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गंगा-जमुनी तहजीब की मिसालः 57 गांवों के हिन्दू परिवारों ने मुहर्रम पर निकाला ताजिया जुलूस

बिहार से जहां मॉब लिंचिंग की खबरें लगातार सामने आती हैं वहीं यहां के 57 गांव गंगा-जमुनी तहजीब की मिसाल कायम कर रहे हैं। इन गांवों में एक भी मुस्लिम नहीं रहते हैं लेकिन उन्होंने मुहर्रम के दसवें दिन (अशुरा) ताजिए का पहलाम किया।

गंगा-जमुनी तहजीब की मिसालः 57 गांवों के हिन्दू परिवारों ने मुहर्रम पर निकाला ताजिया जुलूसNavada Hindu families from 57 villages took out Tajia procession at Muharram

बिहार से जहां मॉब लिंचिंग की खबरें लगातार सामने आती हैं वहीं यहां के 57 गांव गंगा-जमुनी तहजीब की मिसाल कायम कर रहे हैं। इन गांवों में एक भी मुस्लिम नहीं रहते हैं लेकिन उन्होंने मुहर्रम के दसवें दिन (अशुरा) तजिया जुलूस निकाला।

सिरदला के कुशाहन के रहने वाले सचिन कुमार (35 वर्षीय) रेलवे के कर्मचारी हैं। वह पिछले दस दिनों से मुहर्रम के लिए छुट्टी लेकर गांव आए। मंगलवार को उन्होंने ग्रामीणों के साथ मिलकर ताजिए का पहलाम किया। यह पहला मौका नहीं है जब सचिन इस अवर पर घर आए हों, इससे पहले इमाम हुसैन की शहादत की याद में वह हर मुहर्रम को घर पहुंचते हैं।



इसको लेकर सचिन कहते हैं कि उनकी आस्था जुड़ी है और आस्था की कोई जाति और मजहब नहीं होता। तीन पीढ़ियों से ताजिया बनाते आ रहे हैं। वह बताते हैं कि उनके पूर्व जेठू राजवंसी ने इसकी शुरूआत की थी। इमाम साहब की इबादत से उनकी संतान हुई थी। इसके बाद से इमाम साहब की याद में ताजिया बनाते आ रहे हैं। प्रार्थना करते हैं और सलामती का दुआ करते हैं।

वहीं 70 वर्षीय सुचित राजवंशी ने बताया कि ग्रामीण लोग आपस में सहयोग कर इस परंपरा को निभाते आ रहे हैं। कर्बला में शहीद हुए हजरत इमाम हुसैन की शहादत को बिहार में परंपरागत तरीके से मनाया गया। इस मौके पर पटना समेत पूरे प्रदेश में मुहर्रम का जुलूस निकाला गया। यह तस्वीर पटना सिटी चौक थाना मोड़ की है। ग्रामीण तजिया के समीप बैठकर मातम मनाते हैं और मर्सिया पढ़ते हैं।

जंगबहादुर मांझी और मणिलाल चौधरी कहते हैं कि भटविगहा की आबादी 1200 है। एक भी मुस्लिम परिवार नहीं हैं। लेकिन इमाम साहब की इबादत की जाती है। जहानपुर की सुनैना देवी महिला ताजियादार हैं। करूणा बेलदारी, बभनौली में सिर्फ हिंदू ही ताजिया बनाते हैं।



खबरों के मुताबिक ताजिया का निर्माण भी हिंदू ही करते हैं। नरेश राजवंशी, सत्येन्द्र राजवंशी और छोटू राजवंशी ने ताजिए का निर्माण किया। जेहलडीह, भरसंडा, बांधी, झगरीविगहा, कारीगिधी, सोनवे, छोनुविगहा, चैबे समेत 57 गांव हैं, जहां सिर्फ हिंदू ताजिया का निर्माण करते हैं। सिरदला में सिर्फ 106 ताजिये का लाइसेंस हैं, जिनमें 49 ही मुस्लिम परिवारों के पास।

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