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950 करोड़ का चारा घोटाला: 9वीं बार सलाखों के पीछे लालू, जानें पूरा मामला

इस मामले में पूर्व मुख्यमंत्री जगन्नाथ मिश्र सहित छह लोगों को अदालत ने निर्दोष करार देते हुए रिहा कर दिया।

950 करोड़ का चारा घोटाला: 9वीं बार सलाखों के पीछे लालू, जानें पूरा मामला

सीबीआई की विशेष अदालत ने चारा घोटाले के एक मामले में बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव सहित 15 लोगों को दोषी करार दिया, जिनको तीन जनवरी को सजा सुनाई जाएगी।

इस मामले में सूबे के पूर्व मुख्यमंत्री जगन्नाथ मिश्र सहित छह लोगों को अदालत ने निर्दोष करार देते हुए रिहा कर दिया। दोषी ठहराए गए लालू समेत सभी 15 लोगों को हिरासत में लेकर बिरसा मुंडा जेल भेज दिया गया है। चारा घोटाला मामले में लालू 9वीं बार जेल जाएंगे।

चारा घोटाले के इस मामले में कुल 22 लोगों को आरोपी बनाया गया था। विशेष न्यायाधीश शिवपाल सिंह ने 950 करोड़ रुपए के चारा घोटाले से जुड़े देवघर कोषागार से 89 लाख, 27 हजार रुपए की अवैध निकासी के मुकदमे में यह फैसला सुनाया।

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यह मामला वर्ष 1990 से 1994 के बीच देवघर कोषागार से अवैध तरीके से रुपए की निकासी से संबंधित है। सीबीआई ने 27 अक्तूबर, 1997 को मुकदमा संख्या आरसी, 64 ए, 1996 दर्ज किया था और लगभग 21 वर्षों बाद इस मामले में फैसला सुनाया गया।

इस मामले में कुल 38 लोगों को आरोपी बनाया गया था। इनमें से 11 की मौत हो चुकी है, वहीं तीन सीबीआई के गवाह बन गए जबकि दो ने अपना गुनाह कुबूल कर लिया था जिसके बाद उन्हें 2006-07 में ही सजा सुना दी गई थी।

इसके बाद 22 आरोपी बच गए थे, जिनको लेकर शनिवार को फैसला सुनाया गया। इस मामले में तीन आईएएस अधिकारियों फूलचंद सिंह, बेक जूलियस एवं महेश प्रसाद को भी आरोपी बनाया गया था।

इससे पहले चाईबासा कोषागार से 37 करोड़, सत्तर लाख रुपए अवैध ढंग से निकासी करने के चारा घोटाले के एक अन्य मामले में इन सभी को सजा हो चुकी है।

लालू का कितने केस

900 करोड़ के चारा घोटाले में यह 33वां और लालू से जुड़ा दूसरा फैसला है। लालू पर चारा घोटाले के 7 केस दर्ज हैं। एक केस में उन्हें 6 साल की सजा हो चुकी है। लालू के खिलाफ 5 अन्य केस में सुनवाई जारी है।

आरजेडी सुप्रीमो पर आरोप

बिहार के तत्कालीन मुख्यमंत्री और वित्त मंत्री लालू प्रसाद पर आरोप था कि उन्होंने पद का दुरुपयोग करते हुए मामले की इंक्वायरी के लिए आई फाइल को 5 जुलाई 1994 से 1 फरवरी 96 तक अटकाए रखा। फिर 2 फरवरी 1996 को जांच का आदेश दिया, तब तक चारा घोटाले का मामला सामने आ चुका था।

चारा घोटाले के 34 आरोपी

चारा घोटाले में कुल 34 लोगों को आरोपी बनाया गया था। इनमें 11 लोगों की मौत हो चुकी है। एक आरोपी ने गुनाह कबूल कर खुद सरकारी गवाह बन गया।

ये हुए दोषमुक्त

अदालत ने पूर्व मुख्यमंत्री जगन्नाथ मिश्र के अलावा बिहार के पूर्व मंत्री विद्यासागर निषाद और पीएसी के तत्कालीन अध्यक्ष ध्रुव भगत, हार्दिक चंद्र चौधरी, सरस्वती चंद्र और साधना सिंह को दोषमुक्त करार कर दिया।

मीसा के खिलाफ आरोप पत्र

ईडी ने धन शोधन मामले में राजद प्रमुख लालू प्रसाद की बेटी मीसा भारती और उनके पति शैलेश कुमार के खिलाफ आरोपपत्र दाखिल किया। ईडी के वकील नीतेश राणा ने विशेष न्यायाधीश एन के मल्होत्रा की अदालत में आरोपपत्र दाखिल किया।

जांच एजेंसी ने भारती और उनके पति के खिलाफ धन शोधन मामले की जांच के संबंध में दिल्ली का एक फार्महाउस कुर्क कर लिया था।

परेशान कर सकते हो, पराजित नहीं

लालू प्रसाद ने ट्वीट् में लिखा, आप इस गुदड़ी के लाल को परेशान कर सकते हों, पराजित नहीं। झूठे जुमले बुनने वालों सच अपनी जिद पर खड़ा है। धर्मयुद्ध में लालू अकेला नहीं पूरा बिहार साथ खड़ा है। सच को झूठ बनाकर पेश किया जा सकता है, प्रोपेगंडा के तहत आधे झूठ को सच मान लिया गया। कभी ना कभी जीत सत्य की होगी। सच अपना सफर शुरू करे, उससे पहले झूठ आधी दुनिया घूम लेता है। लेकिन जीत उसी की होती है।

भाजपा सांसद को एक माह की जेल

चुनाव आचार संहिता उल्लंघन के आरोप में भारतीय जनता पार्टी के सांसद जगदंबिका पाल को एक महीने की सजा सुनाई गई है। सिद्धार्थनगर की स्थानीय अदालत ने उनके खिलाफ ये फैसला सुनाया।

जगदंबिका पाल को 2014 के लोकसभा चुनाव के दौरान आदर्श आचार संहिता के उल्लंघन का दोषी पाया गया, जिसके तहत कोर्ट ने उन्हें एक महीने के कारावास की सजा सुनाई।

हालांकि, सांसद को अदालत से तुरंत जमानत भी मिल गई। वरिष्ठ अभियोजन अधिकारी केशव पाण्डेय ने बताया कि तत्कालीन एसडीएम ने पाल के खिलाफ बंसी कोतवाली में आदर्श आचार संहिता के उल्लंघन का मामला दर्ज कराया था।

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