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थोक मुद्रास्फीति की दर: आम आदमी पर महंगाई की मार, खुदरा के बाद अब थोक महंगाई बढ़ी

थोक मुद्रास्फीति की दर: खुदरा महंगाई के बाद थोक महंगाई दर में इजाफा हुआ है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार जनवरी 2020 में थोक मूल्य सूचकांक आधारित मुद्रास्फीति 3.1 फीसदी पर पहुंच गई है।

थोक मुद्रास्फीति की दर: आम आदमी पर महंगाई की मार, खुदरा के बाद अब थोक महंगाई बढ़ीथोक मुद्रास्फीति की दर: आम आदमी पर महंगाई की मार, खुदरा के बाद अब थोक महंगाई बढ़ी

थोक मुद्रास्फीति की दर: गरीब-अमीर, कर्मचारी-पेंशनर, मजदूर-उद्यमी और केंद्रीय बैंक-सरकार, हर कोई थोक महंगाई दर से प्रभावित होता है। इसका असर किसी पर कम, किसी पर ज्यादा, लेकिन जो आर्थिक रूप से कमजोर होता है, उस पर सबसे ज्यादा पड़ता है। थोक महंगाई दर में जनवरी महीने में तेजी रही है। जनवरी माह की बात करें तो थोक महंगाई दर बढ़कर 3.1 फीसदी पर पहुंच गई है। थोक महंगाई दर दिसंबर माह में 2.59 फीसदी थी। थोक महंगाई दर बढ़ने से महंगाई और बढ़ सकती है।

आंकड़ों के अनुसार, बीते महीने मैन्युफैक्चर्ड प्रोडक्ट्स की महंगाई में तेजी दर्ज की गई है। वहीं, थोक खाद्य महंगाई दर कम रही है। इससे पहले साल 2019 के अक्टूबर, नवंबर और दिसंबर महीने में भी थोक महंगाई में बढ़ोत्तरी हुई थी। जनवरी 2019 में यह 2.76 फीसदी पर थी।


लगातार तीन महीनों से हो रहा है इजाफा

थोक महंगाई दर के पिछले आंकडों पर जाए तो नवंबर में यह 0.58 फीसदी पर थी। अक्तूबर में यह 0.16 फीसदी थी, सितंबर में 0.33 फीसदी और अगस्त में यह 1.17 फीसदी थी। इसमे लगातार 3 महीने से इजाफा हो रहा है। इस दौरान गैर-खाद्य वस्तुओं की कीमतों में बढ़ोतरी दिसंबर के 2.32 फीसदी से लगभग तीन गुना बढ़कर 7.8 फीसदी हो गई। खाद्य वस्तुओं में सब्जियों की कीमतें 52.72 फीसदी बढ़ीं, जिसमें सबसे अधिक योगदान प्याज का रहा। इस दौरान प्याज की कीमतों में 293 फीसदी बढ़ोतरी हुई। आलू की कीमतों में 37.34 फीसदी इजाफा हुआ।

7.59 फीसदी पर पहुंची खुदरा महंगाई दर

खुदरा मुद्रास्फीति की बात करें, तो खाने-पीने का सामान महंगा होने से जनवरी में खुदरा मुद्रास्फीति बढ़कर 7.59 फीसदी पर पहुंच गयी। दिसंबर 2019 में 7.35 फीसदी रही थी। वहीं पिछले साल जनवरी महीने की बात करें तो यह 1.97 फीसदी रही थी। खुदरा मुद्रास्फीति में यदि खाद्य मुद्रास्फीति की बात की जाए तो जनवरी 2020 में यह 13.63 फीसदी रही जबकि एक साल पहले जनवरी 2019 में इसमें 2.24 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई थी। यह दिसंबर 2019 के 14.19 फीसदी के मुकाबले कम हुई है। रिजर्व बैंक ने इस महीने मौद्रिक नीति समीक्षा में ऊंची मुद्रास्फीति का हवाला देते हुए प्रमुख नीतिगत दर में कोई बदलाव नहीं किया था।

क्या होती है खुदरा मुद्रास्फीति

एक निश्चित अवधि में चुनिंदा वस्तुओं या सेवाओं के मूल्य में जो वृद्धि या गिरावट आती है, उसे मुद्रास्फीति कहते हैं। इसे जब प्रतिशत में व्यक्त करते हैं तो यह महंगाई दर कहलाती है। सरल शब्दों में कहें तो यह कीमतों में उतार-चढ़ाव की रफ्तार को दर्शाती है। यही वजह है कि कई बार थोक या खुदरा महंगाई की दर धीमी होने पर भी बाजार में कीमतों में गिरावट नहीं आती।

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