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साइबर वॉर को तैयार रहे विश्व, साइबर कमांडोज से लैस हो भारतीय सेना

एजिस स्कूल ऑफ डेटा साइंस, टेलीकॉम और साइबर सिक्योरिटी कई सालों से विद्यार्थियों को अलग-अलग सेक्टर में ट्रेनिंग दे रहा है। इस इंस्टीट्यूट की स्थापना टेलीकॉम कंपनी भारती एयरटेल के सपोर्ट से साल 2002 में हुई थी।

साइबर वॉर को तैयार रहे विश्व, साइबर कमांडोज से लैस हो भारतीय सेना
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एजिस स्कूल ऑफ डेटा साइंस, टेलीकॉम और साइबर सिक्योरिटी कई सालों से विद्यार्थियों को अलग-अलग सेक्टर में ट्रेनिंग दे रहा है। इस इंस्टीट्यूट की स्थापना टेलीकॉम कंपनी भारती एयरटेल के सपोर्ट से साल 2002 में हुई थी। बीते दिनों एजिस स्कूल ने अलग-अलग टेलीकॉम सेक्टर के इनोवेटर्स को आमंत्रित किया। हाल ही में एजिस स्कूल के सीईओ भूपेश दहरिया के हुई बातचीत के जुड़े अंशः

1. अभी तक कितने अवॉर्ड्स एजिस स्कूल करा चुका है।

जवाब: इस बार एजिस स्कूल ऑफ डेटा साइंस 9वीं अवॉर्ड को करा रहा है। अभी तक 8 अवॉर्ड हो चुके हैं। हमनें 2010 में इस फील्ड में काम कर रहे लोगों की हिम्मत को बढ़ाने के लिहाज से इसकी शुरुआत की।

2. इन अवॉर्ड्स को शुरु करने का आपके पीछे क्या मकसद था।

जवाब: इनको शुरु करने के पीछे यह आइडिया था कि जो भी इनोवेटर हैं फिर चाहें वह किसी टेलिकॉम सेक्टर से हैं या फिर कोई स्टार्ट-अप से। सभी को मौका मिले। देखा जाए तो जो बड़ी कंपनियां हैं अक्सर उनके सीईओ या फिर वाइस-प्रेसिडेंट को अवॉर्ड मिलता था जिसके कारण इनोवेटर्स हमेशा पीछे रह जाते थे।

इसके लिए सभी इनोवेटर्स हर कंपनी से आए, अपने आइडियाज शेयर करें। साथ ही जो अवॉर्ड्स का सेलेक्शन होता है वह ज्यूरी मेंबर्स के हाथों में होता है। सभी पार्टिसिपेंट्स अपना 10 से 15 मिनट का प्रेजेंटेशन देते हैं जिसके आधार पर ही ज्यूरी उनको परखती है और अपना फैसला सुनाती है।

3. जैसे कि आपने कहा कि अभी तक एजिस 8 बार अवॉर्ड्स का समापन कर चुका है तो इनमें इनोवेटर्स ने कैसे-कैसे आइडियाज दिए जिसे लोगों तक पहुंचाया गया।

जवाब: इनमें काफी सारी इनोवेशन आती हैं जैसे बिलिंग इनोवेशन, नेटवर्क मेल इनोवेशन, बहुत से हैं जिससे लोगों को काफी सारी सुविधाएं मिलती हैं।

4. पिछले हफ्ते वर्ल्ड इकोनॉमिक फॉरेम की एक रिपोर्ट आई थी जिसमें कहा गया कि 12 सेक्टर्स ऐसे हैं जिनमें 54% कर्मचारियों को बहुत कुछ सिखाने (Re-skills) की जरूरत है जैसे अब टेक्नोलॉजी आगे बढ़ रही है उस लिहाज से। अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेस भी देखे जा रहे हैं, तो ऐसे में क्या आपको नहीं लगता कि ह्यूमन की जरूरत कम होती जाएगी।

जवाब: मैं नहीं मानता, जब कंप्यूटर आए थे, उस समय भी ऐसा ही माना गया था। मैं एक उदाहरण के तौर पर इसको समझाना चाहूंगा। अभी बहुत सी कंपनियों ने चैट-बॉक्स की सुविधा जनता को देनी शुरु कर दी है। यह ऐसी चीज हैं जिनसे आप बात कर सकते हो। लेकिन क्या सारे चैट-बॉक्स उतनी ही क्षमता से जवाब दे पाएंगे। कुछ चीजें ऐसी हैं जिनका जवाब चैट-बॉक्स नहीं दे पाएगा ऐसे में उनको ह्युमन से ही बात करनी होगी।

जहां तक बात है रि-स्किलिंग की, आज लोगों को हाईयर स्किलिंग सीखने की जरूरत पड़ गई है। जहां पर वह ग्राहकों की परेशानियों को अच्छे से समझ सकें। उसको सिर्फ कस्मटर को ही संतुष्ट नहीं करना है। बल्कि उनके इमोशन को भी ध्यान में रखना होगा।

5. आपके इंस्टीट्यूट में साइबर सिक्योरिटी के बारे में भी पढ़ाया जाता है तो आज साइबर से जुड़े कई मामले सामने आ रहे हैं। इसको आप कैसे देखते हैं।

जवाब: मुझे ऐसा लगता है कि अभी तक जो लड़ाईयां होती थी वह जमीन पर होती थी। बॉम्बस के द्वारा वॉर होते थे। लेकिन अब जो थर्ड वर्ल्ड वॉर होगा वो साइबर वॉर के नाम से जाना जाएगा। बल्कि इसकी शुरुआत भी हो चुकी है।

हाल ही में हमने साइबर आर्मी की बात सुनी, जिसका एक उदाहरण देखा गया था। कहा ये गया कि रूस ने अमेरिका के राष्ट्रपति के चुनाव में साइबर आर्मी के तहत दखल दिया है।

अगर इंडिया को भी साइबर वॉर से बचना है तो उन्हें भी साइबर कमांडोज बनाने होंगे। यदि किसी को भी किसी भी देश पर हमला करना है तो वह आसानी से बैंकों में हमला करता है। यह आम बन गया है। यदि ऐसा चलता रहा को कुछ ही दिनों में देश की इकोनॉमी तहस-नहस हो जाएगी।

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