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लॉकडाउन के बीच मजदूरों का छलका दर्द, ट्रक में जानवरों की तरह भरकर लौट रहे अपने गांव

लॉकडाउन (Lockdown) के बीच मजदूरों पर आए संकट ने लोगों को जानवरों की तरह एक ट्रक में भरकर आने के लिए मजबूर कर दिया।

लॉकडाउन के बीच मजदूरों का छलका दर्द, ट्रक में जानवरों की तरह भरकर लौट रहे अपने गांव
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ट्रक में जानवरों की तरह भरकर लौट रहे अपने गांव

लॉकडाउन की सबसे ज्यादा किल्लत की मार गरीब मजदूरों को झेलना पड़ रहा है। इस बीच भूख की मार, पैदल की सवारी कर लौट रहे मजदूरों की कहानी एक दर्द बयां कर रही है कि आखिर सरकार के श्रमिक स्पेशल ट्रेन चलने के बाद भी हमें यूं पैदल नंगे पांव (Barefoot) अपने गांव लौटना पड़ रहा है।

आज पैदल सवारी कर एक लंबी दूरी सड़क को नापते हुए आगे चलते ही जा रहे हैं। सरकार के इस स्पेशल ट्रेन (Shramik Special Train) और भोजन मुहैया से न उन्हें राहत मिल रही हैं और न ही उनके भूखे पेट को। इसके चलते कई मजदूर भूखे पैदल सवारी के साथ अपने कंधों पर बच्चों को ढोते हुए निकल पड़े।

इसका कारण है कि कोरोना से पहले लॉकडाउन (Lockdown-3.0) में उन्हें जो असुविधा हो रही है वह उन्हें मार डालेगी। हर रोज मजदूरों से जुड़ी अलग-अलग तरह ही मार्मिक घटनाएं सामने आ रही है। इस बीच एक और घटना आई है।

एक ट्रक में 50 से अधिक मजदूर लौटने पर मजबूर

भागलपुर के अलिगंज स्थित बाइपास पर पानी पीने के लिए ट्रक रुके थे। जहां देखा गया कि एक ट्रक में करीब 50 से अधिक मजदूर भरे हुए हैं। ट्रक में सवार श्रमिक मोहम्मद रुकमान ने बताया कि वे सभी लोग मुंबई में काम करते थे। लॉकडाउन के चलते फैक्ट्रियां बंद हो गई।

इसलिए मजबूरन उन्हें घर वापस लौटना पड़ा। हमारे पास खाने की किल्लत हो गई थी। सारे पैसा खत्म हो चुके थे। सरकार की ओर से हमें एक रुपया भी मदद नहीं मिल रहा है। किसी तरह से घर से ब्याज पर पैसा मंगाया। बावजूद पैसे कम पड़ गए।

फिर हम सबने चंदा जुटाया। किसी तरह एक ट्रक ड्राइवर को 70,000 देकर बिहार चलने के लिए तैयार किया। हमारे पूरे परिवार का पेट हमारी कमाई से ही भरता है। हमारी कमाई बंद होने से वे लोगों को एक-एक रोटी के लिए सोचना पड़ रहा है।

उन्होनें कहा हम सब अभी जिस हालात में मुंबई से वापस लौटे हैं कि दुबारा अब कभी अपने गांव छोड़कर नहीं जाएंगे। हमलोग यहां मिट्टी भी ढोने को तैयार हैं। यहां रोजी-रोटी के लिए जो काम मिलेगा वह करेंगे, लेकिन दूसरे जगह काम करने नहीं जाएंगे।

Priyanka Kumari

Priyanka Kumari

Jr. Sub Editor


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