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Chandrayaan 2 launch 2019 : भारत चंद्रयान 2 की मदद से करेगा चांद का DNA टेस्ट, जानें इससे जुड़ी रोचक जानकारी

इसरो (ISRO) 15 जुलाई 2019 के दिन अपने खास चंद्रयान 2 (Chandrayaan 2) को लॉन्च करने वाला है। इसरो चंद्रयान 2 को जीएसएलवी (GSLV) लॉन्च व्हीकल से अंतरिक्ष में भेजा। चलिए जानते हैं चंद्रयान 2 की लॉन्चिंग (Chandrayaan 2 launch 2019) से लेकर अहम जानकारी।

Chandrayaan 2 launch 2019 : भारत चंद्रयान 2 की मदद से करेगा चांद का DNA टेस्ट, जानें इससे जुड़ी रोचक जानकारीISRO Chandrayaan 2 Launch 2019 date time registration

भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन यानि इसरो (ISRO) अपने अहम मिशन चंद्रयान-2 (Chandrayaan 2) को दो दिन बाद यानी 15 जुलाई 2019 के दिन लॉन्च करने वाली है। भारत पहली बार चांद के दक्षिणी ध्रुव (South Pole) पर चंद्रयान को उतारेगा और जरूरी जानकारियां भी जुटाएगा।

चंद्रयान-2 मिशन (Chandrayaan 2 Mission) के यान को जियोसिंक्रोनस सैटेलाइट लॉन्च व्हीकल यानी जीएसएलवी (GSLV) एमके-III रॉकेट से लॉन्च किया जाएगा और इसके लॉन्चिंग व्हीकल को बनाने में करीब 1 हजार कोरड़ रुपए का खर्च आया है।




इससे पहले 7 जुलाई 2019 को इसरो ने लॉन्चिंग पैड श्री हरिकोटा जीएसएलवी मार्क 3 को लगाया है। चंद्रयान-2 मिशन की लगभग तैयारियां पूरी हो चुकी हैं। चंद्रयान-2 15 जुलाई 2019 के दिन करीब 2 बजकर 51 मिनट पर लॉन्च किया जाएगा। वहीं, चंद्रयान-2 के लॉन्च (Chandrayaan 2 launch 2019) के पांच दिन बाद चांद पर कदम रखने वाले दुनिया के पहले व्यक्ति नील आर्मस्ट्रांग जन्मदिवस मनाया जाएगा।




भारत के वैज्ञानिक चंद्रयान-2 मिशन के माध्यम से चांद को पृथ्वी पर मिलने वाले तत्व की जानकारी जुटाएंगे। इससे पहले वर्ष 2008 में चंद्रयान-1 को लॉन्च किया गया था, जिसमें वैज्ञानिकों ने चांद की सतह पर आइस और पानी की खोज की थी। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन ने 8 जुलाई 2019 को अपनी अधिकारिक वेबसाइट पर चंद्रयान-2 की तस्वीरें जारी की थी।

भारतीय वैज्ञानिक चंद्रयान-2 को पृथ्वी की ऑरबिट में भेजेंगे। जैसे ही यान ऑर्बिट में जाएगा तो वैज्ञानिक इसकी गति बढ़ा देंगे और चांद की सतह में जाने के बाद यह इसकी गति धीमी हो जाएगी। चंद्रयान-2 चांद की ऑरबिट में 100 किलोमीटर की रफ्तार से चलेगा और इसको थरस्टर्स ताकत प्रदान करेंगे।




जब यान चांद पर लैंड करेगा, तब लैंडर विक्रम यान से अलग हो जाएगा और ऑर्बिटर अपना काम करना शुरू कर देगा। वहीं, वैज्ञानिक चंद्रयान-2 को सुरक्षित स्थान पर उतराने के लिए पहले खोज करेंगे और फिर जाकर लैंड करवाएंगे।

