Hari bhoomi hindi news chhattisgarh

अलविदा 2018: भारत ने विज्ञान और तकनीक में रचा इतिहास, जानें 10 उपलब्धियां

यह विज्ञान-तकनीक का युग है। हर रोज कोई नई तकनीक हमारे सामने आ रही है। ऐसे में यह जानना दिलचस्प होगा कि बीत रहा वर्ष 2018 हमारे देश के लिए इस क्षेत्र में किस तरह की उपलब्धियों भरा रहा।

अलविदा 2018: भारत ने विज्ञान और तकनीक में रचा इतिहास, जानें 10 उपलब्धियां
X

यह विज्ञान-तकनीक का युग है। हर रोज कोई नई तकनीक हमारे सामने आ रही है। ऐसे में यह जानना दिलचस्प होगा कि बीत रहा वर्ष 2018 (Year Ender 2018) हमारे देश के लिए इस क्षेत्र में किस तरह की उपलब्धियों भरा रहा। यहां हम बता रहे हैं कि इस वर्ष हमने किन नए क्षेत्रों में अपने कदम आगे बढ़ाए और कौन-सी नई ऊंचाइयों को छूने का प्रयास किया। इस साल देश ने तकनीक और विज्ञान के क्षेत्र में आशातीत सफलताएं अर्जित कीं। इस साल कई उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल हुईं,जिसने देशवासियों को गर्व करने का अवसर प्रदान किया। सरकार को विज्ञान विरोधी बताने वाले भी इस बात की तारीफ करेंगे कि देश में नवाचार बढ़ाने के मकसद से केंद्र ने इनोवेशन, एप्लीकेशन और रिसर्च के क्षेत्र में 25 हब बनाने का फैसला इसी साल और इसी सरकार ने किया है। सरकार ने इस मद में करीब 3700 करोड़ रुपए खर्च करने का ऐलान भी किया। यह अलग बात है कि शोधपत्रों और नए शोध के मामले में हम इस साल फिर वैश्विक स्तर पर पिछड़े ही साबित हुए,उसके बावजूद हमने कुछ कीर्तिमान भी बनाए।

इसरो ने हासिल की नई ऊंचाई

यह साल बीतने से पहले हमने मानवयुक्त अंतरिक्षयान को प्रक्षेपित करने का खाका तैयार कर लिया। जीएसएलवी मार्क–3 प्रक्षेपण यान के जरिए तीन अंतरिक्ष यात्रियों को अंतरिक्ष में भेजा जाएगा इस बात की इसरो ने पुष्टि कर दी। गगनयान मिशन की सफलता से भारत मानव को अंतरिक्ष में पहुंचाने वाला चौथा देश बन जाएगा।

यह खुशखबरी हमें इसी साल मिली। 10 हजार करोड़ रुपए से भी कम की लागत में हम मानवयुक्त अंतरिक्ष यान भेजेंगे। अगले साल की शुरुआत में चंद्रयान-2 भेजने की तैयारी इस साल लगभग पूरी हो गई। भारत का सबसे भारी सैटेलाइट जीसैट–11 इसी साल सफलता पूर्वक लांच हुआ। इसका वजन 5,854 किलोग्राम है। सैटेलाइट इतना बड़ा है कि इसका हर सोलर पैनल चार मीटर से ज्यादा लंबा है,जो एक सेडान कार के बराबर है।

जीसैट–11 में केयू–बैंड और केए–बैंड फ्रीक्वेंसी में 40 ट्रांसपोंडर होंगे, जो 14 गीगाबाइट/सेकेंड तक की डेटा ट्रांसफर स्पीड के साथ हाई बैंडविथ कनेक्टिविटी दे सकते हैं। इस वजह से अब दूर-दराज के इलाके में बिन फाइबर ऑप्टिक्स के इंटरनेट पहुंचेगा।

आसमान में या कहें अंतरिक्ष में इसरो ने इस बरस जो झंडे गाड़े हैं उनकी फेहरिस्त काफी लंबी है। दस साल पहले भारत की ओर से भेजे गए चंद्रयान–1 के आंकड़ों के आधार पर इस साल पता चला कि चांद पर बर्फ मौजूद है।

