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आखिर दूध मंडी में ऐसा क्या है जो लालूपुत्र तेजस्वी आधी रात धरना देने पहुंच गए

दूध मंडी का स्वरूप लगातार बढ़ता गया और इसीलिए वहां दूध कारोबारियों ने एक यूनियन बना लिया जिसे उत्पादन सहकारिता समिति का नाम दिया गया। समिति ने दुकानदारों से चंदा लेकर यहां दो मंजिला मकान बना दिया। न सिर्फ सुबह बल्कि शाम को भी यहां खोए और पनीर की खूब बिक्री होती। हर दो साल में समिति चुनाव करवाती थी।

आखिर दूध मंडी में ऐसा क्या है जो लालूपुत्र तेजस्वी आधी रात धरना देने पहुंच गए

लोकसभा चुनाव (Lok Sabha Election) के परिणाम आने के बाद से लापता हुए राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के नेता तेजस्वी यादव सक्रिय राजनीति में लौट आए हैं। बुधवार शाम पटना जंक्शन के सामने वाले गेट के पास दूध मंडी को तोड़ने के बाद वह वहां पहुंच गए और धरने पर बैठ गए। कुछ देर बाद तेजस्वी के बड़े भाई तेज प्रताप भी वहां पहुंच गए। और वह भी जिला प्रशासन द्वारा दूध मंडी तोड़े जाने के विरोध में पार्टी नेताओं के साथ धरने पर बैठ गए।

बिहार विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव (Tejaswi Yadav) द्वारा दूध मंडी को तोड़े जाने को लेकर धरने पर बैठने के मामले को सियासी जानकार पार्टी के लिए प्रदेश में फिर से माहौल बनाने की बात कह रहे हैं। पिछले दिनों प्रदेश में बाढ़ और चमकी बुखार का कहर रहा, उस वक्त जब नीतीश सरकार को घेरा जा सकता था उस समय पार्टी नेताओं में कोई हलचल नहीं दिखी। लोग तेजस्वी को जमीन के साथ सोशल मीडिया पर भी खोजते रहे पर उनका कुछ पता नहीं चल सका।


अब जब अगले साल प्रदेश में चुनाव है तो स्वाभाविक है कि पार्टी किसी भी कीमत पर खुद को पीछे नहीं रखना चाहती इसीलिए दूध मंडी के तोड़े जाने के मुद्दे को संजीवनी मानकर पार्टी के कोर वोटर (यादव) के साथ खड़ी हो गई है। तेजस्वी यादव के साथ पार्टी के आलानेताओं को भी लगने लगा है कि सबसे पहले अपने कोर वोटर बचाए जाएं उसके बाद नए वोटरों की तलाश की जाए।

आखिर दूध मंडी में क्या है

पटना जंक्शन के ठीक सामने वाले गेट पर करीब 6300 वर्गफीट में दूध मंडी फैली हुई थी। 80 के दशक में 2-3 दूध कारोबारियों ने यहां अस्थाई दुकान लगाकर यहां मंडी की नीव डाली। अगले 10 साल में ये मंडी खोए मंडी के रूप में बदल गई पर नाम दूध मंडी ही रहा। स्टेशन के ठीक बगल होने के कारण यहां न सिर्फ बिहार से बल्कि झारखंड और पश्चिम बंगाल से भी दूध, खोया और पनीर की सप्लाई होती थी।

मंडी का स्वरूप लगातार बढ़ता गया और इसीलिए वहां दूध कारोबारियों ने एक यूनियन बना लिया जिसे उत्पादन सहकारिता समिति (Production co-operative committee) का नाम दिया गया। समिति ने दुकानदारों से चंदा लेकर यहां दो मंजिला मकान बना दिया। न सिर्फ सुबह बल्कि शाम को भी यहां खोए और पनीर की खूब बिक्री होती। हर दो साल में समिति चुनाव करवाती थी।

जिला प्रशासन ने क्या किया ध्वस्त

दूध मंडी को खाली करवाने के पीछे तमाम तरह के तर्क दिए जा रहे हैं। प्रमंडलीय आयुक्त की माने तो स्टेशन के पास खाली कराई गई जमीन स्मार्ट सिटी के एरिया के तौर पर चुनी गई है जहां पर हाईड्रोलिक पार्किंग सिस्टम (Hydraulic parking system) बनाया जाएगा। लोगों के लिए शौचालय, स्नानघर और पीने के पानी की व्यवस्था की जाएगी।

वहीं दूध मंडी के कारोबारियों का कहना है कि प्रशासन ने भरोसा दिलाया था कि 50 कारोबारियों को दूसरे तल पर व्यवस्था करवाई जाएगी पर उसके पहले ही सबकुछ ध्वस्त कर दिया। बताया जा रहा कि वहां अत्याधुनिक पार्किंग स्थल बनाया जा सकेगा। जहां स्टेशन जाने वाले लोग अपनी गाड़ियां पार्क कर सकेंगे। काम जल्दी से हो इसके लिए प्रशासन ने अगले 24 घंटे में वहां से अतिक्रमण हटाने की बात कही है।

अब सवाल ये उठता है कि क्या तेजस्वी यादव का विरोध दूध मंडी को बचा पाएगा? सत्ता संघर्ष में लगातार अपने वोटबैंक को दरकता देखते हुए अपने ही कोर वोटर के लिए खड़ा होना गलत नहीं है। अगर तेजस्वी यादव, उनके भाई तेजप्रताप और पूरी आरजेडी मिलकर अपने वोटरों से भावनात्मक जुड़ाव रखने में सफल रहती है तो निश्चित तौर पर उसके जनाधार में बढोत्तरी होगी।

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