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गूगल के सीईओ समेत तीन शीर्ष अधिकारियों को मिली राहत, यूपी पुलिस ने एफआईआर में से नाम हटाया, जानिए क्या है पूरा मामला

पी पुलिस ने गूगल के सीईओ समेत 17 अन्य लोगों के खिलाफ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को बदनाम करने के आरोप में मामला दर्ज किया था। हालांकि बाद में यूपी पुलिस ने सुंदर पिचाई समेत गूगल के तीन शीर्ष अधिकारियों के नाम एफआईआर में से हटा दिए।

गूगल के सीईओ समेत तीन शीर्ष अधिकारियों को मिली राहत, यूपी पुलिस ने एफआईआर में से नाम हटाया, जानिए क्या है पूरा मामला
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गूगल के सीईओ समेत तीन शीर्ष अधिकारियों को मिली राहत

वाराणसी। गूगल के सीईओ सुंदर पिचाई (Google CEO Sundar Pichai) को यूपी पुलिस से राहत मिली है। दरअसल, यूपी पुलिस ने गूगल के सीईओ समेत 17 अन्य लोगों के खिलाफ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Prime Minister Narendra Modi) को बदनाम करने के आरोप में मामला दर्ज किया था। हालांकि बाद में यूपी पुलिस ने सुंदर पिचाई समेत गूगल के तीन शीर्ष अधिकारियों के नाम एफआईआर (FIR) में से हटा दिए। पुलिस अधिकारियों ने शुक्रवार को यह जानकारी दी है। जांच में शामिल एक पुलिस अधिकारी ने बताया कि इस मामले की जांच के बाद पिचाई और Google के तीन शीर्ष अधिकारियों के नाम हटा दिए गए हैं।

स्थानीय निवासी की शिकायत के बाद दर्ज की गई FIR

अधिकारियों के मुताबिक, प्राथमिकी एक स्थानीय निवासी की शिकायत के बाद दर्ज की गई जिसने दावा किया कि वीडियो पर आपत्ति जताए जाने के बाद उसके मोबाइल फोन पर 8,500 से अधिक धमकी भरे कॉल आए। यह वीडियो सबसे पहले एक व्हाट्सऐप ग्रुप में आया और बाद में यूट्यूब पर इसे अपलोड किया गया। वीडियो के पांच लाख से व्यूज हैं। 6 फरवरी को भेलूपुर पुलिस स्टेशन में दर्ज प्राथमिकी में अमेरिका के रहने वाले सुंदर पिचाई के अलावा, एफआईआर में नामित अन्य लोग संजय कुमार गुप्ता सहित गूगल इंडिया के तीन अधिकारियों के नाम शामिल थे। इस मामले Google की तरफ से फिलाहल कोई प्रतिक्रिया नहीं आयी है।

FIR में एक संगीतकार का नाम भी शामिल

एफआईआर में गाजीपुर जिले के एक संगीतकार का भी नाम है, जिसने कथित तौर पर यह वीडियो गीत बनाया। प्राथमिकी भारतीय दंड संहिता की धाराओं 504 (शांति भंग करने के इरादे से जानबूझकर अपमान), 506 (आपराधिक धमकी), 500 (मानहानि), 120 बी (आपराधिक साजिश) के तहत दर्ज की गई है। एफआईआर के अनुसार, सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 67 (अश्लील सामग्री को प्रकाशित करना या प्रसारित करना) के तहत भी आरोपियों के खिलाफ आरोप लगाए गए हैं।

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