नासा के वैज्ञानिकों ने चंद्रयान–1 अंतरिक्षयान के आंकड़ों के आधार पर चंद्रमा के ध्रुवीय क्षेत्रों के सबसे अंधेरे और ठंडे स्थानों पर जल के जमे हुए स्वरूप में उपस्थित होने की पुष्टि की है।

Happy New Year 2019 / अब ग्राहकों की नजर होगी महंगे स्मार्टफोन पर, जानें सब कुछ

रक्षा-विमान क्षेत्र की उपलब्धियां

हमने इसी वर्ष प्रतिरक्षा मिसाइल का सफल प्रक्षेपण किया और इसके साथ ही भारत ने कम और अधिक उंचाई से लक्ष्य भेदने में सक्षम द्विस्तरीय बैलिस्टिक मिसाइल रक्षा प्रणाली विकसित करने में बड़ी उपलब्धि हासिल कर ली।

मिसाइल ने राडार से आ रहे आंकड़ों का कंप्यूटर नेटवर्क से सटीक विश्लेषण किया और आने वाली मिसाइल को निशाना बनाकर मार गिराया। डीआरडीओ ने भी इसरो की तरह कई ऊंचे मुकाम हासिल किए।

इसी साल यह संभव हो सका कि भारत, अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया के साथ उन चुनिंदा देशों में शामिल हो गया, जो बायोफ्यूल से विमान उड़ाने में सफलता हासिल कर चुके हैं।

स्पाइस जेट के एक कमर्शियल विमान ने देहरादून से दिल्ली के बीच भारतीय पेट्रोलियम संस्थान द्वारा तैयार जैट्रोफा पौधे के बीज से बने ईंधन से उड़ान भरी। इससे विमान कंपनियों को प्रत्येक उड़ान में परंपरागत विमान ईंधन पर निर्भरता में करीब 50 प्रतिशत की कमी होगी तो लोगों को किराए में कमी का लाभ मिल सकेगा।

ड्रोन के लिए खुला आसमान

भारतीय परिदृश्य में ड्रोन कृषि, सेवा, मनोरंजन जैसे तमाम क्षेत्रों में अपनी महती भूमिका निभा सकता है, पर अभी इसके व्यापक प्रयोग की अनुमति नहीं थी। अब ड्रोन उड़ाने को लेकर एक नियमावली इस साल 1 दिसंबर से रेगुलेशन प्रभावी हो गई।

पूरी प्रणाली डिजिटल होगी, जिसमें डिजिटल स्काई प्लेटफॉर्म की सहायता से ड्रोन सेवा प्रदाता कंपनी अपनी जानकारियां दर्ज करेंगी।

ड्रोन उपयोगकर्ता मोबाइल एप के जरिए अनुमति लेगा तो तत्काल उसे अनुमति मिलने की जानकारी मिल जाएगी। डिजिटल अनुमति के बिना कोई ड्रोन आसमान में नहीं उड़ेगा। नए दिशा-निर्देशों से ड्रोन के लिए भारत का आसमान खुलेगा और कई नई तकनीक को विकास का अवसर मिलेगा।

बनाया पावरफुल रेल इंजन

आसमान में ही नहीं तकनीकी के मामले में हमने जमीन पर भी इस साल कुछ बेहतर काम किया। रेल मंत्रालय के अधीनस्थ चितरंजन लोकोमोटिव वर्क्स ने एक ऐसा रेल इंजन बनाया है, जो 200 किलोमीटर प्रतिघंटे की रफ्तार से रेलगाड़ी को खींच सकता है।

वैप–5 नाम के इस इंजन को खास एयरो–डायनामिक डिजाइन के साथ तैयार किया गया है। इस इंजन को गतिमान, शताब्दी एक्सप्रेस में जल्द इस्तेमाल किया जाएगा।

रोबोटिक्स में पाई नई पहचान

तकनीक के कमाल ने ही हमें इस साल रिन्यूएबल एनर्जी के मामले में दुनिया का दूसरा सबसे महत्वपूर्ण देश बनाया। लगभग 80 मानदंडों या इंडीकेटर्स पर परखने के बाद यह पाया गया। दुनिया भर में रोबोट का बोल-बाला है।

