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पद्मावत सुप्रीम कोर्ट फैसला: बिहार के मुजफ्फरपुर में सिनेमा हॉल के बाहर जबरदस्त प्रदर्शन-तोड़फोड़

''पद्मावत'' पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला आने के बाद देश में फिल्म का विरोध हो रहा है, बिहार के मुजफ्फरपुर में कुछ उपद्रवियों ने सिनेमा हॉल के बाहर जमकर विरोध प्रदर्शन किया।

पद्मावत सुप्रीम कोर्ट फैसला: बिहार के मुजफ्फरपुर में सिनेमा हॉल के बाहर जबरदस्त प्रदर्शन-तोड़फोड़

'पद्मावत' पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला आने के बाद देश में फिल्म का विरोध हो रहा है, बिहार के मुजफ्फरपुर में कुछ उपद्रवियों ने सिनेमा हॉल के बाहर जमकर विरोध प्रदर्शन किया। गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट ने विवादित फिल्म पद्मावत की 25 जनवरी को देश भर में रिलीज का रास्ता साफ कर दिया। सुप्रीम कोर्ट ने राजस्थान और गुजरात की ओर से इन राज्यों में फिल्म के प्रदर्शन पर रोक लगाने वाली अधिसूचनाओं और आदेशों पर आज रोक लगा दी।

प्रधान न्यायाधीश दीपक मिश्रा की अध्यक्षता वाली और न्यायमूर्ति एएम खानविलकर तथा न्यायमूर्ति डीवाई चंद्रचूड़ की पीठ ने किसी भी अन्य राज्य को फिल्म के प्रदर्शन पर रोक लगाने वाला आदेश अथवा अधिसूचना जारी करने पर भी रोक लगा दी। पीठ ने कहा कि कानून व्यवस्था कायम रखना राज्यों का दायित्व है। पीठ ने अपने अंतरिम आदेश में कहा कि हम निर्देश देते हैं कि जारी की गई इस तरह की अधिसूचना और आदेशों के क्रियान्वयन पर रोक रहेगी। इस मामले में इस तरह की अधिसूचना अथवा आदेश जारी करने से हम अन्य राज्यों को भी रोक रहे हैं।

सुनवाई के दौरान प्रधान न्यायाधीश ने कहा कि जब फिल्म के प्रदर्शन को इस तरह रोका जाता है तो मेरा संवैधानिक विवेक मुझे टोकता है। फिल्म के अन्य निर्माताओं समेत वायकॉम18 की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता हरीश साल्वे और मुकुल रोहतगी ने पीठ को बताया कि राज्यों के पास फिल्म के प्रदर्शन पर प्रतिबंध लगाने जैसी ऐसी अधिसूचना जारी करने की कोई शक्ति नहीं है, क्योंकि केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड (सीबीएफसी) फिल्म की रिलीज के लिए प्रमाण पत्र जारी कर चुका है। मामले पर आगे की सुनवाई मार्च में होगी।

गुजरात, राजस्थान, हरियाणा और मध्य प्रदेश द्वारा फिल्म के प्रदर्शन पर रोक लगाने वाले आदेश और अधिसूचना के विरोध में फिल्म के निर्माताओं ने शीर्ष अदालत का दरवाजा खटखटाया था। गुजरात, राजस्थान, हरियाणा और मध्य प्रदेश की सरकारों ने ऐलान किया था कि वे अपने अपने राज्यों में पद्मावत के प्रदर्शन की अनुमति नहीं देंगी। फिल्म में दीपिका पादुकोण, शाहिद कपूर और रणवीर सिंह मुख्य भूमिकाओं में हैं।

गुजरात, राजस्थान, हरियाणा राज्यों का प्रतिनिधित्व कर रहे अतिरिक्त सॉलिसीटर जनरल तुषार मेहता ने पीठ को आज सूचित किया कि अधिसूचना और आदेश केवल गुजरात और राजस्थान राज्यों की ओर से ही जारी किए गए थे। मेहता ने पीठ से अनुरोध किया कि मामले की सुनवाई या तो कल की जाए या फिर 22 जनवरी को ताकि राज्य दस्तावेजों का अध्ययन करें और अदालत की मदद कर सकें।

उन्होंने कहा कि इन राज्यों में कानून व्यवस्था की समस्या के बारे में खुफिया रिपोर्ट है और फिल्म को प्रमाणपत्र देते समय सीबीएफसी ने इन पहलुओं पर ध्यान नहीं दिया। एएसजी ने कहा कि हमारे देश में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता में कभी भी तथ्यों से छेड़छाड़ शामिल नहीं हो सकती। साल्वे ने अपना पक्ष रखते हुए कहा कि एक बार जब सीबीएफसी ने फिल्म को प्रमाणपत्र दे दिया तब राज्य इसके प्रदर्शन पर रोक नहीं लगा सकते। रोहतगी ने दलील दी कि जब सीबीएफसी ने फिल्म को प्रमाणपत्र प्रदान कर दिया है तब राज्य ‘‘सुपर सेंसर बोर्ड' की तरह काम नहीं कर सकते। उन्होंने कहा कि राज्यों का दायित्व कानून व्यवस्था बनाए रखना है।

