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वेंकैया नायडू बोले- जाति, मजहब और परिवारवाद के आधार पर नहीं होनी चाहिए राजनीति

उपराष्ट्रपति वेंकैया नायडू ने गुरुवार को कहा कि व्यक्तित्व, आचरण, सामर्थ्य और क्षमता के आधार पर राजनीति होनी चाहिए।

वेंकैया नायडू बोले- जाति, मजहब और परिवारवाद के आधार पर नहीं होनी चाहिए राजनीति

उपराष्ट्रपति वेंकैया नायडू ने गुरुवार को कहा कि व्यक्तित्व, आचरण, सामर्थ्य और क्षमता के आधार पर राजनीति होनी चाहिए। मगर यह दुर्भाग्य है कि बीच में जाति, समुदाय और धन बल हावी हो गया। यहां आज से शुरू तीन दिवसीय बिहार दिवस समारोह में नायडू ने कहा कि व्यक्तित्व, सामर्थ्य और क्षमता के आधार पर राजनीति होनी चाहिए तथा जनता को उसके आधार पर राजनेताओं को चुनना चाहिए।

मगर यह दुर्भाग्य की बात है कि बीच में कुछ जगह पर जाति, समुदाय और धन बल हावी हो गया। उन्होंने कहा कि नेतृत्व करने वाले व्यक्ति का आचारण, व्यक्तित्व, सामर्थ्यवान, क्षमतावान, अनुशासित और लगन होनी चाहिए तभी देश का विकास होगा सकता है। नायडू ने कहा कि जाति, मजहब और परिवारवाद के आधार पर राजनीति नहीं होनी चाहिए।

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उन्होंने कहा कि वेदकाल से हमारी परंपरा 'सबका साथ सबका विकास' रही है। हम सभी भारतीय हैं। अनेक भाषा एवं भेष, फिर अपना एक देश। विविधता में एकता भारत की विशेषता है। नायडू ने कहा कि हमारा मजहब और पूजा पद्धति अलग अलग है, पर हमारे पूर्वजों ने जीवन पद्धति दी है उसे ही हमें कायम रखना चाहिए, यह बहुत जरूरी है।

उन्होंने कहा कि इस देश में रहने वाले सभी भारतीय हैं। देशभक्ति का मतलब केवल भारत माता के चित्र पर मार्ल्यापण करना और केवल भौगोलिक स्वरूप नहीं बल्कि देश की संपूर्ण आबादी का उत्थान हमारा लक्ष्य होना चाहिए। नायडू ने कहा कि जीवन के सभी क्षेत्रों में भारतीय बड़ा बडा काम रहे हैं और उनकी बुद्धिमत्ता दुनिया भर में साबित हो रही है।

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कई बहुराष्ट्रीय कंपनियों का नेतृत्व करने वाले भारतीय हैं। देश की भूमि उपजाऊ है और यहां के लोग कुषाग्र बुद्धि वाले हैं। उन्हें प्रोत्साहन और सही दिशा दिया जाना चाहिए। नायडू ने मंच पर मौजूद मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की प्रशंसा करते हुए कहा कि उनके नेतृत्व में बिहार का एजेंडा ही बदल गया जो कि समग्र और तेजी से विकास है यही जरूरी है।

उन्होंने कहा कि लोगों में जो क्षमता है उसे बढावा देकर उन्हें प्रोत्साहित करना और यही बिहार सरकार कर रही है जिससे हम प्रसन्न हैं। नायडू ने कहा कि देश के लिए यही एजेंडा होना चाहिए। प्रधानमंत्री ने कहा है कि उनका एजेंडा विकास और सुशासन है। विकास के साथ सुशासन भी जरूरी है।

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