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स्मार्टफोन पर बिताते है सबसे ज्यादा समय, तो हो जाए सतर्क, हो सकता है कैंसर

आज के समय में ज्यादातर लोग स्मार्टफोन्स को इस्तेमाल करते है, साथ ही अपना सारा काम इन डिवाइस पर करते है। वहीं ये स्मार्टफोन्स भी लोगों की लाइफ का एक अहम हिस्सा बन चुका है।

स्मार्टफोन पर बिताते है सबसे ज्यादा समय, तो हो जाए सतर्क, हो सकता है कैंसर
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आज के समय में ज्यादातर लोग स्मार्टफोन्स को इस्तेमाल करते है, साथ ही अपना सारा काम इन डिवाइस पर करते है। वहीं ये स्मार्टफोन्स भी लोगों की लाइफ का एक अहम हिस्सा बन चुका है।

लेकिन हाल ही के दिनों में एक रिपोर्ट सामने आई है, जिसमें 2 जी और 3 जी स्मार्टफोन इस्तेमाल करने वालो पर रेडियो फ्रीक्वेंसी रेडिएशन का खतरा बना हुआ है। इसकी वजह से लोगों को दिमाग और एंड्रिनल ग्लैंड में कैंसर हो सकता है।

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रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका के नेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ हेल्थ के नेशनल टॉक्सिलॉजी प्रोग्राम में यह रिपोर्ट पेश की गई थी, जिसमें कहा हैं कि फोन से निकलने वाले हाई लेवल के रेडियो फ्रीक्वेंसी यूजर्स की पूरी बॉडी में ट्रेवल करता हैं और साथ ही यह रिसर्च मेल और फीमेल चूहों पर भी किया गया हैं।

लेकिन NTP के रिसर्चर जॉन बकर ने कहा हैं कि रिसर्च में उपयोग किए गए अनावरण को हम सीधे उन इंसानों से तुलना नहीं कर सकते है। इसके साथ ही यह रिसर्च कई जानवारों पर की गई है।

रिसर्च के लिए RFR ने चूहों के पेट का उपयोग किया है, वहीं दूसरी तरफ यह रिसर्च उन चूहों पर भी की गई हैं, जिनकी उम्र 5 से लेकर 6 हफ्ते तक थी। लेकिन RFR इसकी सच्चाई के लिए हर 10 मिनट में किया है, जिसें एक दिन में कुल 9 घंटे तक उपयोग किया गया है।

रिसर्चसर ने कहा हैं कि जो रेडियो फ्रीक्वेंसी रेडिएशन हमने मेल चूहे में देखें वे असली थे, इसके साथ ही आखिरकार खुलासा भी हो गया हैं कि जिन चूहों पर रेडिएशन का उपयोग किया गया हैं उनकी उम्र बढ़ गई हैं।

लेकिन इस खुलासे में यह भी जानकारी दी है कि ये इंसानों में अलग से हो सकता है, तो वहीं इसका असर भी देखने को मिल सकता है।

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बता दें कि अमेरिका के फूड और ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन का कहना हैं कि जानवरों पर इसका टेस्ट एक अलग केस है, लेकिन इस टेस्ट का मकसद ये नहीं था कि स्मार्टफोन का असर इंसानों पर कितना होता है। लेकिन इस टेस्ट नतीजा हम नहीं निकाल सकते है कि इसका क्या नुकसान है।

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