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भारत में एक भी डीजल या पेट्रोल कार नहीं दिखेगी, ये वाहन आएंगे मार्केट में

13 साल बाद भारत में एक भी डीजल या पेट्रोल कार बिकती नहीं दिखेगी।

भारत में एक भी डीजल या पेट्रोल कार नहीं दिखेगी, ये वाहन आएंगे मार्केट में
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दुनिया तेजी से बिना तेल के भविष्य की तरफ बढ़ रही है। यह भविष्य है इलेक्ट्रिक बैटरीज का, जो दुनिया को चलाएंगी। एलन मस्क के फेमस इलेक्ट्रिक व्हीइकल टेस्ला ने दुनिया को इसकी झलक दिखा दी है।

अब समय आ गया है कि प्लेन भी इलेक्ट्रिक हों। बोइंग और जेटब्ल्यू एयरवेज ने घोषणा की है कि वे हाइब्रिड-इलेक्ट्रिक एयरक्राफ्ट की बिक्री 2022 तक शुरू कर देंगे।

जुनून एयरो के प्लान के मुताबिक ये स्माल प्लेन 12 पैसेंजर्स की क्षमताओं वाले होंगे। ये ट्रैवल टाइम और कॉस्ट, दोनों ही बचाएंगे।

क्लीन एनर्जी एक्सपर्ट टोनी सेबा का अनुमान है कि इलेक्ट्रिक व्हीइकल एक दशक में ग्लोबल ऑइल इंडस्ट्री को ध्वस्त कर देंगे।

उनका कहना है कि 2030 तक 95 फीसदी लोग प्राइवेट कार के मालिक नहीं रह जाएंगे, जिससे ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री साफ हो जाएगी।

व्यक्तिगत गाड़ियों में कमी आएगी

दरअसल इलेक्ट्रिक प्लेन तो ऑइल इंडस्ट्रीज के लिए तीसरे झटके होंगे। इलेक्ट्रिक व्हीइकल के बाद ही इस इंडस्ट्री के दूसरे झटके के रूप में एक नई चीज पर चर्चा हो रही है।

यह है ऑटोनॉमस व्हीइकल। स्वचलित गाड़ियां भी तेल उद्योग के लिए झटका ही हैं क्योंकि इनकी वजह से भी गाड़ियों की पर्सनल ओनरशिप में कमी आएगी।

छोटे जहाज इंडस्ट्रीज के लिए तीसरा झटका

ट्रांसपॉर्ट के तकनीक आधारित मॉडल जैसे ओला और ऊबर भी शेयरर्ड ट्रांसपॉर्ट को बढ़ावा दे रहे हैं। इसकी वजह से भी तेल की मांग में कमी आएगी।

इन्हीं सब आधारों पर सेबा 2030 तक 95 फीसदी लोगों के कार के मालिक नहीं रह जाने का अंदाजा लगा रहे हैं। अब बैटरी से चलने वाले छोटे प्लेन इस इंडस्ट्री के लिए तीसरे झटके होंगे। ये फिलहाल हवाई जहाजों से सस्ते रहने वाले हैं इसलिए इनके काफी लोकप्रिय होने की संभावना है।

तेल की मांग व कीमतें घटेंगी

इसकी वजह से वैश्विक तौर पर तेल की मांगों में कमी आएगी और इसकी कीमतें भी घटेंगी। सेबा के मुताबिक 2020 तक वैश्विक रूप से तेल की मांग शीर्ष पर (100 मिलियन बैरल प्रति दिन) होगी।

2030 तक यह घटकर 70 मिलियन बैरल प्रति दिन हो जाएगी। सेबा के मुताबिक ऐसा होने पर तेल की कीमत 25 डॉलर बैरल तक घट जाएगी। भारत ने भी घोषणा कर दी है कि 2030 तक देश में केवल इलेक्ट्रिक कारों को बनाने की ही अनुमति होगी।

यानी 13 साल बाद भारत में एक भी डीजल या पेट्रोल कार बिकती नहीं दिखेगी।

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