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दक्षिण अमेरिका की सबसे ऊंची चाेटी अकांकागुआ फतह करना चाहती है बिहार की बेटी, लेकिन आर्थिक तंगी बनी रोड़ा

बीते कुछ महीने पहले बिहार की बेटी मिताली प्रसाद ने जब अफ्रीका की सबसे ऊंची चोटी किलमंजारो को फतह किया था तो वह मीडिया की सुर्खियां बन गई थी। लेकिन वह इतने से ही संतुष्ट नहीं है। उसका सपना अभी सभी महाद्वीपों की ऊंची चोटियों को फतह करना है।

दक्षिण अमेरिका की सबसे ऊंची चाेटी अकांकागुआ फतह करना चाहती है बिहार की बेटी, लेकिन आर्थिक तंगी बनी रोड़ा

बीते कुछ महीने पहले बिहार की बेटी मिताली प्रसाद ने जब अफ्रीका की सबसे ऊंची चोटी किलमंजारो को फतह किया था तो वह मीडिया की सुर्खियां बन गई थी। लेकिन वह इतने से ही संतुष्ट नहीं है। उसका सपना अभी सभी महाद्वीपों की ऊंची चोटियों को फतह करना है। वह माउंट एवरेस्ट की उंचाई को भी नापना चाहती है। उसका लक्ष्य अब दक्षिण अमेरिका की सबसे ऊंची चोटी आकांकागुआ पर फतह करना है लेकिन हर बार की तरह इस बार भी उसके सामने आर्थिक तंगी रोड़ा बन गई है।

मिताली नालंदा की रहने वाली हैं और अभी पटना विश्वविद्यालय में पढ़ाई कर रही हैं। खबरों के मुताबिक मिताली आर्थिक मदद के लिए सोमवार को टीएमबीयू के वाइस चांसलर डॉ. विभाष चंद्र झा से मिलने पहुंची। छात्र संगठन सीवाईएसएस के प्रदेश उपाध्यक्ष आसिफ अली भी सहयोग कर रहे हैं।

मिताली के मुताबिक वह सभी महाद्वीपों की सर्वाधिक ऊंची चोटियों की चढ़ाई करना चाहती हैं। किलिमंजारो की चढ़ाई इस वर्ष 31 मार्च को की थी। इस पर तीन लाख तीस हजार रुपये खर्च आए थे। तब पटना विश्वविद्यालय और दूसरी संस्थाओं ने आर्थिक मदद की थी।

मिताली ने बताया कि अब अकांकागुआ की चढ़ाई का लक्ष्य इस पर लगभग छह लाख रुपये खर्च का अनुमान है। पटना विश्वविद्यालय ने पचास हजार रुपये की मदद की है। मगध विश्वविद्यालय से भी सहयोग मिला है। आर्थिक मदद के लिए वह राज्य के दूसरे विश्वविद्यालयों में भी जा रही हैं।

मिताली का बचपन से अब तक का समय आर्थिक तंगी के बीच कटा है। जब वह तीसरी कक्षा में थी तब पिता का व्यवसाय ठीक से नहीं चल पा रहा था। इसलिए वह पूरे परिवार के साथ नालंदा के कतरीसराय के गांव मायापुर लौट आए। साल 2008 में फिर पूरा परिवार पटना आ गया। मां सिलाई के काम से घर का खर्च चलाती हैं। वहीं परिवार की आय का अब मुख्य जरिया है। बड़ी बहन ट्यूशन पढ़ाती थी।

इस दौरान मिताली ने कराटे की ट्रेनिंग भी ली और राष्ट्रीय स्तर पर पहुंची। वह कई बार राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं और कैंपों में इसलिए हिस्सा नहीं ले पाई क्योंकि आर्थिक तंगी रोड़ा बन जाती थी। बाद में मिताली ने पर्वतारोहण के कोर्स किए।

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