इस साल हमारा देश संसार भर में रोबोटिक्स के क्षेत्र में चौथे स्थान तक पहुंच गया। उधर भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान मुंबई में आयोजित तीन दिवसीय टेकफेस्ट में इस साल सोफिया भी आई।

वह दुनिया की पहली ऐसी रोबोट है, जो न केवल मनुष्यों की तरह दिखती है बल्कि सवालों का जवाब भी देती है। इसे सऊदी अरब अपनी नागरिकता भी दे चुका है। सोफिया को यहां भारतीय परिधान साड़ी में प्रस्तुत किया गया।

अन्य उपलब्धियां

भविष्य में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस हर एक्टिविटी को प्रभावित करेगी। आम जीवन की तरह यह भविष्य में युद्ध को भी प्रभावित करेगी। सो रूस, चीन और अमेरिका के बाद भारत ने अपनी सामरिक क्षमता को बढ़ाने के लिए सुरक्षा बलों में कृत्रिम बुद्धिमत्ता को शामिल करने का फैसला इसी साल लिया।

देश के 21 राज्यों की 13 करोड़ से भी अधिक आबादी आर्सेनिक से दूषित पानी पीने को मजबूर है, लोगों को इस साल इस समस्या को दूर करने में आईआईटी के वैज्ञानिकों ने बड़ा काम किया।

उन्होंने नैनोटेक्नोलॉ‚जी पर आधारित फिल्टर बनाया है, जो महज 3 पैसे के खर्च में एक लीटर पानी को साफ कर सकता है। इस साल देश में ऑ‚प्टिकल फाइबर से जुड़े गांवों की संख्या एक लाख पहुंच गई।

जिस भारतीय वैज्ञानिक ने दुनिया को यह बताया था कि पेड़–पौधों में भी जान होती है, उनकी तस्वीर अब ब्रिटिश मुद्रा पर छप सकती है। भारतीय विज्ञान क्षेत्र के लिए यह बहुत गर्व की बात है कि बैंक ऑफ इंग्लैंड ने इस साल घोषणा की है कि उनसे 50 पाउंड के नोट पर जगदीश चंद्र बोस की तस्वीर छापने की सिफारिश की गई है।

50 पाउंड के करीब 3.3 करोड़ नोट वहां चलन में हैं। हालांकि अभी तक यह प्रस्ताव ही है मगर संभव है कि साल के आखिर तक इस पर फैसला हो जाए। अगर यह अवसर नहीं भी आता है तो भी भारतीय ज्ञान-विज्ञान के लिए इस नाम का चयन भी महत्वपूर्ण है।

कुल मिलाकर बीत रहा साल विज्ञान-तकनीक के क्षेत्र में देश के लिए बेहतरीन उपलब्धियों भरा रहा और आने वाले वर्ष में इसमें और भी इजाफा होगा, इसमें संदेह नहीं।

नए साल में नया किलोग्राम

अगले साल किलोग्राम की परिभाषा बदल जाएगी। नए किलोग्राम से मुलाकात मई 2019 तक होने की उम्मीद है। इस साल फ्रांस के वर्साइल्स में ‘वेट एंड मेजर्स’ पर एक बड़ा सम्मलेन आयोजित किया गया था, जिसमें कई वैज्ञानिकों ने हिस्सा लिया।

ज्यादातर वैज्ञानिकों का पक्ष था कि किलोग्राम को यांत्रिक और विद्युत चुंबकीय ऊर्जा के आधार पर परिभाषित किया जाए। राय मान ली गई। हालांकि जो बदलाव हुआ है, वो लोगों के दैनिक जीवन को बहुत प्रभावित नहीं करेगा।

Happy New Year 2019 / Realme ऑफलाइन सेल 150 शहरों में करेगा शुरू, जुड़ेंगे 20,000 पर्टनर्स

लेकिन कुछ उद्योगों जैसे मेडिकल और विज्ञान शोध में इसका व्यावहारिक प्रयोग होने की उम्मीद है क्योंकि यहां सटीक माप होने की आवश्यकता होती है।

और पढ़े: Haryana News | Chhattisgarh News | MP News | Aaj Ka Rashifal | Jokes | Haryana Video News | Haryana News App

Next Story