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अनचाहे मैसेज से हैं परेशान तो TRAI ने किया निदान, SMS भेजने वाली कंपनी पर कर सकते हैं कार्रवाई

टेलीकॉम रेगुलेटर ट्राई (TRAI) ने सभी टेलीमार्केटिंग कंपनियों को अपनी वेबसाइट पर डेटा डालने के दिए आदेश। इस कोड से पता लगेगा कौन सी कंपनी भेज रही आप को मैसेज

अनचाहे मैसेज से हैं परेशान तो TRAI ने किया निदान, SMS भेजने वाली कंपनी पर कर सकते हैं कार्रवाई
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अक्सर आप मोबाइल पर आने वाले अनचाहे कॉल और मैसेज से परेशान हो जाते हैं। इनमें बिना मतलब बैंकिंग, प्रॉपर्टी समेत अन्य फ्रॉड तरीके के आने वाले मैसेज शामिल हैं, जिन्हें देखकर हर व्यक्ति इग्नोर करने के अलावा कुछ नहीं कर सकता था, लेकिन अब ऐसा नहीं हैं। अब TRAI के एक कदम से आप ये पता लगा सकत हैं कि आखिर आप के पास जो मैसेज आ रहे हैं। उन्हें कौन सी कंपनी भेज रही है। आप इन्हें आसानी से पहचान करने के साथ ही इनके खिलाफ कार्रवाई भी कर सकते हैं। इसकी वजह टेलीकॉम रेगुलेटर (TRAI) ने सभी टेलीमार्केटिंग कंपनियों को अपनी (Website) वेबसाइड पर डेटा डालने के आदेश दिये हैं। इसके साथ ही उन्हें अलग कोड भी दिया गया है। जिससे ग्राहक आने वाले मैसेज को असानी से पहचान सकता है कि वह किसने भेजा है।

मैसेज भेजने वाली कंपनी का पता लगने के साथ ही कर सकते हैं कार्रवाई

दरअसल ट्राई ने सभी टेलीमार्केटिंग कंपनियों को अपनी वेबसाइट पर रजिस्टर कर दिया है। इसके साथ ही सभी (TeleMarketing Companies) कंपनियों को डेटा अपनी वेबसाइट पर डालने के आदेश दिये हैं। इतना ही नहीं ट्राई (Trai Consumers) ने ग्राहकों की सहूलियत के लिए हर कंपनी को एक कोड (Code) दिया है। यह कोड कंपनी द्वारा मैसेज भेजने पर पता चल जाएगा। इसी कोड के आधार पर आप मैसेज भेजने वाली कंपनी की पहचान भी कर सकेंगे। साथ ही अगर आप इससे परेशान हो चुके हैं तो आप इस कंपनी के खिलाफ कार्रवाई भी कर सकते हैं। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, अब तक करीब 35000 टेलीमार्केटिंग कंपनियों को रजिस्टर किया जा चुका है। इन सभी कोड अलग अलग हैं।

फ्रॉड करने वाली कंपनियों की पहचान के साथ लगेगी लगाम

कंपनियों के बार बार मैसेज और कॉल से परेशान होने वाले ग्राहकों के लिए (Trai) टेलीकॉम रेगुलेटरी ने (Do Not Disturb) रजिस्टर बनाया है। इसमें रजिस्टर करने वाले उपभोक्ताओं के अनचाहे मैसेज और कॉल रोक दिये जाते हैं, लेकिन इसके बावजूद भी अगर आप के पास मैसेज और कॉल आते हैं। तो फ्रॉड करने वाली इन टेलीमार्केटिंग कंपनियों का आसानी से पता लगाया जा सकता है। अब नये सिस्टम से उम्मीद है कि अब फ्रॉड करने वालों पर लगाम लगाई जा सकेगी।

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