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पिता की हत्या के मामले में बेटा ही दोषी करार, कोर्ट ने सुनाई उम्रकैद की सजा, 50,000 रुपये का जुर्माना

भागलपुर की जिला अदालत ने पानी व्यवसायी विनेंदु कुमार की हत्या के मामले में उनके इकलौते बेटे अमियाश्री को दोषी करार दिया है। कोर्ट ने उसे उम्रकैद की सजा सुनाई है। साथ ही पंचास हजार रुपये का जुर्माना लगाया है।

पिता की हत्या के मामले में बेटा ही दोषी करार, कोर्ट ने सुनाई उम्रकैद की सजा, 50,000 रुपये का जुर्माना
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Son Convicted in Murder of Father Court Sentenced to Life Imprisonment

भागलपुर की जिला अदालत ने पानी व्यवसायी विनेंदु कुमार की हत्या के मामले में उनके इकलौते बेटे अमियाश्री को दोषी करार दिया है। कोर्ट ने उसे उम्रकैद की सजा सुनाई है। साथ ही पंचास हजार रुपये का जुर्माना लगाया है।

तिलकामांझी थाना क्षेत्र के कचहरी चौक के नजदीक आरबीएसएस रोड के रहने वाले चालीस साल के अमियाश्री के पिता की हत्या आठ साल पहले 25 जून 2011 की देर रात कर दी गई थी। उनपर ईंट से हमला किया गया था। इस दौरान व्यवसायी विनेंदु कुमार की पत्नी सुनीता विनेंदु को भी घायल कर दिया था। तीस सितंबर 2011 को पुलिस ने अमियाश्री को आरोपी मानते हुए चार्जशीट दाखिल की थी। कोर्ट ने इसे क्रूर हत्या करार दिया है।


वारदात के बाद बेटे अमियाश्री ने ही पिता की हत्या का केस दर्ज कराया था लेकिन पुलिस ने अपनी जांच में उसके कमरे से मिले खून के सैंपल समेत अन्य स्थानों से मिले खून के नमून की एफएसएल जांच के बाद ही उसे पिता की हत्या आरोपी माना था। इस केस में व्यवसायी की बेटी कविताश्री, पत्नी सुनीता विनेंदु, प्रकाश राय, डॉ. संजय कुमार, सब इंस्पेक्टर ललन कुमार दास, मैनेजर बालमुकुंद सिंह और डॉ. योगेश प्रसाद की गवाही हुई थी। सरकार की ओर से बहस में एपीपी मो. रियाज हुसैन ने भाग लिया। जबकि बचाव पक्ष की ओर से अधिवक्ता आशीष चटर्जी थे।

एपीपी मोहम्मद रियाज हुसैन के मुताबिक शुरु में हत्या का यह मामला ब्लाइंड मर्डर था। घटना के समय कोई प्रत्यक्षदर्शी मौजूद नहीं था लेकिन वारदात में व्यवसायी की पत्नी भी बुरी तरह घायल हो गई थी। उसे पीएमसीएच रेफर किया गया था। पटना में पुलिस को दिए बयान में उसने कहा था कि घटना के समय चार अपराधी घर आए थे। जो फैक्ट्री के कागजात की मांग कर रहे थे। बाद में ईंट से कुछलकर पहले पति की हत्या कर दी गई। बाद में उसे भी अधमरा कर दिया। पुलिस को घटनास्थल से कई सबूत मिले थे। इसके बाद अमियाश्री के कमरे को सील कर दिया था।



डिस्टिल वाटर के कारखाना का स्वामित्व, कचहरी चौक वाले मकान को अपने नाम कराने के लालच में अमियाश्री ने 24-25 जून की रात दो बजे अपने पिता को ईंट से कुचलकर मार डाला था। पिता की हत्या को लेकर उसने जो बयान पुलिस को दिए थे उस पर पुलिस को पच नहीं रही थी। फिर पुलिस ने वैज्ञानिक और तकनीकी जांच का सहारा लिया।

जब वह अपने पिता को बेरहमी से मार रहा था तभी उसकी मां की नींद टूट गई थी। इसके बाद उसने मां को भी बुरी तरह लहूलुहान कर दिया था। वारदात को अंजाम देने के बाद अमियाश्री ने डॉक्टरों और पुलिस वालों को फोन कर घटना की जानकारी दी थी।

पुलिस को दिए बयान में उसने कहा था कि वह रानीगंज स्थित अपने ससुराल से घटना के एक दिन पूर्व शाम को लौटा था। घर में सो रहा था। 25 जून की सुबहउसकी बहन कविताश्री ने मां-पिता के कमरे में देखा तो उसने हल्ला किया। उसके बुलाने पर वह अपने कमसे से वहां गया तो देखा दोनों नीचे लहुलुहान पड़े थे। इसके बाद पुलिस वहां पहुंची और जांच में पिता की मौत हो चुकी थी।

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