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बिहार रेड लाइट एरिया : जहां फैला है सबसे बड़ा जिस्मफरोशी का धंधा

बिहार का जन्म चर्चा में रहने के लिए ही बना है। कभी वहां की सियासी उलटफेर के लिए तो कभी चमकी बुखार के लिए और कभी सबसे ज्यादा देह व्यापार के लिए राज्य चर्चा में रहता है। मुजफ्फरपुर जिले का चतुर्भुज एक ऐसी जगह है जिसका नाम जुबान पर आते ही आगे वाला बोल देता है कि जिस्मफरोसी की बात करने जा रहे हो? चतुर्भुज प्रदेश का सबसे बड़ा जिस्म बाजार का अड्डा है।

बिहार रेड लाइट एरिया : जहां फैला है सबसे बड़ा जिस्मफरोशी का धंधा
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Bihar Red Light Area

बिहार का जन्म चर्चा में रहने के लिए ही बना है। कभी वहां की सियासी उलटफेर के लिए तो कभी चमकी बुखार के लिए और कभी सबसे ज्यादा देह व्यापार के लिए राज्य चर्चा में रहता है। मुजफ्फरपुर जिले का चतुर्भुज एक ऐसी जगह है जिसका नाम जुबान पर आते ही आगे वाला बोल देता है कि जिस्मफरोसी की बात करने जा रहे हो? चतुर्भुज प्रदेश का सबसे बड़ा जिस्म बाजार का अड्डा है।

प्रदेश सरकार की तरफ से यहां के लोगों को नाचने-गाने का लाइसेंस प्राप्त है। पर उस लाइसेंस के पीछे का सच जिस्मफरोशी है। इसके पीछे तर्क कुतर्क की लंबी जंग चली है। पर किसी निष्कर्ष पर नहीं निकला जा सका। आज से करीब पचास साल पहले यहां काम करने वाली महिलाओं को शिवदासी कहा जाता था। पर जैसे-जैसे समय बदला वैसे-वैसे यहां की परिस्थिति बदल गई। आज यहां हजारों महिलाएं अपने देह को बेचकर पैसा कमा रही हैं। कोई 100 तो कोई हजारों कमा रहा है।


इस इलाके के बच्चों का भविष्य पैदा होते ही तय हो जाता है। अगर कोई बड़ा परिवर्तन नहीं होता तो 12-13 साल की लड़कियों को इस धन्धे में उतार दिया जाता है। मुहल्ले की एक 10 वर्षीय लड़की जोया ने बताया कि वह पढ़ लिखकर डॉक्टर बनना चाहती है

पर उसे उसकी मां जबरन इस धन्धे में उतारना चाहती हैं। इसी इलाके का एक लड़का कहता है कि जब कोई घर में आता है तो खून खौल जाता है पर मां कहती है कि धन्धा नहीं करुगी तो खिलाउंगी क्या। यही लाइन चुप करवा देती है।

पुलिस भी इस इलाके को लेकर विशेष मतलब नहीं रखती। स्थानीय लोग बताते हैं कि उन्हें समय से हफ्ता मिल जाता है इसलिए किसी तरह की कोई दिक्कत नहीं होती। यहां के इलाके की एक खासियत है कि यहां के ज्यादातर घरों के सामने बोर्ड टंगे हैं जिसमें लिखा होता है कि यहां लड़कियों को नाचने गाने की शिक्षा दी जाती है। दरअसल ये बोर्ड उन्हें थोड़ा सा सम्मान देता है। इसलिए वह हर दरवाजे पर टंगा रहता है।


मुजफ्फरपुर के चतुर्भुज में देह व्यापार क्षेत्रीय नहीं रह गया है इसे विदेशी व्यापार भी कह सकते हैं। क्योंकि यहां नेपाल की भी लड़कियां बड़ी संख्या में हैं। बाकी बंगाल, असम और उत्तर प्रदेश की भी लड़कियों को बहला फुसलाकर यहां लाया गया और धन्धे में डाल दिया गया। असुरक्षित सेक्स से यहा संक्रमण की भी शिकायते बराबर मिलती रहती हैं। एड्स के मामलों पर यहां कोई अचरज नहीं करता।

बिहार का सिर्फ मुजफ्फरपुर ही नहीं बल्कि कई और जिले भी जिस्मफरोसी के धन्धे में मशहूर हैं। इन धन्धों में आई आधी महिलाएं या तो धोखे से लाई गई हैं या फिर उन्हें मजबूरी में ऐसा करना पड़ रहा है। देह व्यापार का कारोबार अरबों रुपए का है। बड़े-बड़े लोग इसमें शामिल हैं, जो इस धन्धे से अप्रत्यक्ष रूप से बड़ा पैसा कमा रहे हैं। खैर सरकार का ऐक्शन इसपर हमेशा से कमजोर रहा है।

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