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लोकसभा चुनाव 2019 : मीरा Vs छेदी, दोनों के सामने राजनीतिक वजूद बचाने की चुनौती

सासाराम सीट से चुनाव मैदान में उतरीं कांग्रेस की मीरा कुमार छठी तो भाजपा के छेदी पासवान चौथी बार संसद पहुंचने की चुनौती से दो-चार हो रहे हैं। यह दीगर बात है कि मीरा कुमार ने बिजनौर व करोलबाग से तीन बार जीत का परचम लहराया है।

लोकसभा चुनाव 2019 : मीरा Vs छेदी, दोनों के सामने राजनीतिक वजूद बचाने की चुनौती
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सासाराम सीट से चुनाव मैदान में उतरीं कांग्रेस की मीरा कुमार छठी तो भाजपा के छेदी पासवान चौथी बार संसद पहुंचने की चुनौती से दो-चार हो रहे हैं। यह दीगर बात है कि मीरा कुमार ने बिजनौर व करोलबाग से तीन बार जीत का परचम लहराया है। सासाराम सीट से उन्हें दो बार जीत मिली है। उधर सासाराम से तीन बार जीत चुके छेदी पासवान यहां से चौथी जीत के लिए संघर्ष कर रहे हैं। मीरा कुमार के सामने सासाराम से जीत कर सियासी वजूद बचाने की चुनौती है।

इस सीट पर कांग्रेस प्रत्याशी मीरा कुमार तथा वर्तमान सांसद भाजपा प्रत्याशी छेदी पासवान के बीच निर्णायक लड़ाई है। वर्ष 2014 के चुनाव में भी यही दोनों पुराने खिलाड़ी मैदान में थे। सासाराम में मतदान 19 मई को होना है। बसपा के मनोज कुमार व सीपीआई एमएल के अशोक बैठा इनके वोट बैंक में सेंध लगाने की जुगत अभी से भिड़ा रहे हैं। हालांकि इसमें उन्हें कितनी सफलता मिलेगी यह कहना अभी जल्दबाजी होगी।

मौजूदा सांसद और भाजपा प्रत्याशी पासवान से मिल रही कड़ी चुनौती

कांग्रेस का रहा दबदबा

अनुसूचित जाति (एससी) के लिए आरक्षित इस लोकसभा सीट में कांग्रेस का दबदबा रहा है। वरिष्ठ कांग्रेसी नेता और मीरा कुमार के पिता बाबू जगजीवन राम 1952 से 1984 तक आठ बार सांसद रहे। लोग आज भी बाबूजगजीवन राम को शिद्दत के साथ याद करते हैं। इनकी राजनैतिक विरासत बेटी मीरा कुमार ने संभाली है। सासाराम संसदीय सीट से कांग्रेस की मीरा कुमार तीसरी बार तो मौजूदा सांसद छेदी पासवान चौथी बार जीत की लड़ाई लड़ रहे हैं। इस सीट से छेदी कभी हारे नहीं हैं। वर्ष 2019 के चुनाव में क्या होगा यह तो 23 मई की मतगणना के बाद ही पता चलेगा।

जिस दल का सांसद, उसी दल की सरकार

सासाराम सीट का एक बड़ा रोचक इतिहास यह रहा है कि यहां से अब तक जब जिस दल के सांसद चुने गए हैं, केंद्र में उसी दल की सरकार बनी है। इसलिए सासाराम सीट के संसदीय चुनाव का महत्व बढ़ जाता है, साथ ही इसके परिणाम पर देश के राजनीतिज्ञों की नजर रहती है।

सुरक्षित सीट में एससी वोटर निर्णायक

सासाराम संसदीय क्षेत्र में एससी मतदाता निर्णायक भूमिका में होते हैं। वैसे तो चुनाव के दौरान कैमूर की एससी की पासवान व रविदास उपजातियां एक साथ नहीं दिखती हैं। हालांकि यह बात पार्टी स्तर पर लागू नहीं होती। भभुआ में ब्राह्मण व कुर्मी बहुतायत में हैं तो करगहर में कुर्मी की संख्या ज्यादा है। चैनपुर में बिंद की आबादी भी काफी बतायी जाती है। सासाराम में कुशवाहा बिरादरी के वोटर ज्यादा बताए जाते हैं। मतदाताओं को अपने पक्ष में गोलबंद करने की तैयारी प्रत्याशी व पार्टी स्तर पर की जा रही है।

छेदी पासवान का सियासी सफर

  • 1985 में पहली बार छेदी पासवान चेनारी से विधायक चुने गए।
  • 1989 में पहली बार सासाराम सुरक्षित सीट से सांसद बने।
  • 1991 में दूसरी बार संसद में प्रतिनिधित्व करने का मौका मिला।
  • 2000 में चेनारी से दूसरी बार विधानसभा का सदस्य बने।
  • 2005 में मोहनियां विधानसभा क्षेत्र से पहली बार विधायक बने।
  • 2010 में दूसरी बार मोहनियां सीट से विधानसभा सदस्य चुने गए।

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