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हिंदुस्तान कॉपर ने शुरू की निवेशक की तलाश, दो करोड़ टन उत्पादन का बनाया टारगेट

कंपनी की अयस्क उत्पादन क्षमता को 40 लाख टन से बढ़ाकर 1.22 करोड़ टन सालाना करने का टारगेट।

हिंदुस्तान कॉपर ने शुरू की निवेशक की तलाश, दो करोड़ टन उत्पादन का बनाया टारगेट
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कोरोना काल और लॉकडाउन के बाद से ही घाटे की तरफ जा रही हिंदुस्तान कॉपर लिमिटेड ने एक मजबूत वित्तीय क्षमता के लिए भागीदार यानि निवेश की तलाश शुरू कर दी है। इतना ही नहीं कंपनी अपनी सालाना निवेश अयस्क क्षमता को तेजी से बढाना चाहती है। जिसके लिए कंपनी लग भग सारी प्लानिंग कर ली हैं, लेकिन सामने आ रही पैसे की समस्या को सुलझाने के लिए अब कंपनी किसी साझेदार की तलाश में है। जिसके साथ कंपनी को तेजी के साथ आगे बढाया जा सके।

दरअसल, हिंदुस्तान कॉपर के चेयरमैन एवं प्रबंध निदेशक अरुण कुमार शुक्ला ने यह जानकारी साझा की है। इसमें शुक्ला ने दावा किया कि कंपनी पहले चरण में अपनी अयस्क उत्पादन क्षमता को 40 लाख टन से बढ़ाकर 1.22 करोड़ टन सालाना करेगी। उसके बाद इसे सरकार की आत्मनिर्भर भारत' पहल के तहत 2.02 करोड़ टन सालाना किया जाएगा। उन्होंने कहा कि इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए कंपनी को मजबूत वित्तीय पृष्ठभूमि वाले भागीदार की तलाश है। इससे कंपनी भविष्य की खान विस्तार परियोजनाओं को तेजी से आगे बढ़ा पाएगी। शुक्ला ने कहा कि पहले चरण में अयस्क उत्पादन को तीन गुना करने का लक्ष्य सात से आठ साल में हासिल हो जाएगा। एचसीएल फिलहाल निचले ग्रेड के अयस्क की समस्या से जूझ रही है।

कंपनी प्रमुख ने कहा कि 2020-21 के अंत तक भूमिगत खान से अयस्क उत्पादन शुरू होने की उम्मीद है। इससे यह समस्या आंशिक रूप से हल हो जाएगी। इससे पहले शुक्ला ने कहा था कि 2019-20 में कमजोर प्रदर्शन की वजह से कंपनी की हालत काफी खराब है। उन्होंने कर्मचारियो से मुश्किल समय के लिए तैयार रहने का कहा था। हिंदुस्तान कॉपर को मार्च, 2020 में समाप्त तिमाही में 514.27 करोड़ रुपये का एकीकृत घाटा हुआ है। बीते पूरे वित्त वर्ष यानी 2019-20 में कंपनी को 569.21 करोड़ रुपये का एकीकृत घाटा हुआ है।

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