6 या 7 सितंबर को चंद्रयान-2 का लैंडर विक्रम चांद के साउथ पोल यानी दक्षिणी ध्रुव के पास लैंड करेगा और इसके बाद रोवर प्रज्ञान पूरे 14 दिन चांद की सतह से जुड़ी अहम जानकारी जुटाएगा। वहीं, ऑर्बिटर अपना काम पूरे एक वर्ष तक करता रहेगा।

आईआईटी कानपुर के वैज्ञानिक चलाएंगे चंद्रयान-2

आपको बता दें कि चंद्रयान-2 के रोवार विक्रम को आईआईटी कानपुर के वैज्ञानिकों ने तैयार किया है। वहीं, आईआईटी के वैज्ञानिक तय करेंगे कि यान कैसे काम करेगा और कहां जाएगा। इसके लिए आईआईटी कानुपर सीनियर प्रोफेसर केए वेंकटेश व मैकेनिकल इंजीनियरिंग विभाग के सीनियर प्रोफेसर आशीष दत्ता साथ मिलकर काम करेंगे।




भारत ने पहला चंद्रयान 2008 में लॉन्च किया था और तब इसको बनाने में 386 करोड़ रुपए का खर्च आया था। अब 15 जुलाई को चंद्रयान-2 लॉन्च किया जाएगा और इसको बनाने में 978 करोड़ रुपए का खर्च आया है। वहीं, इसका वजन 3877 किलो है।

चंद्रयान-2 को मिल सकती है चुनौती

चंद्रयान-2 के अंतरिक्ष में जाने के बाद उससे कनेक्शन बनाए रखने में थोड़ी मुश्किल आ सकती है, क्योंकि दूरी ज्यादा होने की वजह से अंतरिक्ष में रेडियो सिगनल्स कमजोर हो जाते हैं। इसके साथ ही बैकग्राउंड में अधिक शोर होने की वजह से कनेक्शन बनाए रखने में परेशानी आ सकती है। वहीं, चांद की लूनर ऑरबिट में जाने के लिए यान को कई सारे मुश्कि ऑरबिट में से गुजरना पड़ेगा, जिसकी वजह से ऑरबिट कई जगह से जल सकता है।




लूनर की ग्रेविटी असमान होने की वजह से चंद्रयान की लूनर को प्रभावित कर सकता है। लूनर का दिन पृथ्वी के 14 दिन के समान होता है, जिसकी वजह से यान के आस-पास के तापमान में बड़ा बदलाव होता है। वैक्यूम के कारण यान को चलाने में दिक्कत का समाना करना पड़ सकता है।

चंद्रयान-2 का लक्ष्य

1. चंद्रयान लूनर का मानचित्रण और अध्यन करेगा।

2. चंद्रयान-2 मिशन में वैज्ञानिक चांद की सतह पर मिट्टी और पत्थरों की चांच करेंगे।




3. वैज्ञानिक चंद्रयान 2 के जरिए चांद के आयनंडल की भी जांच करेंगे।

4. चंद्रयान चांद के लूनर के क्रस्ट और मेंटल का शोध करेगा।

चंद्रयान-2 की खास बात

इसरो ने चंद्रयान 1 को 2008 में लॉन्च किया था और तब इसमें रोवर शामिल नहीं था। वैज्ञानिकों ने तब यान में केवल ऑर्बिटर के साथ इंपैक्टर भेजा था और इसको साउथ पोल पर लैंड करवाया था। वहीं, इसरो ने इसको चांद से 100 किलोमीटर की दूरी पर लगाया था। तब स्पेस एजेंसी इसरो ने भारत के 5, यूरोप के 3, अमेरिक के 2 के साथ एक पेलोड को चांद पर भेजा था।




बता दें कि अब पूरे 10 साल बाद एक बार फिर इसरो चंद्रयान-2 को लॉन्च करने जा रही है और यह मिशन भारत के बहुत खास है। इस मिशन के माध्यम से भारतीय वैज्ञानिक चांद पर पानी और बर्फ की खोज के साथ अहम जानकारियां जुटाएंगे।

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