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Russia Ukraine Crisis: नहीं आ पा रहे रूस से भारत में ये जरूरी सामान! पेट्रोल-डीजल से लेकर खाद्य तेलों समेत इन चीजों की बढ़ सकती है कीमत

भारत रेटिंग और अनुसंधान की रिपोर्ट की अगर मानी जाए तो भारतीय अर्थव्यवस्था पर रूस-यूक्रेन की लड़ाई का असर पड़ सकता है।

Russia Ukraine Crisis: नहीं आ पा रहे रूस से भारत में ये जरूरी सामान! पेट्रोल-डीजल से लेकर खाद्य तेलों समेत इन चीजों की बढ़ सकती है कीमत
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Russia Ukraine Crisis

रूस और यूक्रेन (Russian Ukraine war) के बीच की लड़ाई है कि रुकने का नाम नहीं ले रही है। ऐसे में न सिर्फ वहां के लोगों को समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। वहीं, अब भारत (India) के लिए भी एक बड़ी समस्या खड़ी होती नजर आ रही है। रूस-यूक्रेन के तनातानी (Russia Ukraine Crisis) के बीच संभावना है कि भारत के आयात बिल (Import Bill of India) को झटका लग सकता है। ऐसे में रत्न-आभूषण (Gemstone-Jewelry), कच्चा तेल (Crude oil), खाद्य तेल (Edible Oil) और उर्वरक (Fertilizer) यहां से मंगवाने के लिए अधिक रकम चुकानी पड़ेगी। जिसके कारण भारत का चालू खाता और ज्यादा घाटे में हो सकता है। बात यहां तक नहीं थमेगी इन उत्पादनों को मंगवाने के लिए जब ज्यादा रकम चुकानी पड़ेगी तो भारत में तेल, आभूषण, रत्न, खाद्य तेल और उर्वरक के दामों में बढ़ोतरी हो सकती है।

आपको बता दें कि अभी तक रूस से भारत में ये उत्पादन सस्ते में आते थे। हालांकि, अब महंगे में आने की संभावना जताई जा रही है। एफवाई 22 में व्यापारिक आयात 600 बिलियन डॉलर के पार होने की संभावना है। भारत रेटिंग और अनुसंधान की रिपोर्ट की अगर मानी जाए तो भारतीय अर्थव्यवस्था (Indian Economy) पर रूस-यूक्रेन की लड़ाई का असर पड़ सकता है।

भारतीय अर्थव्यवस्था पर हो सकते हैं ये तत्काल असर

  • ऊंची मुद्रास्फीति की दर
  • चालू खाता घाटे में बढ़ोतरी
  • रुपये का अवमूल्यन यानी रुपये का गिरना

इसके अलावा भारतीय अर्थव्यवस्था पर असर उच्च वैश्विक कमोडिटी कीमतों के माध्यम से भी पड़ेगा। ऐसा इसलिए क्योंकि भारत इम्पोर्ट पर काफी निर्भर है। ऐसे में कच्चे तेल के दाम बढ़ने पर भारत की चिंता बढ़ सकती है और पेट्रोल और डीजल के दामों में भी 8 से 10 रुपये तक की हो बढ़ोतरी सकती है। एक एजेंसी की मानें तो कच्चे तेल के दामों में प्रति बैरल 5 डॉलर (378.17 रुपये) की बढ़ोतरी हुई है। जिससे वजह से व्यापार या चालू खाता घाटे में 6.6 अरब डॉलर का इजाफा हो जाएगा। आपको बता दें कि मौजूद समय में भारत द्वारा कच्चे तेल का 85 फीसदी आयात किया जाता है।

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