निर्माताओं का तर्क था कि सीबीएफसी के आदेशानुसार, शीर्षक सहित फिल्म में बदलाव किया जा चुका है। उनकी अपील में कहा गया है कि फिल्म को सीबीएफसी ने मंजूरी दे दी है फिर राज्य इस पर रोक नहीं लगा सकते। किसी खास क्षेत्र में कानून व्यवस्था की समस्या के चलते इसके प्रदर्शन को वहां रोका जा सकता है। यह फिल्म 13वीं सदी में दिल्ली के सुल्तान अलाउद्दीन खिलजी और मेवाड़ के महाराजा रतन सिंह के बीच हुए युद्ध पर आधारित है। पिछले साल जयपुर और कोल्हापुर में जब फिल्म की शूटिंग चल रही थी तब करणी सेना के कथित सदस्यों ने इसके सेट पर तोड़फोड़ तथा इसके निर्देशक संजय लीला भंसाली के साथ धक्कामुक्की की थी।

‘पद्मावत' फिल्म की अभिनेत्री दीपिका पादुकोण और निर्देशक संजयलीला भंसाली का सर कलम करने के वास्ते कथित रुप से 10 करोड़ रुपये के इनाम की घोषणा करने वाले राजपूत नेता सूरज पाल अमू ने आज कहा कि वह शांतिपूर्ण तरीके से फिल्म का विरोध जारी रखेंगे। उच्चतम न्यायालय द्वारा इस विवादास्पद फिल्म की 25 जनवरी को पूरे देश में रिलीज का मार्ग प्रशस्त किये जाने के बाद अमू ने कहा, ‘‘मैं शांतिपूर्ण ढंग से विरोध करना जारी रखूंगा। इसके लिए मुझे यदि फांसी पर चढ़ा दिया जाता है तो भी मुझे कोई दिक्कत नहीं है।

उन्होंने कहा कि हम अदालत के आदेश का सम्मान करते हैं। हम पढ़े-लिखे लोग हैं, हम कानून का सम्मान करते हैं। लेकिन हमें शांतिपूर्ण प्रदर्शन का हक है और हम ऐसा ही कर रहे हैं। हमारा मानना है कि यह फिल्म राजपूत बिरादरी की भावनाएं आहत करती है। अमू ने पिछले साल 29 नवंबर को प्रदेश भाजपा के मुख्य मीडिया संयोजक पद से इस्तीफा दे दिया था। उससे कुछ दिन पहले पार्टी ने उन्हें इनाम की घोषणा करने पर कारण बताओ नोटिस दिया था।

अमू ने नवंबर में दिल्ली में राजपूतों के एक कार्यक्रम में कहा था कि हम किसी को रानी पद्दमावती के साहसिक चरित्र को धूमल कर और इतिहास के खलनायकों का महिमामंडन कर इतिहास के साथ छेड़छाड़ करने और लोगों को गुमराह करने की इजाजत नहीं दे सकते। हम किसी भी कीमत पर यह फिल्म रिलीज नहीं होने देंगे। उच्चतम न्यायालय ने ‘‘पद्मावत' के प्रदर्शन पर रोक संबंधी राजस्थान एवं गुजरात सरकारों के आदेशों एवं अधिसूचना पर आज स्थगन लगा दिया। इससे इसकी राष्ट्रव्यापी रिलीज का मार्ग प्रशस्त हो गया।

राजस्थान के विधि मंत्री राजेन्द्र राठौड ने कहा कि सर्वोच्च न्यायालय के आदेश का अध्ययन करने के बाद ही कोई निर्णय लिया जायेगा। इस फिल्म का शुरूआती दिनों से विरोध कर रहे श्री राजपूत करणी सेना ने फिल्म को पर्दे पर नहीं उतरने देने के निर्णय की प्रतिबद्धता को दोहराया। राजपूत करणी सेना के अध्यक्ष महिपाल सिंह मकराना ने कहा कि इस मामले में समाज की मंशा साफ है। राजपूत समाज के लोग सडकों पर उतरेंगे जिसे देश का हर व्यक्ति देखेगा।

यदि फिल्म रिलीज होती है तो जनता कर्फ्यू लगेगा। फिल्म वितरक यदि फिल्म खरीदना चाहते है तो अपनी जोखिम पर खरीदे, क्योंकि उन्हें सिनेमा घरों के मालिकों का समर्थन प्राप्त है। उन्होंने कहा कि यदि कानून व्यवस्था बिगड़ती है तो उसके लिये सरकार, उच्चतम न्यायालय, सेंसर बोर्ड और संजय लीला भंसाली जिम्मेदार होंगे। जौहर स्मृति संस्थान के कोषाध्यक्ष नरपत सिंह ने बताया कि न्यायालय के आदेश से समाज के लोगो की भावनाएं आहत हुई है। चित्तौडगढ के राजपूत समाज के महिला संगठन जौहर क्षत्राणी मंच की अध्यक्ष मंजूश्री शक्तावत ने कहा कि 21 जनवरी को एक स्वाभिमान रैली निकाली जायेगी।

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