Trump Tariff Refund:अमेरिका की राजनीति और कारोबार जगत में इस समय एक बड़ा सवाल चर्चा में है कि डोनाल्ड ट्रंप के लगाए गए टैरिफ से वसूले गए करीब 133 अरब डॉलर (करीब 12 लाख करोड़) आखिर कब और कैसे वापस किए जाएंगे? अमेरिका के सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को ट्रंप के व्यापक इमरजेंसी टैरिफ को रद्द कर दिया, जिससे उनके दूसरे कार्यकाल की ट्रेड पॉलिसी को बड़ा झटका लगा। हालांकि कोर्ट के फैसले ने एक नई उलझन भी खड़ी कर दी।
अमेरिकी कोर्ट ने साफ कर दिया कि ट्रंप ने 1977 के इंटरनेशनल इमरजेंसी इकोनॉमिक पावर्स एक्ट के तहत अपनी शक्तियों से आगे जाकर ये टैरिफ लगाए थे लेकिन पहले से वसूली गई भारी रकम का क्या होगा, इस पर साफ दिशा नहीं दी गई।
यही वजह है कि अब कंपनियां रिफंड के लिए दावे दाखिल करना शुरू कर चुकी हैं। लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि यह प्रक्रिया आसान नहीं होगी। ट्रेड लॉयर जॉयस अडेटुटु ने एसोसिएटेड प्रेस से कहा कि आने वाला समय काफी उलझनों भरा हो सकता। उनके मुताबिक अदालतों के लिए भी और आयात करने वाली कंपनियों के लिए भी यह प्रक्रिया आसान नहीं रहने वाली है। हालांकि इतने स्पष्ट फैसले के बाद किसी न किसी रूप में रिफंड देना लगभग तय माना जा रहा।
वॉल स्ट्रीट जर्नल की रिपोर्ट के मुताबिक इंटरनेशनल इमरजेंसी इकोनॉमिक पावर्स एक्ट टैरिफ से दिसंबर के मध्य तक करीब 133.5 अरब डॉलर की वसूली हो चुकी थी। यह वित्त वर्ष 2025 में कुल टैरिफ कलेक्शन का लगभग 67 प्रतिशत था। यदि अन्य ड्यूटी को भी जोड़ लिया जाए तो कुल कलेक्शन करीब 202 अरब डॉलर तक पहुंच गया, जो पिछले साल के मुकाबले दोगुने से भी ज्यादा है।
इन टैरिफ में आयात पर सामान्य रूप से 10 प्रतिशत टैक्स लगाया गया था जबकि कुछ देशों पर ज्यादा दरें लागू थीं। कुल वसूली में करीब 81.7 अरब डॉलर सामान्य टैरिफ से आए, जबकि चीन और हांगकांग से 37.8 अरब डॉलर मिले। इसके अलावा मैक्सिको, कनाडा, जापान, भारत और ब्राजील से भी रकम जुटाई गई। एक समय चीन पर टैरिफ 125 प्रतिशत तक पहुंच गया था, साथ ही फेंटेनाइल से जुड़े आयात पर 20 प्रतिशत अतिरिक्त टैक्स भी लगाया गया था। बाद में बातचीत के बाद इसे घटाकर 10 प्रतिशत कर दिया गया।
ट्रंप इन टैरिफ का बचाव करते रहे थे। उनका कहना था कि इससे मिलने वाला पैसा अमेरिका के कर्ज को कम करने, नागरिकों को राहत देने और किसानों जैसे प्रभावित सेक्टर की मदद में इस्तेमाल हो सकता है। सुप्रीम कोर्ट का फैसला हालांकि 6-3 के बहुमत से आया। दिलचस्प बात यह रही कि ट्रंप द्वारा नियुक्त तीन जजों में से दो भी बहुमत के साथ खड़े रहे।
जस्टिस ब्रेट कैवनॉ ने असहमति जताते हुए कहा कि अदालत ने यह स्पष्ट नहीं किया कि सरकार आयातकों से वसूले गए अरबों डॉलर कैसे लौटाएगी। उन्होंने चेतावनी दी कि रिफंड की प्रक्रिया काफी उलझी हुई हो सकती है। खुद ट्रंप ने भी माना कि मामला लंबे समय तक अदालतों में चल सकता है। उन्होंने कहा कि यह लड़ाई दो से पांच साल तक चल सकती है।
उधर इलिनॉय के गवर्नर जेबी प्रित्जकर ने तुरंत करीब 9 अरब डॉलर की वापसी की मांग कर दी। उन्होंने कहा कि इन टैरिफ ने किसानों को नुकसान पहुंचाया, सहयोगी देशों को नाराज किया और खाने-पीने की चीजों की कीमतें बढ़ा दीं। उनके मुताबिक औसतन हर घर पर लगभग 1700 डॉलर का बोझ पड़ा।
विशेषज्ञों का मानना है कि सरकार रिफंड प्रक्रिया को आसान बनाने के लिए कोई ऑनलाइन पोर्टल शुरू कर सकती है। हालांकि नए कानूनी विवाद भी सामने आ सकते हैं, खासकर उन कंपनियों के बीच जिन्होंने टैरिफ का बोझ आगे ग्राहकों या अन्य कारोबारियों पर डाल दिया था। टैरिफ खत्म होने से महंगाई पर थोड़ी राहत मिल सकती है। हालांकि ज्यादातर पैसा आम लोगों के बजाय कंपनियों को लौटने की संभावना ज्यादा बताई जा रही है।