते भी मिलते हैं।

एक्सपर्ट व्यू, प्रो. बी. बिस्वाल, (कलस्टर इनोवेशन सेंटर, दिल्ली यूनिवर्सिटी)

एक्सपर्ट्स की बढ़ेगी डिमांड

बायोफिजिक्स, बायोलॉजी और फिजिक्स का कॉम्बिनेशन है। जैसे-जैसे बायोलॉजी क्वांटिटेटिव होता जा रहा है, वैसे-वैसे फिजिक्स का इस्तेमाल इसमें बढ़ता जा रहा है। आज इसमें कई स्तरों पर भौतिकी उपकरणों का प्रयोग किया जा रहा है। डायग्नोस्टिक्स मैथड में भी इसका प्रयोग अहम है। मेडिकल की दुनिया में इसके जानकारों की भूमिका इसलिए बढ़ी है क्योंकि सीटी स्कैन, एमआरआई और रेडियोथेरेपी आदि में फिजिक्स के टूल्स का ही इस्तेमाल किया जाता है। आज कैंसर जैसे डिजीज के ट्रीटमेंट में इसकी भूमिका महत्वपूर्ण हो गई है। इसके तहत जो रेडियोथैरेपी की जाती है, उसमें भौतिकी के सिद्धांतों पर कार्य करने वाले उपकरणों का ही प्रयोग होता है। इस तरह आज बायोफिजिक्स युवाओं के सामने करियर की नई संभावना लेकर आ रहा है। इसके जानकारों की काफी डिमांड है। चाहे वह रिसर्च का क्षेत्र हो या डायग्नोस्टिक सेंटर, इसके विशेषज्ञ विभिन्न जगहों पर अपनी सेवाएं दे सकते हैं।

प्रमुख संस्थान

एम्स, नई दिल्ली

वेबसाइट: www.aiims.edu

एमजी यूनिवर्सिटी, कोट्टयम

वेबसाइट: www.mgu.ac.in

यूनिवर्सिटी ऑफ कल्यानी, नाडिया

वेबसाइट: www.klyuniv.ac.in

मणिपुर यूनिवर्सिटी, मणिपुर

वेबसाइट: www.manipuruniv.ac.in

पंजाब यूनिवर्सिटी, चंडीगढ़

वेबसाइट:www.puchd.ac.in

यूनिवर्सिटी ऑफ मुंबई, मुंबई

वेबसाइट: www.mu.ac.in

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