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Subhash Chandra Bose Birth Anniversary: नेताजी को कारों से था खास लगाव, आजादी के सफर में मिला था साथ

तुम मुझे खुन दो, मैं तुम्हें आजादी दुंगा का यह नारा देने वाले स्वतंत्रता सैनानी नेताजी सुभाष चंद्र बोस (Subhas Chandra Bose) का आज 122 वां जन्मदिन (Subhas Chandra Bose Birthday) हैं।

Subhash Chandra Bose Birth Anniversary: नेताजी को कारों से था खास लगाव, आजादी के सफर में मिला था साथ
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तुम मुझे खुन दो, मैं तुम्हें आजादी दुंगा यह नारा देने वाले स्वतंत्रता सैनानी नेताजी सुभाष चंद्र बोस (Subhash Chandra Bose) का आज जन्मदिन (Subhash Chandra Bose) हैं।

नेताजी सुभाष चंद्र बोस (Subhash Chandra Bose) आजाद हिंद फौज के संस्थापक थे और उन्होंने आजादी की लड़ाई में अपना अहम योगदान दिया था। नेताजी सुभाष चंद्र बोस (Subhash Chandra Bose) का जन्म 23 जनवरी 1897 में हुआ था।

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नेताजी सुभाष चंद्र बोस (Subhash Chandra Bose) के बारे में कुछ ऐसी बाते हैं, जो कि बहुत कम लोग जानते है। देश के सभी नागरिको को यह जानकारी हैं कि नेताजी सुभाष चंद्र बोस (Subhash Chandra Bose) का पहला प्यार देश की आजादी था और दूसरा प्यार उनको अपनी कार से था।

कई बार नेताजी सुभाष चंद्र बोस (Subhash Chandra Bose) की जान इस कार ने कई बार बचाई हैं। आइए जानते हैं नेताजी सुभाष चंद्र बोस (Subhas Chandra Bose) की खास कार के बारे में.....

नेताजी सुभाष चंद्र बोस (Subhas Chandra Bose) की पसंदीदा कार

नेताजी सुभाष चंद्र बोस (Subhash Chandra Bose) पर रिसर्च करने वाले लोगों ने कहा हैं कि नेताजी के पास वैसे तो बहुत सी कार थी। लेकिन नेताजी सुभाष चंद्र बोस (Subhash Chandra Bose) के पास वांडरर छोटी और सस्ती कार थी और इस कार को आमतौर पर मध्य वर्ग के लोग ही रखते थे।

नेताजी सुभाष चंद्र बोस (Subhash Chandra Bose) के भवन में रखी वांडरर कार ज्यादा उपयोग नहीं होता था, जिसकी वजह से लोगों का इस कार पर ध्यान नहीं गया था।

तेज बुद्धि के मालिक नेताजी सुभाष चंद्र बोस (Subhash Chandra Bose) इस कार का इसलिए इस्तेमाल करते थे, जिससे वे ब्रिटिश पुलिस की आंख में धूल झोक सके और ना नजर में आ सके।

नेताजी सुभाष चंद्र बोस (Subhash Chandra Bose) शिशिर के साथ इस कार में बैठकर गोमो रेलवे स्टेशन पहुंचे थे और वहां से कालका एक्सप्रेस पकड़ कर दिल्ली गए थे।

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बता दें कि नेताजी सुभाष चंद्र बोस (Subhas Chandra Bose) की मौता की गुत्थी अब तक नहीं सुलझी हैं। नेताजी 18 अगस्त 1945 को हवाई जहाज से मंचुरिया गए थे, इस सफर के दौरान ताइहोकू में नेताजी सुभाष चंद्र बोस का जहाज दुर्घटनाग्रास्त हो गया था।

नेताजी सुभाष चंद्र बोस की मौत (Subhash Chandra Bose Death) देश के इतिहास में सबसे बड़ी रहस्य बनी हुई हैं, जो कि अब तक नहीं सुलझी हैं।

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