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महागठबंधन में जीतनराम मांझी ने अधिक सीटों के लिए बनाया दबाव

लोकसभा चुनाव के लिए एनडीए में सीटों का बंटवारा हो चुका है। लेकिन बिहार में महागठबंधन में सीटों को लेकर अभी तक कोई बंटवारा नहीं हुआ।

महागठबंधन में जीतनराम मांझी ने अधिक सीटों के लिए बनाया दबाव

लोकसभा चुनाव के लिए एनडीए में सीटों का बंटवारा हो चुका है। लेकिन बिहार में महागठबंधन में सीटों को लेकर अभी तक कोई बंटवारा नहीं हुआ।

हिन्दुस्तानी आवाम मोर्चा(हम) के सुप्रीमो और पूर्व मुख्यमंत्री जीनतराम मांझी ने सीटों के बंटवारे को लेकर पहले से ही दबाव बनाने की राजनीति शुरू कर दी है। ऐसे में महागठबंधन की नाव मांझी की वजह से डगमगाती दिख रही है।
जीतनराम मांझी महागठबंधन में तीन सीटों की मांग कर रहे हैं लेकिन उन्हें केवल एक सीट ही मिलती दिख रही है। जीतनराम मांझी सम्मान की तलाश में राजग से महागठबंधन में आए और अब महागठबंधन में खुद को फिट नहीं पा रहे हैं। मांझी का चुनाव लड़ना तय माना जा रहा है। महागठबंधन उन्हें गया और जमुई में से कोई भी सीट देने को तैयार है। मगर वह अपने अलावा दो और सीटों की मांग कर रहे हैं।
उनकी मांग है कि दो सीटें महाचंद्र प्रसाद सिंह और वृषिण पटेल के लिए दी जाए। पटेल वैशाली की सीट चाहते हैं मगर यह सीट राजद के खाते में जाती दिख रही है। यहां से रघुवंश प्रसाद सिंह चुनाव लड़ सकते हैं। इन दोनों की सीट पर पेंच फंसता दिख रहा है।

कुशवाहा और साहनी के आने से हुई सीट में कटौती
एनडीए से महागठबंधन में आए उपेंद्र कुशवाहा और मुकेश साहनी की पार्टी के आने से मांझी के कोटे की सीटों में कटौती पक्की है। इनके आने से पहले महाचंद्र सिंह का नाम मुंगेर के लिए चल रहा था। मगर अब यह सीट सीट रालोसपा के खाते में जा सकती है। महराजगंज सीट पर भी रालोसपा की नजर है। राजद में यह सीट पूर्व सांसद प्रभुनाथ सिंह के कोटे की है।
सजायाफ्ता होने के कारण प्रभुनाथ सिंह खुद नहीं लड़ सकते मगर माना जा रहा है कि उम्मीदवार का चयन उनकी मर्जी से ही होगा।
बहरहाल महागठबंधन इसलिए भी निश्चिंत नजर आ रहा है क्योंकि एनडीए में मांझी की एंट्री की कोई उम्मीद नहीं है। महागठबंधन के नेता सब कुछ ठीक होने का दावा कर किसी भी विवाद के होने से इंकार कर रहे हैं।
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