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चमकी बुखार से 109 बच्चों की मौत, 16 की हालत गंभीर, सीएम नीतीश कुमार बोले- प्रभावित इलाकों का हो अध्ययन

बिहार के मुजफ्फरपुर में 'चमकी' बुखार से मरने वाले बच्चों की संख्या 109 हो गई है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने मुजफ्फरपुर में अस्पताल का दौरा किया है। जहां उन्होंने पूरा हालात का जायजा लिया। वहीं लोगों ने सीएम के दौरे का खुलकर विरोध किया है।

Nitish Kumar Muzaffarpur
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Nitish Kumar Muzaffarpur

बिहार के मुजफ्फरपुर में 'चमकी' बुखार से मरने वाले बच्चों की संख्या 109 हो गई है। वहीं अभी भी 440 बच्चे इस बीमारी से पीड़ित हैं। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार मुजफ्फरपुर में एसकेएमसीएच अस्पताल पहुंचे। जहां उन्होंने पूरी स्थिति का दौरा किया। लेकिन वहीं बाहर बच्चों की मौत से गुस्साए लोगों ने सीएम का जमकर विरोध किया।

लाइव अपडेट (लाइव Update) -

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी ने आज पहले मुजफ्फरपुर में श्रीकृष्ण मेडिकल कॉलेज और अस्पताल (SKMCH) का दौरा किया। मुजफ्फरपुर में एक्यूट इंसेफेलाइटिस सिंड्रोम (एईएस) के कारण मरने वालों की संख्या बढ़कर 109 हो गई है।

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने निर्देश दिया है कि श्रीकृष्णा मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल में बेडो का बढ़ा का निर्देश दिया है। इस समय अस्पताल में 610 बेड हैं जिनकी संख्या अब बढ़कर 2500 की जाएगी। पहले फेज में 1500 बेड की तत्काल व्यवस्था की जानी चाहिए। उन्होंने आगे कहा कि रिश्तेदारों और परिवारों के लिए एक 'धर्मशाला' भी बनाई जाएगी।

बिहार के सीएम नीतीश कुमार ने मुजफ्फरपुर के श्रीकृष्ण मेडिकल कॉलेज और अस्पताल का दौरा करने के बाद कहा कि प्रभावित क्षेत्रों के वातावरण का अध्ययन और एक विश्लेषण भी किया जाना चाहिए।

बिहार के मुजफ्फरपुर में चमकी बुखार से 108 बच्चों की मौत हो गई है तो वहीं 16 बच्चे गंभीर बताए जा रहे हैं जिनका ईलाज किया जा रहा है।

बिहार में चमकी बुखार को लेकर झारखंड में भी हाई अलर्ट जारी कर दिया है।

बिहार के मुख्य सचिव दीपक कुमार ने कहा कि सीएम ने कुछ निर्देश दिए है। उन्होंने कहा कि मौतों का मुख्य कारण यह है कि मरीज देर से अस्पतालों में पहुंचते हैं। यह दोहराया गया है कि मरीजों को अस्पतालों में आने के लिए कोई खर्च नहीं उठाना पड़ेगा। उनका किराया प्रतिपूर्ति किया जाएगा, उन्हें फ्लैट दर पर 400 रुपये दिए जाएंगे।


आगे कहा कि एसकेएमसीएच को 2500 बेड के अस्पताल में परिवर्तित किया जाएगा, वर्तमान में इसमें 610 बेड हैं। अगले 1 साल में, इसे 1500 बेड और 2500 बाद में लिया जाएगा। 100-बेड वाला आईसीयू बनाया जाएगा, इसमें 50-बेड होंगे। रिश्तेदारों और परिवारों के लिए 'धर्मशाला' का निर्माण किया जाएगा।

ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) के सांसद असदुद्दीन ओवैसी द्वारा 17वीं लोकसभा के सदस्य के रूप में शपथ लिए जाने के दौरान 'जय श्री राम' तथा 'वन्दे मातरम्' के नारे लगाए जाने पर ओवैसी ने कहा कि यह अच्छी बात है कि उन्हें मुझे देखकर ऐसी बातें याद आती हैं। मैं उम्मीद करता हूं कि उन्हें संविधान और मुज़फ़्फ़रपुर में हुई बच्चों की मौतें भी याद आएंगी।

बिहार में एईएस के प्रकोप पर स्वास्थ्य मंत्री डॉ. हर्षवर्धन कहते हैं कि मैं यहां एक संवाददाता सम्मेलन को संबोधित नहीं कर रहा हूं। मुझे जो भी कहना चाहा है मैंने कहा है। हम अपना सर्वश्रेष्ठ कर रहे हैं। हम एक-एक पल की निगरानी कर रहे हैं।

बिहार में एईएस (Encephalitis Syndrome) के प्रकोप पर केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉ. हर्षवर्धन ने कहा कि हमनें राज्य सरकार को हर संभव मदद का वादा किया है। हम हर घंटे स्थिति की निगरानी कर रहे हैं।

जेडीयू सांसद दिनेश चंद्र यादव ने मुजफ्फरपुर घटना को दुर्भाग्यपूर्ण बताया है। उन्होंने कहा कि कई सालों से जब भी गर्मी का मौसम आता है, बच्चे बीमार पड़ जाते हैं और मौतों की संख्या बढ़ जाती है। ऐसा होता है, सरकार भी व्यवस्था करती है। बारिश शुरू होते ही यह बंद हो जाएगा।

एईएस की बैठक में क्रिकेट स्कोर के बारे में पूछने पर जेडीयू सांसद डीसी यादव ने कहा कि भारत-पाक मैचों के दौरान, लोगों के दिल में राष्ट्रवाद है, वे चाहते हैं कि भारत जीत जाए। उन्होंने बैठक में सब कुछ गंभीरता से किया और बी/डब्ल्यू में स्कोर के लिए कहा, विपक्ष के आरोप सच नहीं हैं।


मुजफ्फरपुर एसकेएमसीएच के एमएस के एसके शाही ने कहा कि सीएम ने मरीजों और उनके रिश्तेदारों से मुलाकात की। वह वर्तमान में दिए जा रहे चिकित्सा उपचार से संतुष्ट थे और उन्होंने हमें रोजाना दोपहर 3 बजे बुलेटिन जारी करने का आदेश दिया। वह इस तथ्य से पीड़ित था कि उपचार की पर्याप्त सुविधाएं यहां उपलब्ध नहीं थीं।

चमकी बुखार से मरने वाले बच्चों की मौत पर मुजफ्फरपुर से सांसद अजय निषाद ने कहा कि अति पिछड़ा समाज के लोगों का रहन सहन नीचे है। उन्होंने कहा कि 4 जी से बच्चों की मौत हुई है। गांव, गर्मी, गरीबी और गंदगी से चमकी बुखार का प्रकोप है।

मुजफ्फरपुर के अस्पताल का दौरा करने के बाद दोपहर 2 बजे मुख्यमंत्री नीतीश कुमार प्रेस कॉन्फ्रेंस करेंगे।

बिहार के मंत्री सुरेश शर्मा ने दावा किया है कि अब तक लगभग 200 बच्चों का इलाज किया गया है और उन्हें अस्पतालों से छुट्टी दे दी गई है औरएक्यूट इन्सेफेलाइटिस सिंड्रोम (एईएस) मामले पर लगातार बैठक की जा रही है।

बच्चों की मौत के बाद परिजनों का विरोध प्रदर्शन शुरू हो गया है। सीएम वापस जाओ के नारे लगाए जा रहे हैं।

