ITR Refund Rule: आईटीआर रिफंड पर 0.5% हर महीने के हिसाब से ब्याज मिलता है। कुछ स्थितियों में ब्याज कम या बिल्कुल नहीं दिया जाता। गलती लगे तो 143(1) इंटिमेशन चेक कर रेक्टिफिकेशन फाइल करें।

ITR Refund Rule: पिछले कुछ दिनों में बड़ी संख्या में टैक्सपेयर्स को उनका इनकम टैक्स रिफंड मिला है। कई मामलों में रकम भी बड़ी है। लेकिन सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर कई लोगों ने शिकायत की है कि उन्हें रिफंड तो मिला, पर उस पर मिलने वाला ब्याज नहीं जोड़ा गया। तो सवाल है कि सरकार रिफंड पर ब्याज कैसे और कब देती है?

टैक्स एक्सपर्ट्स के मुताबिक, कानून के तहत टैक्सपेयर्स को साधारण ब्याज 0.50% हर महीने या उसके हिस्से के हिसाब से मिलता है। यह ब्याज उस असेसमेंट ईयर की 1 अप्रैल से लेकर रिफंड मिलने की तारीख तक जोड़ा जाता है। एक्सपर्ट्स बताते हैं कि अगर रिटर्न तय तारीख के बाद फाइल किया गया है, तो ब्याज सिर्फ फाइलिंग की तारीख से लेकर रिफंड मिलने तक ही मिलेगा। लेकिन हर केस में ब्याज मिलना जरूरी नहीं है। टैक्स एक्सपर्ट्स के मुताबिक, कुछ स्थितियों में ब्याज कम या बिल्कुल नहीं मिलता। 

  • जैसे -अगर रिफंड की रकम धारा 143(1) के तहत तय टैक्स की 10% से कम है, तो ब्याज नहीं मिलेगा।
  • अगर रिटर्न धारा 139(1) की तय तारीख के बाद फाइल किया गया है, तो ब्याज सीमित अवधि के लिए मिलेगा।
  • अगर रिफंड में देरी टैक्सपेयर्स की वजह से हुई है, तो उस अवधि का ब्याज काट दिया जाएगा।

अब अगर किसी को लगे कि ब्याज कम मिला है तो क्या करें?

सबसे पहले अपने ई-फाइलिंग पोर्टल पर दर्ज ईमेल और मोबाइल नंबर चेक करें। हो सकता है विभाग की तरफ से कोई सूचना आई हो। रिटर्न प्रोसेस होने के बाद धारा 143(1) के तहत इंटिमेशन जारी होता है। इसमें टैक्सपेयर्स और विभाग की गणना का पूरा ब्यौरा होता है, जिससे गलती का पता चल सकता है।

कानून कहता है कि टैक्सपेयर्स को रिफंड की वास्तविक तारीख तक ब्याज मिलना चाहिए। अगर 143(1) की इंटिमेशन और रिफंड मिलने की तारीख के बीच ज्यादा देरी हुई है, तो सीपीसी में रेक्टिफिकेशन एप्लिकेशन देकर अतिरिक्त ब्याज की मांग की जा सकती है।

रिफंड में देरी के कारण भी समझ लें-

  • ITR और फॉर्म 26AS या AIS में आंकड़ों का अंतर
  • बैंक अकाउंट की गलत जानकारी या वैलिडेशन न होना
  • बिना पात्रता के डिडक्शन या छूट का दावा
  • आईटीआर समय पर ई-वेरिफाई न करना
  • बड़े या असामान्य ट्रांजैक्शन की जांच
  • विभाग की आंतरिक या सिस्टम संबंधी देरी

ITR फाइल करना ही काफी नहीं है। प्रोफाइल में सही ईमेल और मोबाइल नंबर अपडेट रखें ताकि विभाग की हर सूचना समय पर मिले। अगर पुराने टैक्स डिमांड से एडजस्टमेंट होना है, तो विभाग को पहले जानकारी देना और आपत्ति सुनना जरूरी है।
(प्रियंका कुमारी)