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बिहार में चमकी बुखार का कहर जारी, मरने वाले बच्चों की संख्या 50 के पार

बिहार में चमकी बुखार लगातार कहर बरपा रहा है। रोज होती बच्चों की मौत का आंकड़ा अब 50 के पार पहुंच चुका है। विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम लगातार इस बीमारी से लोगों को बचाने में लगी हुई है पर कामयाबी अभी तक हासिल नहीं हुई है। मासूमों का काल के गाल में समाने का क्रम जारी है।

बिहार में चमकी बुखार का कहर जारी, मरने वाले बच्चों की संख्या 50 के पार

बिहार में चमकी बुखार लगातार कहर बरपा रहा है। रोज होती बच्चों की मौत का आंकड़ा अब 50 के पार पहुंच चुका है। विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम लगातार इस बीमारी से लोगों को बचाने में लगी हुई है पर कामयाबी अभी तक हासिल नहीं हुई है। मासूमों का काल के गाल में समाने का क्रम जारी है।

बिहार के मुजफ्फरपुर और उसके आसपास के जिलों में भयंकर गर्मी और उमस से फैली इस बीमारी का सबसे ज्यादा शिकार बच्चे हो रहे हैं। एक्यूट इंसेफलाइटिस सिंड्रोम यानी चमकी बुखार की बीमारी से ग्रासित सौ से ज्यादा बच्चे अभी भी अस्पताल में भर्ती हैं।

बच्चों की लगातार होती मौत के बीच पटना मुख्यालय में उच्चस्तरीय बैठक हुई। स्वास्थ्य विभाग के निदेशक प्रमुख डॉ. आरडी रंजन, राज्य वेक्टर बॉर्न डिजीज कंट्रोल अधिकारी डॉ. एमपी शर्मा व राज्य जेई-एईएस के नोडल समन्वयक संजय कुमार ने एसकेएमसीएच पहुंच पूरी स्थिति का जायजा लिया।

मुजफ्फरपुर अस्पताल के पीआईसीयू के साथ स्वास्थ्य विभाग की टीम ने केजरीवाल अस्पताल का भी दौरा किया। जहां सिविल सर्जन डॉ. ने बताया कि बुधवार को 4 बच्चों की मौत इस बीमारी से हुई। विभाग ने अस्पताल को व्यवस्थित डाटा तैयार करने को कहा है।

मौसम में तल्खी और हवा में नमी की अधिकता के कारण होने वाले वाले इस बुखार को लेकर प्रदेश के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने इस बीमारी को लेकर चिन्ता जताई है। उन्होंने स्वास्थ्य विभाग को इस पर बारीकी से नजर रखने को कहा है। साथ ही खुद भी लगातार जानकारी ले रहे हैं।

मुजफ्फरपुर के डीएम आलोक रंजन घोष की माने तो अभी 109 मरीज इस बीमारी से ग्रासित हैं पीड़ित अधिकांश बच्चों में हाइपोग्लाइसीमिया यानी अचानक शुगर की कमी और कुछ बच्चों के शरीर में सोडियम (नमक) की मात्रा भी कम पाई जा रही है। जिन्हें बचाने के लिए डॉक्टरो की एक स्पेशल टीम लगाई गई है।

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