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मदन मोहन झा के जरिए कांग्रेस भाजपा को देगी पटकनी, इस रणनीति पर हो रहा काम

मंगलवार का दिन बिहार कांग्रेस के लिए खास रहा। बिहार कांग्रेस को स्थाई प्रदेश अध्यक्ष मिल गया है। नए प्रदेश अध्यक्ष का नाम हैं मदन मोहन झा। हालांकि इस पद के लिए अखिलेश सिंह का नाम भी चर्चा में था मगर पार्टी ने मदन मोहन पर भरोसा जताया है।

मदन मोहन झा के जरिए कांग्रेस भाजपा को देगी पटकनी, इस रणनीति पर हो रहा काम

मदन मोहन झा बिहार कांग्रेस के अध्यक्ष बन गए हैं। इससे पहले कौकब कादनी कार्यकारी अध्यक्ष बन कर पद को संभाल रहे थे। कांग्रेस ने इस बार अपनी इस चाल से भाजपा को चौंका दिया है।

बिहार में भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष नित्यानंद राय हैं। नित्यानंद राय यादव जाति से आते हैं। इस जाति पर लालू की पकड़ ज्यादा मानी जाति है क्योंकि लालू प्रसाद अपने को कई बार मंच से यादवों का नेता बताया है।

प्रदेश अध्यक्ष पद की लड़ाई में हालांकि अखिलेश सिंह के नाम भी चर्चा में थी मगर पार्टी ने मदन मोहन पर भरोसा जताया है। इस तरह लोकसभा चुनाव के पहले मदन मोहन झा को बिहार में बड़ी जिम्मेदारी मिली है।

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बिहार में लोकसभा चुनाव के लिए सभी पार्टियां कमोबेश रणनीति बनाने में जुटी हैं। लालू यादव ने पूर्व मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी को अपने मिलाया तो वहीं नीतीश कुमार ने चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर को अपनी पार्टी में ज्वाइन करवाया है।

ये वहीं प्रशांत किशोर हैं जिन्होंने 2014 में पीएम मोदी को लोकसभा चुनाव जीतने में मदद की थी। मोदी लहर ऐसी चली कि भाजपा के सामने विपक्ष पूरी तरह टूट गया।

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फिलहाल नीतीश अभी दिल्ली में सीट शेयरिंग का अमित शाह के साथ सुलझाने में लगे हैं। इधर कांग्रेस ने भी अपनी चाल का धार देते हुए मदन मोहन को बिहार की कमान सौंप दी है।

मदन मोहन झा के जरिए कांग्रेस ने मोदी को उलझाने की चाल चली है। हाल ही हुए सवर्ण आंदोलन के बाद से भाजपा पर सवर्ण विरोधी होने का आरोप लग रहा है।

SC-ST एक्ट में बदलाव कर पिछड़ों को तो भाजपा ने साध लिया मगर सवर्ण इससे नाराज हो गए। खैर भाजपा इस मुद्दे पर अपना स्टैंड जब तक बनाने में कामयाब होती तब तक कांग्रेस ने एक कदम आगे बढ़ा दिया है ऐसे में भाजपा को आने वाले समय में मुश्किल जरूर होगी।

मदन मोहन झा बिहार सरकार के पूर्व मंत्री कांग्रेस के वरिष्ठ नेता हैं और अभी विधान परिषद के सदस्य भी हैं। पहले वह कई बार कार्यकारी अध्यक्ष रह चुके हैं।

सवर्णेां का सोचना है कि दलितों के नाम पर वोट के लिए सवर्णों के अधिकार के बारे में कोई पार्टी नहीं सोचती है। ऐसे में अध्यक्ष का सवर्ण जाति से होने के कारण कांग्रेस को फायदा मिल सकता है। इसलिए पार्टी मदन मोहन झा के नेतृत्व पर भरोसा कर रहा है।

आपको बता दें कि बिहार कांग्रेस के कार्यकारी अध्यक्ष कौकब कादरी थे। कई महीनों से स्थाई प्रदेश अध्यक्ष का बिहार को इंतजार था।

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