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स्मार्टफोन में फोटो-वीडियो आपके लिए बन सकते है परेशानी का सबब, तुरंत करें डिलीट

आज के समय में डिजिटल का दौर तेजी से बढ़ रहा है। इसके साथ ही डिजिटल की दुनिया में भी जमाखोरी तेजी से बढ़ रही है और ऐसा करने पर आपको भारी नुकसान भी हो सकता है।

स्मार्टफोन में फोटो-वीडियो आपके लिए बन सकते है परेशानी का सबब, तुरंत करें डिलीट
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आज के समय में डिजिटल का दौर तेजी से बढ़ रहा है। इसके साथ ही डिजिटल की दुनिया में भी जमाखोरी तेजी से बढ़ रही है और ऐसा करने पर आपको भारी नुकसान भी हो सकता है।

लेकिन अब डिजिटल जमाखोरी पर किसी भी तरह का कोई कानून नहीं बना है। कई बार ऐसा होता है कि लोग ना चाहते हुए भी जमाखोरी करते है, आइए जानते है इसके बारे में....

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आपके फोन में फोटो का ढ़ेर लगा है

अगर यूजर के फोन में बहुत सारी फोटो के साथ ईमेल पड़े है और उन्हें डिलीट नहीं करते है, तो यह जमाखोरी कहलाता है। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि हम जरूरत के डाटा के साथ गैरजरूरी का डाटा भी स्टोर कर लेते है।

इससे फोन की स्टोरेज भी भर जाती है। डिजिटल जमाखोरी इस कदर बढ़ गई है कि अब ये बाकायदा रिसर्च का मुद्दा बन गया है। हो सकता है कि ऑफिस के ई-मेल में हजारों मेल देखकर यूजर्स दिल अपने बाल नोचने का करता हो।

हर रोज यूजर्स इस ढेर को साफ करने की सोच कर काम शुरू करते हैं, फिर मेल का जखीरा देख कर यूजर इसे अगली बार पर टाल देते हैं। ये ई-मेल और दूसरे डिजिटल डाटा का ढेर आपके लिए मुसीबत बनता जा रहा है।

दिमागी सेहत पर डालता है असर

बहुत से लोगों को आदत होती है कि काम हो जाने पर मेल को डिलीट नहीं करते है और साथ ही डॉक्यूमेंट को सेव करके रखते है। इस वजह से हम खुद ही डिजिटल कचरे के नीचे दबे जा रहे है और जमाखोरी कर रहे है। 2015 में पहली बार एक रिसर्च में यह वर्ड सामने आया था।

जब निक नीव की टीम ने डिजिटल जमाखोरी पर रिसर्च की है और उन्हें इस रिसर्च में 45 लोगों को शामिल किया है। पूछा है कि आखिर क्यो उन्होंने डिजिटल डाटा का ढेर लगाया है।

निक को इस रिसर्च में यह जवाब मिला कि विष्य में कोई चीज़ काम न आ जाए, किसी चीज को हमेशा के लिए डिलीट करने से अनजाना भय या फिर डाटा को किसी के खिलाफ इस्तेमाल ना किया जाए।

इसके पीछे यह सोच होती है कि कहीं भविष्य में किसी भी डाटा की जरूरत ना पड़ जाए। लेकिन सच्चाई यह है कि हम अपने जमा किए हुए डाटा को कभी भी दोबारा इस्तेमाल नहीं करते है।

निक ने कहा है कि लोगों को ई-मेल की जानकारी होती है, लेकिन कई संस्थानों के काम करने के तरीके वजह से वे डिलीट करने से कतराते है। इस वजह से ई-मेल का ढेर लग जाता है।

इसकी वजह से अगर किसी को भी फोटो या ई-मेल वापास सर्च करना है, तो इन सब चीजों को दोबारा सर्च करने में दिक्कत आती है।

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बता दें कि इस चीज से निपटने के लिए कई कंपनियों ने अपनी क्लाउड सर्विस को पेश किया है। इस सर्विस की मदद से यूजर्स आसानी से अपने डाटा को स्टोर कर पाएंगे और इससे डिजिटल जमाखोरी भी नहीं होगी।

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