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इस बिहारी बाबू की मदद से चांद पर उतरेगा इसरो का मिशन चंद्रयान-2, जानें कैसे शौक बना काम

भारतीय अन्तरिक्ष अनुसन्धान संगठन (इसरो) का सबसे बड़ा मिशन चंद्रयान-2 के चांद पर उतरने में कुछ ही दिन बाकी बचे हैं। 7 सितंबर को लैंडर (विक्रम) से अलग होकर रोवर (प्रज्ञान) लैंड करेगा। लेकिन इसके पीछे बिहार की धरती पर जन्मे इसरो के वैज्ञानिक अमिताभ का नाम सबसे ऊपर लिया जा रहा है।

बिहार के इस साइंटिस्ट की मदद से चांद की सतह पर उतरेगा इसरो का मिशन चंद्रयान टू, जानें इनके बारे में
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bihar scientist amitabh helped chandrayaan 2 land on lunar

भारतीय अन्तरिक्ष अनुसन्धान संगठन (इसरो) का सबसे बड़ा मिशन चंद्रयान-2 (Chandrayaan 2)के चांद पर उतरने में कुछ ही दिन बाकी बचे हैं। 7 सितंबर को लैंडर (विक्रम) से अलग होकर रोवर (प्रज्ञान) लैंड करेगा। बिहारी की मदद से चांद पर चंद्रायन दो उतरेगा। बिहार की धरती पर जन्मे इसरो के वैज्ञानिक अमिताभ की मदद से इसरो अपना यह मिशन पूरा करेगा। उनके शोध के दम पर इसरो (Isro) को चांद पर चंद्रायन दो को उतारने में मदद मिलेगी।

अमिताभ बिहार(Bihar) के समस्ती के कुबौली गांव के रहने वाले हैं जो इसरो में चंद्रयान-2 मिशन के डिप्टी प्रोजेक्ट डायरेक्टर और ऑपरेशन डायरेक्टर हैं। बिहार के इस वैज्ञानिक का डंका पूरी दुनिया में बज रहा है। उन्हें बचपन से ही खेलने, घर पर बिगड़े सामान को ठीक करना का शौक था। अमिताभ ने बिहार के एएन कॉलेज से पढ़ाई की है।

एएन कॉलेज से एमएससी इन इलेक्ट्रॉनिक्स से पढ़ाई की है। उसके बाद बीआईटी मेसरा से एमटेक किया। उससे पहले उन्होंने 2008 में मिशन चंद्रयान 1 में एक प्रोजेक्ट मैनेजर के तौर पर जिम्मेदारी निभाई थी।

हिंदुस्तान न्यूज के मुताबिक, इसरो वैज्ञानिक अमिताभ ने कहा कि मैं बिहार में एमटेक के फाइनल ईयर में ही प्रोजेक्ट वर्क के लिए इसरो के तीन केंद्रों पर आवेदन दिया था। जिसके बाद उन्होंने मुझे जोधपुर बुलाया। साल 2002 में इसरो से जुड़े था। इसके बाद मुझे चंद्रयान-वन और अब चंद्रयान-टू मिशन की जिम्मेदारी दी गई।

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