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Independence Day 2018: भारत में संचार क्रांति की शुरुआत

15 अगस्त यानी स्वतंत्रता दिवस 2018 (Independence Day 2018) भारत का अहम दिन है। इस दिन 1947 में भारत आजाद हुआ था और साथ ही भारत इस बार 71वां स्वतंत्रता दिवस मना रहा है।

Independence Day 2018: भारत में संचार क्रांति की शुरुआत
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15 अगस्त यानी स्वतंत्रता दिवस 2018 (Independence Day 2018) भारत का अहम दिन है। 15 अगस्त 1947 में भारत आजाद हुआ था और साथ ही भारत इस बार 71वां स्वतंत्रता दिवस मना रहा है। इस दिन भारत ब्रिटिश साम्रज्य से आजाद हुआ था।

पूरे देश इस दिन को खुब उत्साह से मनाता है और साथ ही इस दिन स्कूल, कॉलेज और सार्वजनिक समुदाय के साथ शिक्षा संस्थानों में भी मानाया जाता है।

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आजादी के बाद संचार की क्रांति शुरुआत हुई थी। इसमें टेलीग्राफ से लेकर टेलिविजन और सूचना सेवा शामिल है। आज हम आपको आजादी के बाद से कैसे संचार क्रांति हुई है, इसकी जानकारी देंगे...

1933 - भारत और ब्रिटेन के बीच रेडियोटेलीफोन प्रणाली का उद्घाटन किया था।

1953-12 चैनल वाहक प्रणाली शुरू की गई थी।

1960 - कानपुर और लखनऊ के बीच पहला ग्राहक ट्रंक डायलिंग मार्ग अधिकृत किया गया था।

1975 - मुंबई सिटी और अंधेरी टेलीफोन एक्सचेंज के बीच पहली पीसीएम (PCM) प्रणाली स्थापित की गई थी।

1976 - पहली डिजिटल माइक्रोवेव जंक्शन शुरू किया गई थी।

1979 - पुणे में स्थानीय जंक्शन के लिए पहली ऑप्टिकल फाइबर प्रणाली अधिकृत की गई थी।

1980 - सिकंदराबाद, आंध्र प्रदेश में, घरेलू संचार के लिए प्रथम उपग्रह पृथ्वी स्टेशन की स्थापित की गई थी।

1983 - ट्रंक लाइन के लिए पहला संग्रहित कार्यक्रम नियंत्रण एक्सचेंज मुंबई में बनाया गया था।

1984 - सी-डॉट स्वदेशी विकास और उत्पादन के लिए डिजिटल एक्सचेंजों की स्थापना की गई थी।

1985 - दिल्ली में गैर वाणिज्यिक आधार पर पहली मोबाइल टेलीफोन सेवा शुरू की गई।

ब्रिटिश काल में देश के सभी प्रमुख शहरों और कस्बों को टेलीफोन से जोड़ दिया गया था, साथ ही 1948 में टेलीफोन की कुल संख्या महज 80,000 के आसपास हो गई थी।

स्वतंत्रता के बाद भी विकास काफी धीमी गति से हो रहा था। टेलीफोन उपयोगिता का साधन होने के बजाय हैसियत का प्रतीक बन गया था। इस वजह से टेलीफोनों की संख्या 1971 में 980,000, 1981 में 2.15 मिलियन और 1991 में 5.07 मिलियन तक पहुंची गई थी।

आजादी के बाद से ही टेलीफोन्स के साथ मोबाइल फोन्स की संख्या भी बढ़ गई थी, इस वजह से दुनिया में भारत मोबाइल दूरसंचार प्रणाली में दूसरे स्थान पर पहुंच चुका था।

इसके साथ ही सरकार के साथ निजी कंपनियां भी देश में टेलीफोन की सुविधा देना शुरू कर दी थी। साल 2004 में, मोबाइल फोन कनेक्शन की संख्या फिक्स्ड लाइन कनेक्शन्स की संख्या पार कर चुकी थी। एयरटेल, रिलायंस इन्फोकॉम, वोडाफोन, आइडिया सेलुलर और बीएसएनएल और एमटीएनएल देश में टेलीकॉम की सुविधा दे रही थी और अब भी दे रही है।

वहीं दूसरी तरफ राजीव गांधी ने भी देश में संचार क्रांति में अहम योगदान दिया है। उनकी वजह से गरीब और अमीर सभी के हाथों में मोबाइल और लैपटॉप जैसे उपकरण आए थे और इसके पीछे उनकी विकासवादी सोच थी।

इसके साथ ही राजीव गांधी ने संचार क्रांति ला दी. शिक्षा, अर्थव्यवस्था एवं तकनिकी क्षेत्र में भारत को सफलता का रास्ता दिखाया था। इसके साथ ही राजीव गांधी को क्मप्यूटर भारत में कंम्पयूटर लाने के फैसले पर आलोचनाओं का सामना करना पड़ा था।

विपक्ष के नेताओं ने देश में बेरोजगारी सहित कई मुद्दों पर सरकार की खिंचाई की थी। कई ने तो देशभर में रेल रोको और अन्य प्रकार से विरोध प्रदर्शन किया था।

रिलायंस ने सबसे पहले देश में फीचर फोन की क्रांति ला दी थी, जिसके बाद यह फोन्स आम लोगों के हाथों में आसानी से पहुंच चुके थे। इसके बाद फोन्स में म्यूजिक के साथ कैमरा आने लगा और इसके बाद भारत में फोन बिक्री काफी तेजी से बढ़ गई थी। इसके साथ ही लोग इसका इस्तेमाल भी करने लगे थे।

नोकिया ने साल 2000 में Nokia 3210 लॉन्च किया था और यह एक क्रांतिकारी फोन साबित हो गया था। इस के साथ टेक्सटिंग की शुरुआत हुई थी। दुनियाभर में इस डिवाइस के करीब 160 मिलियन यूनिट्स बिके थे और यह बेस्ट-सेलिंग फोन साबित भी हुआ था।

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2010 में एचटीसी ने ईवो लॉन्च किया था और यह सार्वजनिक तौर पर लॉन्च किया जाने वाला पहला 4जी रेडी फोन था। इसके बाद दुनिया में स्मार्टफोन क्रांति हुई थी। टचस्क्रीन वाले फोन्स की बाज़ार में भीड़ हो गई और सोनी, एलजी, सैमसंग जैसे दिग्गजों ने अपने स्मार्टफोन्स पेश किए थे।

देखते ही देखते 2018 में स्मार्टफोन्स की संख्या 530 मिलियन हो गई है और यह भी माना जा रहा है कि 2019 तक इन फोन्स की संख्या 5 अरब हो जाएगी।

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