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GST से कम हुई ब्याज दरें और दोगुनी हुई टैक्स पेयर्स की संख्या, वित्त मंत्रालय ने किया ट्वीट

जीएसटी की वजह से ही टैक्स पेयर्स की संख्या दोगुनी होकर 1.24 करोड़ पहुंची। उपभोक्ता और करदाताओं के लिए फायदेंमंद हैं जीएसटी

GST से कम हुई ब्याज दरें और दोगुनी हुई टैक्स पेयर्स की संख्या, वित्त मंत्रालय ने किया ट्वीट
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लॉकडाउन के बाद कोरोना काल के बीच वित्त मंत्रालय ने एक बार फिर से जीएसटी की समीक्षा की है। इसमें वित्त मंत्रालय (Finance Ministry) ने कहा है कि माल एवं सेवा कर (GST) की वजह से टैक्स की ब्याज दरें पहले के मुकाबले कम हुई है। इससे अनुपालन बढ़ाने में मदद मिली है। साथ ही (Tax Payers) टैक्स पेयर्स की संख्या भी दोगुना होकर 1.24 करोड़ पर पहुंच गई है। पूर्व वित्त मंत्री अरुण जेटली की पहली पुण्यतिथि पर वित्त मंत्रालय ने सोमवार को कई ट्वीट कर यह बात कही हैं।

दरअसल, मंत्रालय ने कहा कि जीएसटी से पहले मूल्यवर्धित कर (VAT), उत्पाद शुल्क और बिक्री कर देना पड़ता था। सामूहिक रूप से इनकी वजह से (Tax) टैक्स की मानक दर 31 प्रतिशत तक पहुंच जाती थी। मंत्रालय ने कहा कि अब व्यापक रूप से सब मानने लगे हैं कि जीएसटी उपभोक्ताओं और करदाताओं दोनों के अनुकूल है। जीएसटी से पहले टैक्स की ऊंची ब्याज दर की वजह से लोग करों का भुगतान करने में हतोत्साहित होते थे, लेकिन जीएसटी के तहत निचली दरों से कर अनुपालन बढ़ा है। मंत्रालय ने कहा कि जिस समय जीएसटी लागू किया गया था उस समय इसके तहत आने वाले करदाताओं की संख्या 65 लाख थी। आज यह आंकड़ा बढ़कर 1.24 करोड़ पर पहुंच गया है। जीएसटी में 17 स्थानीय शुल्क समाहित हुए हैं।

जीएसटी को देश में एक जुलाई, 2017 से लागू किया गया था। नरेंद्र मोदी सरकार के पहले कार्यकाल में अरुण जेटली वित्त मंत्री थे। मंत्रालय ने ट्वीट किया कि आज हम अरुण जेटली को याद कर रहे हैं। जीएसटी के क्रियान्वयन में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही। इतिहास में इसे भारतीय कराधान का सबसे बुनियादी ऐतिहासिक सुधारों में गिना जाएगा। वहीं मंत्रालय ने कहा कि लोग जिस दर पर टैक्स चुकाते थे, जीएसटी व्यवस्था में उसमें भी कमी आई है। राजस्व तटस्थ दर (RNR) समिति के अनुसार राजस्व तटस्थ दर 15.3 प्रतिशत है। वहीं रिजर्व बैंक के अनुसार अभी जीएसटी की भारित दर सिर्फ 11.6 प्रतिशत है। ट्वीट में कहा गया है कि 40 लाख रुपये तक के कारोबार वाली कंपनियों को जीएसटी की छूट मिलती है। शुरुआत में यह सीमा 20 लाख रुपये थी। इसके अलावा डेढ़ करोड़ रुपये तक के कारोबार वाली कंपनियां कम्पोजिशन योजना का विकल्प ले सकती हैं। उन्हें सिर्फ 1 प्रतिशत टैक्स देना होता है। मंत्रालय ने कहा कि पहले 230 उत्पाद सबसे ऊंचे 28 प्रतिशत के कर स्लैब में आते थे। आज 28 प्रतिशत का स्लैब सिर्फ अहितकर और विलासिता की वस्तुओं पर लगता है।

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