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Google ने Doodle बनाकर Sake dean Mahomed किया सम्मानित, जानें कौन थे

दुनिया की दिग्गज सर्च इंजन कंपनी Google ने आज खास तौर पर एंग्लो-इंडियन Sake dean Mahomed की याद में Doodle बनाया है।

Google ने Doodle बनाकर Sake dean Mahomed किया सम्मानित, जानें कौन थे
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दुनिया की दिग्गज सर्च इंजन कंपनी Google ने आज खास तौर पर एंग्लो-इंडियन Sake dean Mahomed की याद में Doodle बनाया है। Sake dean Mahomed एक एंग्लो-इंडियन यात्री के साथ सर्जन और बिजनेस मैन थे, जो पश्चिमी दुनिया के सबसे उल्लेखनीय गैर-यूरोपीय प्रवासियों में से एक रहे थे।

Sake dean Mahomed ने यूरोप में भारतीय खानपान के साथ शैम्पू की शुरूआत की थी। इन्होंने भारत और इंगलैंड के बीच सांस्कृतिक संबंध स्थापित किए थे और इससे उनका उनका नाम रोशन हुआ था। आइए जानते है इनके बारे में....

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Sake dean Mahomed ईस्ट इंडिया कंपनी के बंगाल रेजिमेंट में एक सैनिक थे और वह पहली बार 1784 में कप्तान की पोस्ट पर अपनी सर्विस दी थी। साथ ही Sake dean Mahomed पहले भारतीय थे, जिन्होंने अंग्रेजी में एक पुस्तक लिखी थी और साथ ही एक इंगेलैंड में एक भारतीय रेस्तरां भी खोला था।

Sake dean Mahomed ने 1810 में उन्होंने 34 जॉर्ज स्ट्रीट, लंदन में हिंदोस्तान कॉफ़ी हाउस की स्थापना की थी, जो कि एक एशियाई की चला रहा था और यह पहला भारतीय रेस्तरां था। लेकिन मोहम्मद का यह रेस्तरां था, जो दो साल के अंदर ही खत्म हो गया था।

रेस्तरां बंद होने के बाद मोहम्मद परिवार के साथ ब्रीटेन में ही बस गए थे और समुद्र तट के पास उन्होंने एक स्पा खोला था। जहां पर वह हर्बल स्टीम बाथ लोगों को देते थे और मोहम्मद की इस सर्विस की खासियत थी कि वे बाथ के साथ भारतीय मालिश देते थे।

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इस सर्विस को शैम्पू का नाम दिया था और भारत में इस सेवा को चंपी के नाम से जाना जाता है। Sake dean Mahomed की मृत्यु 1851 में हो गई थी और उन्हें सेंट निकोलस चर्च के कब्रिस्तान में दफनाया गया था।

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