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इंजीनियरिंग कॉलेज में नहीं आ रहे छात्र

इस साल सिर्फ रायपुर में ही इंजीनियरिंग कॉलेज बंद करने के लिए दो संस्थानों ने आवेदन किए हैं।

इंजीनियरिंग कॉलेज में नहीं आ रहे छात्र

लगातार तीसरे साल नए इंजीनियरिंग कॉलेज खोलने के लिए एक भी आवेदन तकनीकी शिक्षण संस्थान के पास नहीं आया। राज्य निर्माण के बाद हर वर्ष बड़ी संख्या में इंजीनियरिंग कॉलेजों के लिए आवेदन आते थे, लेकिन छात्रों के घटते रुझान के कारण इंजीनियरिंग संस्थानों को लगातार घाटा हो रहा है। कोई इसमें रुचि नहीं दिखा रहा। इस साल इंजीनियरिंग कॉलेज बंद करने दो संस्थानों ने आवेदन किए हैं।

2012 में प्रदेश में 57 इंजीनियरिंग कॉलेज थे। इस वर्ष दो संस्थानों के बंद होने के बाद इनकी संख्या सिर्फ 45 रह जाएगी। वहीं भनपुरी स्थित केंद्र की संस्था सीपीएटी में इस साल से डिग्री कोर्स भी प्रारंभ किए जाएंगे।

खाली रह गई थीं आधी से अधिक सीटें

गत वर्ष 17941 सीटों पर पीईटी के जरिए प्रवेश के लिए आवेदन मंगाया गया था। आधी से अधिक सीटें इसमें खाली रह गई थीं। कई इंजीनियरिंग कॉलेजों का यह आलम था कि सौ फीसदी तक सीटें खाली रह गईं। कुल 48 इंजीनियरिंग कॉलेजों में 17 हजार 941 सीटों के लिए 32 हजार ने परीक्षा दी थी। सीट खाली रह जाने की वजह से नए सत्र के लिए किसी कॉलेज ने भी सीट बढ़ाने की मांग नहीं की। वहीं 2015 में 46 फीसदी सीटें खाली रह गई थीं।

जेईई का सहारा

कॉलेजों की सीटों को भरने के लिए पिछले साल नई योजना बनाई गई थी। जेईई मेंस के तहत 10 फीसदी सीटों में अन्य राज्य के परीक्षार्थियों को प्रवेश देने का प्रावधान रखा गया, लेकिन वो भी फेल हो गई। केवल 139 ने ही रजिस्ट्रेशन करवाया। सूत्रों के अनुसार इस साल भी यदि सीटें पूरी नहीं भरती हैं, तो जेईई के जरिए प्रवेश देने विचार किया जाएगा।

120 सरकारी सीटों का फायदा

जो छात्र सरकारी संस्था में प्रवेश लेना चाहते हैं, उन्हें 120 सीटों का फायदा इस सत्र से मिलेगा। केंद्र की संस्था सीपीएटी में इस सत्र से इंजीनियरिंग के डिग्री कोर्स शुरू किए जाएंगे। इनमें प्रवेश पीईटी के जरिए मिलेगा। फिलहाल यहां सिर्फ डिप्लोमा कोर्स ही चल रहा है। दो नए ब्रांच शुरु किए जाएंगे, जो प्लास्टिक टेक्नोलॉजी से संबंधित रहेंगे।

एक भी आवेदन नहीं

तकनीकी शिक्षा विभाग के डायरेक्टर एसएस बजाज ने कहा कि पिछले दो सालों में एक भी आवेदन नए इंजीनियरिंग कॉलेजों के लिए नहीं अाए। इस साल भी यही हाल है। कुछ आवेदन कॉलेजों को बंद करने के लिए आए हैं, लेकिन नए संस्थान के लिए एक भी आवेदन नहीं आए हैं।

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