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अलविदा 2017: इस साल इसरो ने रचे कई इतिहास, एक क्लिक में पूरे साल की उपलब्धियों पर डालें नजर

बीता हुआ साल भारतीय तकनीक के क्षेत्र में बहुत ही गौरवमयी रहा है। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने दुनिया भर में अपना परचम लहराया है।

अलविदा 2017: इस साल इसरो ने रचे कई इतिहास, एक क्लिक में पूरे साल की उपलब्धियों पर डालें नजर
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बीता हुआ साल भारतीय तकनीक के क्षेत्र में बहुत ही गौरवमयी रहा है। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने दुनिया भर में अपना परचम लहराया है। भारत के पहले चंद्रयान ने चंद्रमा पर भरपूर पानी होने की पुष्टि की है। उसके द्वारा पूर्व में भजे गए आंकड़ों ने बताया है कि चंद्रमा के दोनों ध्रुवों पर ही नहीं बल्कि उसकी सतह के नीचे भी कई स्थानों पर पानी मिलने की संभावना है।

जाहिर है, इससे चंद्रमा पर बस्तियां बसाने, वहां पर बसने और उस पर उतरकर उसके तमाम तरह के खनिजों के दोहन की ताक में रहने वाले देशों को एक उम्मीद जगी है। अब से पहले चंद्रमा में पानी होने की बात महज अनुमान भर थी, लेकिन अब यह अनुमान से कुछ ज्यादा है।

भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान केंद्र द्वारा 2008 में भेजा गया यह चंद्रयान था तो दो साल तक काम करने के लिए पर महज 312 दिन ही इसकी उम्र रही इसके बाद 29 अगस्त से इसका संपर्क टूट गया। समझा जाता था कि यह नष्ट हो गया, भले ही नासा ने इसका पता लगाया हो पर नासा का कोई यान चंद्रमा का इतनी नजदीकी परिक्रमा नहीं कर सका था न ही इतनी सटीक सूचना दे पाया था कि चंद्रमा पर पानी पाए जा सकने वाले क्षेत्रों का नक्शा बनाया जा सके।

यह काम तो भारत के चंद्रयान ने ही किया है। यही नहीं वैज्ञानिकों को पहली बार चंद्रमा के भूगोल के बारे में विश्वसनीय जानकारियां हासिल हुई हैं। इस साल के आरंभ में ही इसरो ने घोषणा की है कि वह 2021 में अगला चंद्रयान भेजने को पूरी तरह तैयार है। बात महज चंद्रयान की ही नहीं है, इसरो पूरे साल तकनीकी और विज्ञान के फलक पर छाया रहा।

साल के आखिर में यह पता चला कि इसरो द्वारा जो मंगलयान लाल ग्रह का अध्ययन करने के लिए महज छह महीने के मिशन पर भेजा गया था, वह 36 महीने बाद भी भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के लिए कार्यरत है और वैज्ञानिकों को मंगल ग्रह की तस्वीरें तथा आंकड़े भेजता जा रहा है। दूसरे देशों के अंतरिक्ष विज्ञानी जरूर इसरो की इस सफलता से ईर्ष्या करेंगे।

साल के दूसरे ही महीने में इसरो ने वीनस यानी शुक्र ग्रह के लिए अपना नया अभियान शुरू करने की घोषणा करके सबको चौंका दिया। फरवरी में ही इसरो ने ना केवल छोटे बड़े 104 उपग्रह एक साथ प्रक्षेपित कर इतिहास रचा बल्कि अब तक के सबसे भारी रॉकेट एमएसएलवीएमके-3 को प्रक्षेपित कर कीर्तिमानी काम किया।

साल के जून महीने में इसरो ने 14 देशों के 30 से अधिक सैटेलाइट्स एक साथ अंतरिक्ष में भेजे। इसने इस साल कई कम्युनिकेशन सैटेलाइट लॉन्च किए, जिससे भविष्य में संचार सेवाओं को सुचारु बनने में खासी मदद मिलेगी।

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