ईरान युद्ध के 13 दिन बाद भारत में महंगाई बढ़ने लगी है। रसोई गैस महंगी होने से बाहर का खाना और डीजल महंगा होने से सब्जियां महंगी होंगी। जानिए आम भाषा में पूरा गणित।

Iran War Impact on India: ईरान और इजरायल-अमेरिका के बीच छिड़ी जंग को आज (12 मार्च 2026) 13 दिन पूरे हो चुके हैं। दूर देश में चल रही इस लड़ाई की आग अब धीरे-धीरे भारत के हर घर की रसोई और आम आदमी की जेब तक पहुंच गई है। बहुत ही सरल भाषा में समझिए कि पिछले 13 दिनों में क्या बदला है और आने वाले दिनों में आपकी जेब पर कितना बोझ बढ़ने वाला है।

रसोई गैस महंगी तो बाहर का खाना भी होगा महंगा
युद्ध की वजह से गैस की कीमतों में जो उछाल आया है, उसका असर सिर्फ आपके घर की रसोई तक सीमित नहीं रहेगा। जब कमर्शियल गैस सिलेंडर (जो रेस्टोरेंट और ढाबों में इस्तेमाल होते हैं) के दाम बढ़ते हैं, तो उसका सीधा असर आपकी थाली पर पड़ता है। अब रेस्टोरेंट मालिक अपनी बढ़ी हुई लागत की भरपाई खाने के दाम बढ़ाकर करेंगे। यानी अब बाहर जाकर खाना खाना, पिज्जा मंगाना या ऑफिस के बाहर मिलने वाली चाय-नाश्ता भी आने वाले दिनों में महंगा होने वाला है।

डीजल की मार से महंगी होंगी सब्जियां और राशन
युद्ध के कारण कच्चे तेल के दाम $110 के पार पहुंच गए हैं। अगर पेट्रोल और डीजल की कीमतें बढ़ती हैं, तो इसका मतलब है कि ट्रक और लोडिंग गाड़ियों का भाड़ा बढ़ जाएगा। जब खेत से सब्जी या मंडी से अनाज शहर तक लाने वाला ट्रक ज्यादा किराया लेगा, तो दुकानदार उस बढ़े हुए किराए का बोझ आपकी जेब पर ही डालेंगे। यही वजह है कि आने वाले दिनों में आलू-प्याज से लेकर दाल-चावल तक हर चीज के दाम 15 से 20 प्रतिशत तक बढ़ सकते हैं।

प्लास्टिक और कॉस्मेटिक्स पर भी पड़ेगा बुरा असर
शायद आप न जानते हों, लेकिन हम जो प्लास्टिक के डिब्बे, बाल्टी या टूथब्रश इस्तेमाल करते हैं, उन्हें बनाने में पेट्रोलियम उत्पादों का बड़ा हाथ होता है। कच्चा तेल महंगा होने का मतलब है कि प्लास्टिक के सामान, साबुन, शैम्पू और क्रीम जैसी चीजें बनाने वाली कंपनियों की लागत बढ़ जाएगी। कंपनियां इस घाटे को सहने के बजाय अपने प्रोडक्ट्स की एमआरपी (MRP) बढ़ा देंगी। यानी नहाना-धोना और घर का प्लास्टिक का सामान खरीदना भी अब जेब पर भारी पड़ेगा।

ईएमआई (EMI) और लोन का बढ़ता डर
जब चारों तरफ महंगाई बढ़ती है, तो उसे कंट्रोल करने के लिए रिजर्व बैंक (RBI) अक्सर ब्याज दरें बढ़ा देता है। अगर ऐसा हुआ, तो आपके होम लोन या कार लोन की ईएमआई (EMI) बढ़ जाएगी। 13 दिनों के इस युद्ध ने शेयर बाजार को भी डरा दिया है, जिससे लोगों की जमा-पूंजी और म्यूचुअल फंड्स के मुनाफे में कमी आई है। कुल मिलाकर, यह युद्ध आपकी कमाई और बचत दोनों पर प्रहार कर रहा है।

अब तक का हिसाब और आगे का खतरा
इन 13 दिनों में रुपया कमजोर हुआ है, जिसका मतलब है कि हम विदेश से जो भी सामान मंगाते हैं (जैसे मोबाइल, लैपटॉप या इलेक्ट्रॉनिक सामान), वे अब महंगे मिलेंगे। अगर यह युद्ध कुछ हफ्ते और चला, तो तेल की सप्लाई पूरी तरह ठप हो सकती है, जिससे पेट्रोल-डीजल की भारी किल्लत भी हो सकती है। फिलहाल सरकार अपने स्टॉक से काम चला रही है, लेकिन आम आदमी को अपनी फिजूलखर्ची कम करके बजट को नए सिरे से बनाने की जरूरत है।