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पेट्रोल-डीजल पर उत्पाद शुल्क बढ़ाने से सरकार को होगा 1.6 लाख करोड़ का फायदा, लोगों पर नहीं पड़ेगा असर

क्रूड ऑयल (Crude Oil Price Fall) में आई ऐतिहासिक गिरावट का पेट्रोल और डीजल पर पड़ा असर। सरकार ने एक्साइज ड्यूटी बढ़ाकर कमाया मुनाफा

पेट्रोल-डीजल पर उत्पाद शुल्क बढ़ाने से सरकार को होगा 1.6 लाख करोड़ का फायदा, लोगों पर नहीं पड़ेगा असर
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कोरोना वायरस महामारी के बीच देश में लॉकडाउन लगाने से खाली हुए खजाने को भरने के लिए मंगलवार रात से (Central Government) केंद्र सरकार ने पेट्रोल और डीजल पर (Excise Duty Hike) एक्साइज ड्यूटी में बड़ा इजाफा कर दिया है। इसमें पेट्रोल पर 10 रुपये प्रति लीटर और डीजल पर 13 रुपये प्रति लीटर टैक्स बढ़ा दिया गया है। जिसका पूरा फायदा सरकार को मिलेगा। जबकि लोगों की जेब पर अभी इस बढ़त का कोई असर नहीं पडेगा। वहीं सरकार ने यह दाव तब चला है। जब International Market में Crude Oil कच्चे तेल की कीमत अपनी ऐतहासिक गिरावट पर है। इस समय एक्साइज ड्यूटी बढ़ाने से सरकार के खजाने में करीब 1.6 लाख करोड़ रुपये का इजाफा हो जाएगा।

देश की जनता पर बढ़त का नहीं पड़ेगा कोई असर

दरअसल, मंगलवार रात सरकार द्वारा तेल पर (Excise Duty Increase) एक्साइज कर बढ़ाने का असर अभी देश की जनता यानि किसी आम आदमी पर नहीं पड़ेगा, लेकिन इससे सरकार का खजाना जरूर भर गया है, लेकिन यहां सारा खेल (Petrol-Diesel Price) पेट्रोल-डीजल के (Price Build-UP) में छिपा हुआ है। 1 मार्च को पेट्रोल के रेट में टैक्स (Tax) की हिस्सेदारी करीब 97 प्रतिशत थी। जो अब बढ़कर 226 प्रतिशत हो गई है। इसका फायदा सरकार ने लोगों को देने की जगह (Tax Increase On Petrol-Diesel) टैक्स में बढ़ोतरी कर अपने पास रख लिया है। जानकारों की मानें तो इसकी वजह ऐसे में समय में सरकार के पास (Revenue) राजस्व में भारी कमी आना भी है। जिसकी जल्द से जल्द पूर्ती के लिए सरकार ने मौके का फायदा उठाते हुए यह कदम बढाया है।


मार्च से ही पेट्रोल और डीजल के कीमतों में मोटा मुनाफा कमा रही सरकार

जानकारों की मानें तो कोरोना वायरस (Coronavirus) का सबसे ज्यादा असर कच्चा तेल पर पड रहा था। कोरोना और दो देशों के बीच चली रही लड़ाई के चलते क्रूड ऑयल (Crude Oil Price) की कीमतों में भारी गिरावट आती गई। इसी के चलते कच्चे तेल की कीमतों में ऐतिहासिक गिरावट दर्ज की गई। जिसका फायदा सरकार ने उठाया है। 1 मार्च से पहले से ही डगमगा रही तेल की कीमतों को देखते हुए सरकार ने पेट्रोल पर टैक्स 96 57 प्रतिशत तक बढा दिया था। आईओसीएल की वेबसाइट पर 1 मार्च को मौजूद जानकारी के मुताबिक, 1 लीटर पेट्रोल का बेस प्राइस 32.61 रुपये था। इस पर 0.32 पैसे का किराया भाड़ा, और 19.98 रुपये की एक्साइज ड्यूटी, 3.55 रुपये का डीलर कमीशन और 15.25 रुपये राज्य वैट शामिल था। जिसके बाद पेट्रोल की कीमत 71.71 रुपये प्रति लीटर पहुंची थी। क्रूड ऑयल के गिरने का सीधा असर पेट्रोल और डीजल पर पडता है। इसके चलते पेट्रोल और डीजल के दाम में बढत और घटौती चलती रहती थी, लेकिन सरकार ने कच्चे तेल की कीमतों को बुरी तरह गिरते देख अपना मुनाफा बढा लिया। जिसका फायदा लोगों को पहुंचने की जगह सीधा सरकार को मिला।

6 मई को पेट्रोल पर 226.28 प्रतिशत तक पहुंच गया टैक्स

6 मई 2020 को इंटरनेशनल मार्केट (International Market) में एक बार फिर से (Crude Oil Price Fall) कच्चे तेल की कीमतों में भारी गिरावट दर्ज की गई। इस पर राजधानी दिल्ली में 1 लीटर पेट्रोल का बेस प्राइस 17.96 रुपये रहा है। वहीं इसमें 0.32 रुपये का किराया और 32.98 रुपये की (Excise Duty) एक्साइज ड्यूटी, 3.56 रुपये का डीलर कमीशन और 16.44 रुपये का राज्य सरकार का वैट शामिल कर दिया गया। जिसके बाद दिल्ली में 1 लीटर पेट्रोल की कीमत 71.26 रुपये प्रति लीटर पहुंच गई। वहीं मुनाफे की रकम सरकार के खजाने में चली गई। यदि पेट्रोल की कीमत की तुलना रेट से की जाये तो पेट्रोल पर लगने वाली एक्साइज ड्यूटी और वैट मिलाकर 226.28 प्रतिशत हो जाता है। जो केंद्र और राज्य सरकार के खाते में जा रही है।

इंटरनेशनल मार्केट में निचले स्तर पर पहुंचे पेट्रोलियम पदार्थ, यहां वहीं रहे डीजल और पेट्रोल के दाम

कोरोना वायरस के झटके से निचले स्तर पर पहुंचे कच्चे तेल का असर भारत में पेट्रोल और डीजल पर नहीं पडा। यहां लोगों को उसी दाम में पेट्रोल डीजल मिल रहे हैं। जो उन्हें पहले मिल रहे थे। जबकि तेल पर मिलने वाला यह मुनाफा एक्साइज ड्यूटी के माध्यम से सरकार के पास जा रहा है। वहीं पिछले आंकडे देखें तो सरकार ने नवंबर 2014 से जनवरी 2016 के बीच पेट्रोल पर 9 बार एक्साइज ड्यूटी बढाई है। जबकि इस दौरान लगातार अंतरराष्ट्रीय बाजारों में तेल की कीमतें गिरती गईं। इन 15 महीने के दौरान (2016-17) सरकार को एक्साइज ड्यूटी के रूप में 2,42,000 करोड़ रुपये मिले थे।

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