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Samsung से लेकर Apple जैसी कई कंपनियां भारत में बनना चाहती हैं मोबाइल, 12 लाख लोगों देगी रोजगार

अगले 5 साल में कंपनियां भारत में बना देगी 11 लाख करोड़ रुपये के मोबाइल फोन, लाखों लोगों को मिलेगा रोजगार

Samsung से लेकर Apple जैसी कई कंपनियां भारत में बनना चाहती हैं मोबाइल, 12 लाख लोगों देगी रोजगार
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भारत और चीन की तनातनी के बीच कई मोबाइल कंपनियों ने भारत में निवेश कर अगले 5 सालों में 11 लाख करोड़ रुपये के मोबाइल बनाने का दावा किया है। इनमें एप्पल से लेकर सैमसंग, लावा और डिक्सन के लिए ठेके लेकर काम करने वाली इकाइयों सहित देश विदेशी की करीब 22 घरेलू और अंतराष्ट्रीय कंपनियों है। केंद्रीय दूरसंचार और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री रवि शंकर प्रसाद ने यह जानकारी साझा करते हुए कहा है कि सरकार की 41,000 करोड़ रुपये की उत्पादन से सम्बद्ध प्रोत्साहन योजना (पीएलआई) के तहत कराये हैं।

देश में रोजगार की होगी भरमार

मंत्री का दावा है कि इन कंपनियों के भारत में लगने से देश में करीब 12 लाख रोजगार पैदा होगे। जिसमें 3 लाख प्रत्यक्ष और 98 लाख अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर होंगे। वहीं कंपनियों का दावा है कि वह 11 लाख करोड़ रुपये के मोबाइल बनाकर करीब 7 लाख करोड़ रुपये के मोबाइल फोन का निर्यात करेगी। इससे करीब तीन लाख लोगों को प्रत्यक्ष और नौ लाख लोगों को अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर पैदा होंगे। उन्होंने कहा कि पीएलआई के तहत कुल 22 कंपनियों ने आवेदन किया है। इसमें ताइवान, दक्षिण कोरिया, जर्मनी और ऑस्ट्रिया की कंपनियां भी शामिल है। इस योजना के तहत प्रस्ताव जमा कराने वाली विदेशी कंपनियों में सैमसंग, फॉक्सकॉन होन हेई, राइजिंग स्टार, विस्ट्रॉन और पेगाट्रॉन शामिल हैं। इस योजना का लाभ लेने के लिए इन विदेशी कंपनियों के लिए 15,000 रुपये या उससे अधिक मूल्य के मोबाइल फोन विनिर्माण की शर्त रखी गयी थी। भारतीय मोबाइल फोन विनिर्माता कंपनियों के लिए ऐसी कोई शर्त नहीं है।

वहीं बता दें कि फॉक्सकॉन होन हेई, विस्ट्रॉन और पेगाट्रॉन अनुबंध पर एप्पल आईफोन बनाती है। इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के आधिकारिक बयान के अनुसार, मोबाइल फोन की वैश्विक बिक्री में एप्पल की हिस्सेदारी 37 प्रतिशत और सैमसंग की 22 प्रतिशत है। पीएलआई योजना से देश में मोबाइल फोन का विनिर्माण कई गुणा बढ़ने की उम्मीद है। इसके साथ ही दावा किया गया है कि ये कंपनियां देश में कई हजार करोड़ रुपये का निवेश करेंगी। उन्होंने कहा कि लावा, डिक्सन टेक्नोलॉजीस, भगवती (माइक्रोमैक्स), पैजेट इलेक्ट्रॉनिक्स, सोजो मैन्युफक्चरिंग सर्विसेस और ऑप्टिमस इलेक्ट्रॉनिक्स जैसी भारतीय कंपनियों ने भी पीएलआई के तहत आवेदन किया है। जबकि 10 अन्य कंपनियों ने विशेषीकृत इलेक्ट्रॉनिक्स कलपुर्जे श्रेणी के तहत आवेदन किया है। ये प्रस्ताव करीब 45,000 करोड़ रुपये के हैं। इनमें आवेदन करने वाली प्रमुख कंपनियों में एटीएंडएस, एसेंट सर्किट्स, विजिकॉन, वालसिन, सहस्रा, विटेस्को और नियोलिंक शामिल हैं।

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