सीएम नीतीश कुमार ने एसकेएमसीएच अस्पताल का दौरान किया।

चमकी बुखार से अबतक 108 बच्चों की मौत हो चुकी है। मौत का आंकड़ा लगातर बढ़ रहा है।

बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार मुजफ्फरपुर के एसकेएमसीएच अस्पताल पहुंचे हैं। जहां एक्यूट इंसेफेलाइटिस सिंड्रोम (एईएस) से 89 बच्चों की मौत हो चुकी है।

चमकी बुखार से मरने वालों की संख्या बढ़ रही

चमकी बुखार (एक्यूट इंसेफेलाइटिस सिंड्रोम) से मरने वाले बच्चों की संख्या लगातार बढ़ रही है। बीते सोमवार तक 100 बच्चों की मौत हो चुकी थी। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉ. हर्षवर्धन ने बीते दिनों मुजफ्फरपुर का दौरा किया था।

जहां उनके सामने एक 5 साल की बच्ची ने दमतोड़ दिया। वहीं बिहार के स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडेय भी लगातार अस्पतालों का दौरा कर रहे हैं। लेकिन मौतों पर लगाम लगाने पर हर कोई चुप है।

दो मंत्रियों के खिलाफ मामला दर्ज

जानकारी के लिए बता दें कि मुजफ्फरपुर सीजेएम अदालत में केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉ. हर्षवर्धन और बिहार के स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडेय के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है। सामाजिक कार्यकर्ता तमन्ना हाशमी ने दोनों नेताओं के खिलाफ यह कार्रवाई की है।

बिहार मुख्य सचिव का बयान

बिहार के मुख्य सचिव दीपक कुमार ने बताया कि मुख्यमंत्री ने स्वास्थ्य मंत्री सहित अन्य विभागीय अधिकारियों के साथ इस बात की समीक्षा की कि मुजफ्फरपुर में एईएस के मामले कम हो रहे हैं कि नहीं।

उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री ने एईएस से बीमार बच्चों को ले जाने वाले एंबुलेंस के भाडे़ के भुगतान, निजी अस्पतालों में भर्ती बच्चों का इलाज सरकारी खर्च पर कराने तथा बच्चे की मौत होने पर मुख्यमंत्री सहायता कोष से अभिभावक को चार लाख रुपए दिए जाने का निर्णय किया, जिसे लागू किया जाना प्रारंभ हो चुका है।

दीपक कुमार ने बताया कि पिछले साल से अधिक बच्चों के इस बीमारी से ग्रसित होने और उनकी मौत के कारणों के बारे पता लगाया जा रहा है, पर मानसून के पूर्व बारिश नहीं होना इसका एक कारण हो सकता है। उन्होंने बताया कि पिछले साल इस रोग से ग्रसित अस्पतालों में भर्ती बच्चों में से मृत बच्चों की तुलना में इस वर्ष 26 प्रतिशत कम बच्चों की मौत हुई है, लेकिन पूरे तंत्र के मुस्तैद होने के बाद भी 100 से अधिक बच्चों की मौत दुर्भाग्यपूर्ण है।

मुख्य सचिव ने कहा कि मुख्यमंत्री ने यह भी निर्णय लिया कि जिन बच्चों की इस रोग से मौत हुई है, उनके सामाजिक एवं आर्थिक पृष्ठभूमि की जानकारी हासिल करने के लिए उनके घरों में कल से सरकारी महकमे की एक टीम जाएगी जो यह पता लगाएगी कि बच्चे की मौत कहीं कुपोषण या किसी अन्य कारण से तो नहीं हुई।

मुजफ्फरपुर के सिविल सर्जन डॉ. शैलेश प्रसाद ने बताया कि सोमवार की देर शाम मस्तिष्क ज्वर सहित अन्य अज्ञात बीमारी से मरने वाले बच्चों की संख्या बढ़कर 103 हो गयी जबकि जनवरी से अब तक कुल 440 बच्चे इस बीमारी की चपेट में आए हैं।

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