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पटना साहिब सीट : शत्रुघ्न और रविशंकर प्रसाद के बीच कांटे की टक्कर, पूरे देश की टिकी नजरें

बिहार की पटना साहिब लोकसभा सीट पर इस बार राज्य की ही नहीं बल्कि पूरे देश की नजर है। यहां से भाजपा के कद्दावर नेता रविशंकर प्रसाद और कांग्रेस से शत्रुघ्न सिन्हा आमने-सामने हैं।

पटना साहिब सीट : शत्रुघ्न और रविशंकर प्रसाद के बीच कांटे की टक्कर, पूरे देश की टिकी नजरें

बिहार की पटना साहिब लोकसभा सीट पर इस बार राज्य की ही नहीं बल्कि पूरे देश की नजर है। यहां से भाजपा के कद्दावर नेता रविशंकर प्रसाद और कांग्रेस से शत्रुघ्न सिन्हा आमने-सामने हैं। हालांकि, दोनों ही उम्मीदवार एक ही जाति के हैं लेकिन फिर भी स्थानीय मतदाताओं का एक बड़ा हिस्सा इस चुनाव को लालू प्रसाद यादव के प्रभाव और मोदी फैक्टर की साख की कसौटी के रूप में ले रहा है। बता दें कि सिन्हा को महागठबंधन का भी समर्थन प्राप्त है। पटना साहिब में कायस्थ मतदाताओं की अच्छी-खासी संख्या है। दोनों उम्मीदवारों के कायस्थ होने की वजह से वोट बंटने की भी संभावना है।

बिहार की इस लोकसभआ सीट पर 19 को सातवें चरण में होना है मतदान

सिन्हा को महागठबंधन का समर्थन

पटना साहिब पर सिन्हा को महागठबंधन का समर्थन हासिल है, जिसमें लालू प्रसाद की अगुवाई वाला राजद भी शामिल है। पटना साहिब सीट का गठन वर्ष 2008 में नए परिसीमन के तहत हुआ था। इसके बाद से यहां पर दो लोकसभा चुनाव हुए हैं। दोनों ही बार भाजपा के टिकट पर शत्रुघ्न सिन्हा सांसद चुने गए। जातीय समीकरण के आधार पर कायस्थों का दबदबा रहा है। लगभग पांच लाख से ज्यादा कायस्थों के अलावा यहां यादव और राजपूत मतदाताओं की भी खासी संख्या है।

भाजपा माने मोदी जी

सामान्य तौर पर इस लोकसभा क्षेत्र में रहना वाले कायस्थ मतदाताओं का झुकाव भारतीय जनता पार्टी की की तरफ माना जाता है। इस बार चुनाव मैदान में कांग्रेस और भाजपा दोनों ही तरफ बड़े कायस्थ चेहरे खड़े होने की वजह से वोट बंटने का खतरा पैदा हो गया है। कायस्थों में मतविभाजन हुआ तो इसका लाभ भाजपा के रविशंकर प्रसाद को मिल सकता है। जदयू के साथ होने की वजह से रविशंकर प्रसाद को कुर्मी और अति पिछड़ा वोटों का भी लाभ हो सकता है। रविशंकर प्रसाद इस सीट पर नए हैं तो स्थानीय लोगों को शिकायत है कि वर्तमान सांसद भी ज्यादातर क्षेत्र में नहीं दिखाई देते हैं। शत्रुघ्न सिन्हा भी पटना में चुनाव के समय ही दिखाई देते हैं।

रविशंकर ने विकास के मुद्दे को आगे बढ़ाया

गौरतलब है कि रविशंकर प्रसाद के पिता ठाकुर प्रसाद जनसंघ के संस्थापकों में से एक थे। रविशंकर प्रसाद ने कहा कि इस क्षेत्र के विकास के लिए उनका एजेंडा स्पष्ट है। यहां सड़कों को लगातार दुरूस्त किया जा रहा है। इसके अलावा पटना मेट्रो की आधारशिला रखी जा चुकी है और इसका विस्तार किया जाएगा। पटना को स्मार्ट सिटी के रूप में विकसित करने की पहल की जा रही है जिसमें बीपीओ और स्टार्टअप भी हैं। शत्रुघ्न सिन्हा ने कहा कि भाजपा में उन्होंने लोकशाही को धीरे-धीरे तानाशाही में परिवर्तित होते देखा है। सिन्हा के मुताबिक इस बार लोग बदलाव को तैयार हैं। अगर कोई मुगालते में है, तो उसे रहने दें। गौरतलब है कि पटना साहिब लोकसभा क्षेत्र में 6 विधानसभा सीटें आती हैं।

पटना साहिब लोकसभा क्षेत्र का गणित

इन विधानसभा सीटों में बख्तियारपुर, बांकीपुर, कुम्हरार, पटना साहिब, दीघा और फतुहा सीटें शामिल हैं। इनमें पांच सीटें भाजपा के पास हैं। सिर्फ फतुहा सीट राजद के पास है। साल 2008 में परिसीमन से पहले पटना सीट पर 1952 से 1962 तक कांग्रेस तथा 1967 एवं 1971, 1980 में सीपीआई ने जीत दर्ज की । 1977 में जनता दल, 1984 में कांग्रेस जीती । 1989 में पहली बार भाजपा ने इस सीट पर जीत दर्ज की । 1991 एवं 1996 में जनता दल तथा 1998 और 1999 में यह सीट भाजपा की झोली में गई । 2004 में यह सीट आरजेडी के खाते में गई।

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